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करोड़ों का चढ़ावा, फिर भी बदहाल व्यवस्था! कीचड़, गंदगी और अव्यवस्था के बीच श्री काल भैरव के दर्शन को मजबूर श्रद्धालु

सुरक्षा व्यवस्था नदारद, आपातकालीन सुविधा नहीं, मंगलनाथ मंदिर में वीआईपी दर्शन के नाम पर केवल नकद वसूली पर भी उठे सवाल

मध्य प्रदेश/उज्जैन :-  विश्व प्रसिद्ध बाबा श्री काल भैरव मंदिर में सावन माह के दौरान लाखों श्रद्धालु दर्शन के लिए पहुंच रहे हैं। श्रद्धालुओं की आस्था चरम पर है, लेकिन मंदिर परिसर में उन्हें जिन परिस्थितियों का सामना करना पड़ रहा है, वह मंदिर प्रशासन की व्यवस्थाओं पर गंभीर सवाल खड़े कर रही हैं। करोड़ों रुपये के चढ़ावे के बावजूद श्रद्धालु कीचड़, गंदगी और बदबू के बीच घंटों लाइन में खड़े होकर दर्शन करने को मजबूर हैं।

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बैरिकेड्स में कीचड़, बदबू और सड़ता प्रसाद

दर्शन के लिए बनाए गए बैरिकेड्स वाले प्रतीक्षा मार्ग में जगह-जगह कीचड़, जलभराव और गंदगी फैली हुई है। श्रद्धालुओं द्वारा वर्षों से बांधे गए मन्नत के धागे बारिश में सड़ रहे हैं। वहीं लाइन में गिरा प्रसाद, फूल-माला और अन्य पूजन सामग्री समय पर नहीं हटाए जाने से दुर्गंध फैल रही है। प्रतीक्षा मार्ग की स्थिति देखकर ऐसा प्रतीत होता है कि लंबे समय से वहां समुचित सफाई और रखरखाव नहीं किया गया है।

उखड़े पत्थर, गड्ढे और जलभराव से बढ़ी परेशानी

मंदिर परिसर के कई स्थानों पर फर्श के पत्थर उखड़े हुए हैं। गड्ढों में बारिश का पानी भर जाने से कीचड़ और बदबू की समस्या और गंभीर हो गई है। जमा कचरा और मलबा श्रद्धालुओं के लिए अतिरिक्त परेशानी का कारण बन रहा है।

सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल

सबसे चिंताजनक पहलू यह है कि जहां हजारों श्रद्धालु घंटों लाइन में खड़े रहते हैं, वहां सुरक्षा की पर्याप्त व्यवस्था दिखाई नहीं देती। प्रतीक्षा मार्ग में न तो पर्याप्त सुरक्षा गार्ड तैनात हैं और न ही किसी प्रकार की आपातकालीन चिकित्सा सुविधा या प्राथमिक उपचार केंद्र नजर आता है। यदि भीड़ के बीच किसी श्रद्धालु की अचानक तबीयत बिगड़ जाए या कोई अप्रिय घटना हो जाए, तो उसकी जिम्मेदारी कौन लेगा? यह सवाल श्रद्धालुओं के मन में लगातार उठ रहा है।

महिला-पुरुष एक ही कतार में, भगदड़ का खतरा

भीड़ अधिक होने के बावजूद कई स्थानों पर महिला और पुरुष श्रद्धालुओं के लिए अलग-अलग कतारों की समुचित व्यवस्था नहीं दिखाई देती। एक ही लाइन में अत्यधिक भीड़ होने से धक्का-मुक्की और भगदड़ जैसी स्थिति बनने की आशंका बनी रहती है। सावन जैसे भीड़भाड़ वाले अवसर पर यह स्थिति किसी बड़े हादसे को भी न्योता दे सकती है।

मंदिर परिसर के बाहर भी बदहाल हालात

मंदिर के आसपास लगी दुकानों तक जाने वाले मार्गों पर भी भारी कीचड़ और गंदगी का आलम है। बुजुर्ग, महिलाएं और छोटे बच्चों को आवागमन में काफी कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है।

मंगलनाथ मंदिर में वीआईपी दर्शन व्यवस्था पर भी उठे सवाल

उज्जैन के प्रसिद्ध मंगलनाथ मंदिर में भी वीआईपी दर्शन व्यवस्था को लेकर श्रद्धालुओं ने सवाल उठाए हैं। आरोप है कि वीआईपी दर्शन के लिए निर्धारित शुल्क केवल नकद (कैश) में लिया जा रहा है और डिजिटल भुगतान स्वीकार नहीं किया जा रहा। जबकि स्वत: दान देने वाले श्रद्धालियों का डिजिटल भुगतान स्वीकार किया जा रहा है आखिर क्यों ? जबकि vip दर्शन कर ले वालों का नहीं, श्रद्धालुओं का कहना है कि डिजिटल भुगतान से इनकार किए जाने के कारण पूरी प्रक्रिया की पारदर्शिता पर प्रश्नचिह्न लग रहे हैं।

