जगदलपुर में राजनीतिक-सामाजिक संगठनों की बैठक, जल-जंगल-जमीन, आदिवासी अधिकार और स्थानीय रोजगार पर साझा संघर्ष का संकल्प
छत्तीसगढ़/जगदलपुर :- छत्तीसगढ़ की राजनीति में भाजपा और कांग्रेस से अलग वैकल्पिक मंच खड़ा करने की कवायद तेज होती नजर आ रही है। रायपुर में 4 अक्टूबर को हुई बैठक के बाद जगदलपुर के जनता दरबार में विभिन्न राजनीतिक दलों और सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधियों ने बैठक कर आगामी 25 अक्टूबर को रायपुर में प्रस्तावित बड़ी बैठक की रणनीति पर चर्चा की।
बैठक में भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (CPI), बस्तर अधिकार मुक्ति मोर्चा, आदिवासी महासभा दंतेवाड़ा, भारत मुक्ति मोर्चा, जनता कांग्रेस छत्तीसगढ़ (जे), भीम आर्मी और छत्तीसगढ़िया क्रांति सेना के प्रतिनिधि शामिल हुए। बैठक में साझा राजनीतिक एजेंडा, संगठनात्मक समन्वय और भविष्य की रणनीति पर विचार-विमर्श किया गया।
बस्तर के मुद्दों पर बनेगा साझा एजेंडा
बैठक में जल-जंगल-जमीन, पेसा एवं वनाधिकार कानून का प्रभावी क्रियान्वयन, आदिवासी अधिकारों की रक्षा, स्थानीय युवाओं को रोजगार, किसानों की समस्याएं, खनिज संपदा में स्थानीय भागीदारी तथा डीएमएफ-सीएसआर राशि के उपयोग में पारदर्शिता जैसे मुद्दों को प्राथमिकता देने पर जोर दिया गया।
प्रतिनिधियों का कहना था कि बस्तर की प्राकृतिक संपदा का लाभ स्थानीय लोगों तक पहुंचना चाहिए। प्रस्तावित वैकल्पिक मंच के माध्यम से क्षेत्रीय अस्मिता और जनहित के सवालों को प्रदेश की राजनीति में प्रमुखता से उठाने की जरूरत बताई गई।
25 अक्टूबर की बैठक पर टिकी निगाहें
जनता कांग्रेस छत्तीसगढ़ (जे) के प्रदेश उपाध्यक्ष एवं बस्तर अधिकार मुक्ति मोर्चा के मुख्य संयोजक नवनीत चाँद और रायपुर संभाग अध्यक्ष जितेंद्र बंजारे ने संयुक्त बयान में कहा कि वैकल्पिक राजनीतिक मंच का उद्देश्य केवल चुनावी तालमेल नहीं, बल्कि जनता के वास्तविक मुद्दों को राजनीतिक एजेंडे में प्राथमिकता दिलाना होना चाहिए।
उन्होंने कहा कि आगामी 25 अक्टूबर की रायपुर बैठक में साझा न्यूनतम कार्यक्रम, संगठनात्मक समन्वय और आगे की रणनीति पर व्यापक चर्चा की जाएगी। बैठक में साझा घोषणापत्र और मंच के स्वरूप पर सहभागी संगठनों की सहमति से निर्णय लेने पर भी जोर दिया गया।
अब देखना होगा कि विभिन्न राजनीतिक और सामाजिक संगठनों की यह पहल तीसरे मोर्चे के रूप में कितना ठोस आकार लेती है और प्रदेश की राजनीति में भाजपा-कांग्रेस के विकल्प के रूप में अपनी कितनी मजबूत पहचान बना पाती है।
“बस्तर के अधिकार, छत्तीसगढ़ के हित—जनता की आवाज सड़क से सदन तक!”












