छत्तीसगढ़/कोरबा :- खनन प्रभावित गेवरा क्षेत्र के दीर्घकालिक और सतत विकास की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल करते हुए कलेक्टर एवं माइनिंग प्लान व माइन क्लोजर एडवाइजरी कमिटी के चेयरमैन श्री कुणाल दुदावत की अध्यक्षता में बुधवार को कलेक्ट्रेट सभाकक्ष में हितधारक बैठक आयोजित की गई। बैठक का आयोजन भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी) कानपुर के जस्ट ट्रांजिशन रिसर्च सेंटर (JTRC) द्वारा किया गया।
बैठक में गेवरा क्षेत्र में भविष्य में खनन गतिविधियों में होने वाले क्रमिक बदलाव के बाद सामाजिक, आर्थिक और पर्यावरणीय विकास की संभावनाओं पर विस्तृत चर्चा हुई। इसमें एसईसीएल के वरिष्ठ अधिकारी, माइन क्लोजर एडवाइजरी कमेटी के सदस्य, जनप्रतिनिधि, ग्राम पंचायतों के सरपंच, पार्षद, विभिन्न विभागों के अधिकारी तथा अन्य हितधारक शामिल हुए। 
कलेक्टर कुणाल दुदावत ने कहा कि खनन प्रभावित क्षेत्रों का भविष्य सुरक्षित और समृद्ध बनाने के लिए स्थानीय जरूरतों के अनुरूप व्यवहारिक एवं दीर्घकालिक कार्ययोजना तैयार की जाएगी। उन्होंने कहा कि शासन की योजनाओं, उपलब्ध वित्तीय एवं नियामकीय प्रावधानों तथा स्थानीय समुदाय की सक्रिय भागीदारी के समन्वय से रोजगार, आजीविका और सतत विकास के नए अवसर सृजित किए जाएंगे।
बैठक में आईआईटी कानपुर के प्रोफेसर प्रदीप स्वर्णकार ने वर्ष 2025 के अद्यतन माइन क्लोजर दिशानिर्देशों के अंतर्गत रीक्लेम फ्रेमवर्क की जानकारी दी। उन्होंने कहा कि खनन समाप्त होने के बाद भी क्षेत्र का सामाजिक, आर्थिक और पर्यावरणीय विकास बना रहे, इसके लिए स्थानीय लोगों की राय और अपेक्षाओं को योजना निर्माण का आधार बनाया जाना चाहिए।
बैठक के दौरान स्थानीय परिस्थितियों, चुनौतियों और जन-आकांक्षाओं पर विस्तार से चर्चा की गई। प्रतिभागियों से प्राप्त सुझावों के आधार पर साक्ष्य-आधारित पुनर्प्रयोजन रणनीति तैयार करने पर सहमति बनी, जिससे भविष्य की योजनाएं स्थानीय आवश्यकताओं के अनुरूप विकसित की जा सकें।
बैठक में युवाओं एवं महिलाओं के बहु-कौशल विकास पर विशेष जोर दिया गया। प्रस्तावित पुनर्प्रयोजन योजना में तकनीकी विकास, कृषि, पर्यटन, पारिस्थितिकीय पुनर्स्थापन, आजीविका विविधीकरण, कौशल विकास तथा नवीकरणीय ऊर्जा जैसे क्षेत्रों को प्राथमिकता देने का निर्णय लिया गया।
बैठक के अंत में सभी हितधारकों ने इस बात पर सहमति व्यक्त की कि गेवरा क्षेत्र के लिए स्थानीय अपेक्षाओं और जरूरतों के अनुरूप एक दीर्घकालिक, व्यवहारिक एवं समावेशी पुनर्प्रयोजन कार्ययोजना तैयार की जाएगी, जिससे खनन के बाद भी क्षेत्र के विकास की गति बनी रहे।












