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नवरात्रि के पहले ही दिन गरबा-डांडिया समितियों ने तोड़े प्रशासन के निर्देश, 15-20 मिनट अतिरिक्त चला आयोजन!

रात 10 बजे तक की अनुमति के बावजूद जारी रहा कार्यक्रम, पुलिस प्रशासन के हस्तक्षेप और सख्ती के बाद आखिरकार बंद करना पड़ा आयोजन; स्पष्ट निर्देशों के बावजूद प्रशासन को सहयोग करने के मूड में नहीं दिख रहीं समितियां

छत्तीसगढ़/कोरबा :-  नवरात्रि के पहले ही दिन गरबा-डांडिया उत्सव समितियों की कार्यशैली ने प्रशासन के निर्देशों के पालन पर सवाल खड़े कर दिए हैं। प्रशासन ने आयोजन समितियों के लिए रात 10 बजे तक की समय-सीमा निर्धारित की है, इसके बावजूद कुछ स्थानों पर तय समय के बाद भी गरबा-डांडिया कार्यक्रम जारी रहे। पहले ही दिन 15 से 20 मिनट अतिरिक्त आयोजन चलने की स्थिति सामने आई। पुलिस प्रशासन के हस्तक्षेप और सख्ती के बाद आखिरकार कार्यक्रम बंद कराना पड़ा। इस घटनाक्रम से ऐसा प्रतीत हुआ कि कुछ आयोजन समितियां स्पष्ट निर्देशों के बावजूद प्रशासन को सहयोग करने के मूड में नहीं हैं। जब समय-सीमा पहले से तय है, तो फिर उसका पालन करने में आनाकानी क्यों?

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शहर के चौक-चौराहों से आयोजन स्थलों तक पुलिस की मुस्तैदी

नवरात्रि के पहले दिन शहर के विभिन्न चौक-चौराहों, दुर्गा पूजा उत्सव स्थलों, गरबा-डांडिया आयोजन स्थलों और दशहरा उत्सव समितियों के आसपास पुलिस प्रशासन की टीम मुस्तैदी से मौजूद रही। कानून-व्यवस्था बनाए रखने और आयोजनों को निर्धारित समय-सीमा के भीतर संपन्न कराने के लिए पुलिस की निगरानी रही। इसके बावजूद कुछ आयोजन स्थलों पर रात 10 बजे के बाद भी कार्यक्रम जारी रहने की स्थिति सामने आई। पुलिस प्रशासन को हस्तक्षेप करना पड़ा और सख्ती के बाद आयोजन बंद कराना पड़ा।

पहले ही दिन नियमों की अनदेखी, पुलिस की सख्ती के बाद बंद हुआ आयोजन

नवरात्रि के दौरान शहर में गरबा-डांडिया, दुर्गा पूजा और दशहरा उत्सवों की धूम है। बड़ी संख्या में लोग इन आयोजनों में शामिल हो रहे हैं। ऐसे में कानून-व्यवस्था बनाए रखना और निर्धारित समय-सीमा का पालन सुनिश्चित करना प्रशासन की प्राथमिकता है। लेकिन उत्सव के पहले ही दिन कुछ आयोजनों में तय समय से अधिक कार्यक्रम जारी रहने की स्थिति सामने आई।

शहर के फेस वन स्थित दुर्गा पूजा एवं दशहरा उत्सव समिति के आयोजन के दौरान रात 10 बजे के बाद भी गरबा कार्यक्रम जारी रहने की बात सामने आई। बताया गया कि समिति की ओर से पहले गरबा उत्सव के लिए 10 मिनट का अतिरिक्त समय मांगा गया। इसके बाद भी कार्यक्रम जारी रहने पर पुलिस प्रशासन की टीम मौके पर पहुंची और आयोजकों को निर्धारित समय-सीमा का पालन करने के लिए सख्त निर्देश दिए। नियमों का उल्लंघन जारी रहने पर कानूनी कार्रवाई की चेतावनी भी दी गई। पुलिस प्रशासन के हस्तक्षेप और सख्ती के बाद आखिरकार कार्यक्रम बंद कराया गया।

रात 10 बजे तक की अनुमति, फिर 15-20 मिनट अतिरिक्त आयोजन क्यों?

जब आयोजन के लिए समय-सीमा पहले से निर्धारित है, तो उसके बाद भी कार्यक्रम जारी रखने की जरूरत क्यों पड़ रही है? क्या समितियों को प्रशासन के निर्देशों की जानकारी नहीं है, या फिर जानकारी होने के बावजूद उनका पालन करने को गंभीरता से नहीं लिया जा रहा है?