यदि वास्तव में अधिकृत शुल्क लिया जा रहा है, तो डिजिटल भुगतान, रसीद और कर संबंधी नियमों का पालन सुनिश्चित किया जाना चाहिए। यदि किसी प्रकार का कर देय है और उसका पालन नहीं हो रहा, तो यह संबंधित जांच का विषय हो सकता है। इस मामले में सक्षम अधिकारियों द्वारा तथ्यात्मक जांच आवश्यक है, ताकि यह स्पष्ट हो सके कि निर्धारित नियमों का पालन किया जा रहा है या नहीं।

श्रद्धालुओं की मांग

श्रद्धालुओं ने मंदिर प्रशासन और जिला प्रशासन से मांग की है कि सावन माह में विशेष सफाई अभियान चलाया जाए, जल निकासी की समुचित व्यवस्था की जाए, प्रतीक्षा मार्गों का रखरखाव कराया जाए, पर्याप्त सुरक्षा बल एवं चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएं तथा महिला-पुरुषों के लिए अलग-अलग कतारों की व्यवस्था सुनिश्चित की जाए। साथ ही वीआईपी दर्शन व्यवस्था में पूर्ण पारदर्शिता लाते हुए डिजिटल भुगतान और विधिसम्मत रसीद की व्यवस्था भी लागू की जाए।

आस्था अटूट है, लेकिन करोड़ों के चढ़ावे वाले धार्मिक स्थलों पर श्रद्धालुओं को सम्मानजनक, सुरक्षित और स्वच्छ वातावरण उपलब्ध कराना भी मंदिर प्रशासन की उतनी ही बड़ी जिम्मेदारी है।   

आखिर संबंधित विभागों की भूमिका कहां है?

विश्व प्रसिद्ध धार्मिक स्थलों पर प्रतिदिन हजारों और सावन जैसे अवसरों पर लाखों श्रद्धालु पहुंचते हैं। ऐसे में सवाल केवल मंदिर प्रबंधन पर ही नहीं, बल्कि उन सभी संबंधित विभागों पर भी उठता है जिनकी जिम्मेदारी श्रद्धालुओं की सुरक्षा, स्वास्थ्य, स्वच्छता और वित्तीय पारदर्शिता सुनिश्चित करना है।

यदि मंदिर परिसर और उसके आसपास गंदगी, कीचड़, जलभराव और बदहाल व्यवस्थाएं हैं, तो उज्जैन नगर निगम की नियमित सफाई और स्वच्छता व्यवस्था पर सवाल उठना स्वाभाविक है। यदि हजारों श्रद्धालुओं की भीड़ के बीच पर्याप्त सुरक्षा और आपातकालीन चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध नहीं हैं, तो जिला प्रशासन, पुलिस प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग की तैयारियों की भी समीक्षा आवश्यक है।

इसी प्रकार, यदि किसी धार्मिक स्थल पर वीआईपी दर्शन के नाम पर शुल्क लिया जा रहा है और श्रद्धालुओं को डिजिटल भुगतान की सुविधा उपलब्ध नहीं कराई जा रही है, तो इसकी पारदर्शिता सुनिश्चित करना संबंधित प्रबंधन की जिम्मेदारी है। आवश्यकता पड़ने पर जीएसटी विभाग और आयकर विभाग भी यह देख सकते हैं कि शुल्क संग्रह और लेखांकन से जुड़े सभी वैधानिक प्रावधानों का पालन हो रहा है या नहीं। यह संबंधित सक्षम अधिकारियों द्वारा जांच का विषय है।

सबसे बड़ा प्रश्न यह है कि जब करोड़ों रुपये का चढ़ावा और भारी संख्या में श्रद्धालुओं का आगमन होता है, तब मंदिर प्रबंधन, जिला प्रशासन, नगर निगम, पुलिस, स्वास्थ्य विभाग तथा अन्य संबंधित विभागों के बीच समन्वित निगरानी और नियमित निरीक्षण व्यवस्था क्यों दिखाई नहीं देती?

आस्था के केंद्रों पर श्रद्धालुओं को केवल दर्शन ही नहीं, बल्कि स्वच्छ वातावरण, सुरक्षित व्यवस्था, आपातकालीन चिकित्सा सुविधा, सुगम आवागमन और पारदर्शी प्रशासन भी मिलना चाहिए। यदि व्यवस्थाओं में कहीं कमी है, तो उसका समय रहते निराकरण करना संबंधित विभागों की संयुक्त जिम्मेदारी है।

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