HomeBreaking Newsसड़क नहीं, जानलेवा धूल का गुब्बार बना सीपत-कुली-खमहरिया मार्ग

सड़क नहीं, जानलेवा धूल का गुब्बार बना सीपत-कुली-खमहरिया मार्ग

15 से अधिक मौतों का दावा, युवा शक्ति संगठन व ग्रामीणों ने कलेक्टर को सौंपा ज्ञापन; 7 दिन में कार्रवाई नहीं तो आंदोलन और PIL की चेतावनी

छत्तीसगढ़/बिलासपुर/कोरबा :-  सीपत-कुली-खमहरिया मार्ग पर जर्जर सड़क, भारी वाहनों की आवाजाही और उड़ती धूल को लेकर क्षेत्र के ग्रामीणों में आक्रोश बढ़ता जा रहा है। सड़क की बदहाल स्थिति और कथित तौर पर लगातार हो रहे हादसों के विरोध में युवा शक्ति संगठन एवं क्षेत्र के ग्रामीणों ने बिलासपुर कलेक्टर को जनदर्शन में ज्ञापन सौंपकर तत्काल कार्रवाई की मांग की है। ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि यदि सात दिनों के भीतर धूल नियंत्रण और सड़क निर्माण को लेकर ठोस कदम नहीं उठाए गए तो वे अहिंसक एवं लोकतांत्रिक तरीके से व्यापक जन-आंदोलन करेंगे।

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ग्रामीणों के अनुसार कुली, खमहरिया, कुकदा, मडई, ऊनी, लुतरा, बछौद और सीपत क्षेत्र के लोगों को इस मार्ग की बदहाल स्थिति के कारण रोजाना परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। उनका आरोप है कि सड़क पर उड़ने वाली धूल का सीधा असर स्कूली बच्चों और आसपास रहने वाले ग्रामीणों के स्वास्थ्य पर पड़ रहा है। 

स्कूलों के आसपास धूल से परेशानी

ग्रामीणों ने बताया कि प्राथमिक शाला कुली की कक्षाओं के अंदर तक दिनभर धूल पहुंच रही है, जिससे बच्चों की आंखों, त्वचा और सांस संबंधी स्वास्थ्य पर प्रतिकूल असर पड़ने की आशंका है। वहीं खमहरिया हायर सेकंडरी स्कूल के आसपास भारी वाहनों के गुजरने पर धूल का गुबार छा जाता है, जिससे दृश्यता कम होने के कारण हादसे का खतरा बना रहता है।

15 से अधिक मौतों का दावा

ज्ञापन में ग्रामीणों ने दावा किया है कि बीते कुछ समय में ग्राम कुली क्षेत्र में जर्जर सड़क और भारी वाहनों की आवाजाही के कारण 15 से अधिक ग्रामीणों की मौत हो चुकी है। हाल ही में 6 सितंबर 2026 को इसी मार्ग पर एक 35 वर्षीय महिला की मौत होने का भी उल्लेख किया गया है। ग्रामीणों ने मृत महिला के परिजनों को तत्काल उचित शासकीय आर्थिक सहायता देने की मांग की है।

19.84 करोड़ रुपये का टेंडर, फिर भी सड़क निर्माण शुरू नहीं

ग्रामीणों का कहना है कि PWD विभाग द्वारा सड़क निर्माण के लिए करीब 19.84 करोड़ रुपये का टेंडर स्वीकृत होने की जानकारी है, लेकिन इसके बावजूद निर्माण कार्य अब तक शुरू नहीं हुआ है। ग्रामीणों ने सड़क पर स्ट्रीट लाइट की व्यवस्था नहीं होने से रात के समय दुर्घटनाओं का खतरा बढ़ने की बात भी कही है।

ओवरलोड वाहनों पर कार्रवाई की मांग

ज्ञापन में ग्रामीणों ने 25 टन क्षमता वाली ग्रामीण सड़क पर कथित रूप से 55 टन तक भार वाले भारी वाहनों की आवाजाही पर सवाल उठाया है। उनका आरोप है कि 18-पहिया वाहनों द्वारा एक्सल लिफ्ट कर आवागमन किए जाने से लीलागर नदी का पुल भी क्षतिग्रस्त हो रहा है। ग्रामीणों ने ओवरलोड एवं नियमविरुद्ध वाहनों पर सख्त कार्रवाई की मांग की है।

अधिकारियों पर भी लगाए गंभीर आरोप

ग्रामीणों ने सीपत थाना प्रभारी और क्षेत्रीय तहसीलदार पर स्थल निरीक्षण एवं सही रिपोर्टिंग नहीं करने का आरोप लगाया है। साथ ही PWD, RTO और माइनिंग विभाग के अधिकारियों पर भी कथित लापरवाही को लेकर कार्रवाई की मांग की गई है। ग्रामीणों का कहना है कि सड़क की गंभीर समस्या और लगातार हो रही दुर्घटनाओं के बावजूद प्रभावी कदम नहीं उठाया जा रहा है।

ग्रामीणों की प्रमुख मांगें

ग्रामीणों और युवा शक्ति संगठन ने कुली से खमहरिया मार्ग पर तत्काल टैंकरों से प्रतिदिन 4 से 5 बार जल छिड़काव कराने, स्वीकृत सड़क निर्माण कार्य तत्काल शुरू करने तथा स्कूली बच्चों के आवागमन के समय सुबह और शाम भारी वाहनों के प्रवेश पर नो-एंट्री लागू करने की मांग की है।

इसके अलावा ओवरलोड और नियमविरुद्ध वाहनों पर सार्वजनिक संपत्ति नुकसान निवारण अधिनियम (PDPP Act) सहित संबंधित प्रावधानों के तहत कार्रवाई, शराबी एवं बिना लाइसेंस वाहन चालकों की जांच, कथित रूप से लापरवाही बरतने वाले संबंधित अधिकारियों पर अनुशासनात्मक कार्रवाई और 6 सितंबर की दुर्घटना में मृत महिला के परिजनों को उचित आर्थिक सहायता देने की मांग की गई है।

सात दिन का अल्टीमेटम, आंदोलन और PIL की चेतावनी

युवा शक्ति संगठन के प्रतिनिधि अर्जुन वस्त्रकर ने कहा कि क्षेत्र के लोग अपने बच्चों के स्वास्थ्य और सड़क हादसों को लेकर चिंतित हैं। उन्होंने कहा कि यदि सात दिनों के भीतर जल छिड़काव और सड़क निर्माण का कार्य शुरू नहीं किया गया तो क्षेत्रवासी सड़कों पर उतरकर जन-प्रदर्शन करेंगे। संगठन ने इसके साथ ही मानवाधिकार आयोग (NHRC), बाल संरक्षण आयोग तथा बिलासपुर स्थित उच्च न्यायालय में जनहित याचिका (PIL) दायर करने की चेतावनी भी दी है।

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