यदि प्रत्येक आयोजन समिति अपनी सुविधा के अनुसार निर्धारित समय से अतिरिक्त अवधि तक कार्यक्रम चलाने लगे, तो प्रशासन के निर्देशों का पालन सुनिश्चित करना चुनौतीपूर्ण हो सकता है। धार्मिक उत्सवों में उत्साह और श्रद्धा स्वाभाविक है, लेकिन इसका अर्थ यह नहीं कि समय-सीमा को अपनी सुविधानुसार बढ़ा लिया जाए। आयोजकों को यह समझना होगा कि उत्सव की व्यवस्था बनाए रखने में उनकी भी महत्वपूर्ण जिम्मेदारी है।

स्पष्ट निर्देशों के बावजूद प्रशासन को सहयोग करने के मूड में नहीं दिख रहीं समितियां

नवरात्रि के आयोजन धार्मिक आस्था, सांस्कृतिक परंपरा और सामाजिक एकजुटता के प्रतीक हैं। इन आयोजनों की सफलता के लिए आयोजन समितियों और प्रशासन के बीच समन्वय जरूरी है। लेकिन जब पहले ही दिन तय समय से अधिक कार्यक्रम जारी रहने की स्थिति सामने आती है, तो समितियों की जिम्मेदारी पर सवाल उठना स्वाभाविक है।

प्रशासन ने रात 10 बजे तक आयोजन करने के निर्देश दिए हैं। ऐसे में सभी समितियों से अपेक्षा है कि वे अपनी कार्यक्रम-सारिणी उसी के अनुसार तैयार करें और निर्धारित समय पर आयोजन समाप्त करें। इसके बावजूद यदि कार्यक्रम अतिरिक्त 15 से 20 मिनट तक जारी रहता है और उसे बंद कराने के लिए पुलिस को हस्तक्षेप करना पड़ता है, तो यह स्थिति आयोजकों के सहयोगात्मक रवैये पर सवाल खड़े करती है।

प्रशासन के निर्देशों का पालन करना किसी समिति की इच्छा पर निर्भर नहीं होना चाहिए। सभी आयोजकों को यह समझना होगा कि धार्मिक उत्सवों की आड़ में निर्धारित समय-सीमा की अनदेखी करना उचित नहीं है। उत्सव मनाने का अधिकार अपनी जगह है, लेकिन नियमों का पालन करना भी उतना ही जरूरी है।

साउंड सिस्टम जब्त करने की चेतावनी, फिर भी नियमों की अनदेखी?

प्रशासन की ओर से नियमों के उल्लंघन पर साउंड सिस्टम जब्त करने जैसी कार्रवाई की चेतावनी दिए जाने की बात सामने आई है। इसके बावजूद पहले ही दिन निर्धारित समय के बाद कार्यक्रम जारी रहने की स्थिति ने निगरानी और नियमों के पालन को लेकर चर्चा शुरू कर दी है।

अब नवरात्रि के शेष आठ दिनों में आयोजनों पर प्रशासन की निगरानी महत्वपूर्ण होगी। देखना होगा कि पहले दिन पुलिस प्रशासन के हस्तक्षेप और सख्ती के बाद समितियां अपने रवैये में बदलाव लाती हैं या फिर निर्धारित समय के बाद भी आयोजन जारी रखने की स्थिति बनती है। प्रशासन को भी सभी आयोजन स्थलों पर नियमों का समान रूप से पालन सुनिश्चित करना होगा।

उत्सव के नाम पर मनमानी नहीं, नियमों का पालन भी जरूरी

नवरात्रि में गरबा-डांडिया का आयोजन श्रद्धा और उत्साह का प्रतीक है। लेकिन आयोजन की भव्यता के साथ अनुशासन बनाए रखना भी समितियों की जिम्मेदारी है। यदि प्रशासन को हर आयोजन स्थल पर समय-सीमा का पालन कराने के लिए हस्तक्षेप करना पड़े, तो यह आयोजकों और प्रशासन के बीच बेहतर समन्वय की जरूरत को दर्शाता है।

पहले ही दिन की स्थिति ने यह सवाल खड़ा कर दिया है कि जब प्रशासन ने रात 10 बजे तक आयोजन करने के स्पष्ट निर्देश दिए हैं, तो कुछ समितियां उनका पालन करने के बजाय अतिरिक्त समय तक कार्यक्रम क्यों चलाती रहीं? पुलिस प्रशासन के हस्तक्षेप और सख्ती के बाद आयोजन बंद हुआ, लेकिन आगामी दिनों में ऐसी स्थिति दोबारा न बने, इसकी जिम्मेदारी आयोजन समितियों की भी है। अब देखना होगा कि समितियां प्रशासन के निर्देशों का सम्मान करते हुए सहयोग करती हैं या फिर नियमों के पालन के लिए पुलिस को आगे भी सख्ती करनी पड़ेगी।

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