छत्तीसगढ़/कोरबा :- विद्युत विभाग की कथित लापरवाही का खामियाजा CSEB कॉलोनी व पथर्रीपारा वार्ड क्रमांक 19 एवं 20 के रहवासियों को भुगतना पड़ा। शुक्रवार सुबह लगभग 9 बजे अचानक घरों में सामान्य 220 वोल्ट के बजाय 440 वोल्ट करंट प्रवाहित होने से अफरा-तफरी मच गई। देखते ही देखते कई घरों के टीवी, फ्रिज, कूलर, पंखे, बल्ब, ट्यूब लाइट और अन्य विद्युत उपकरण खराब हो गए। प्रारंभिक अनुमान के अनुसार घटना से कॉलोनीवासियों को लाखों रुपये का नुकसान हुआ है। 
स्थानीय लोगों के अनुसार ट्रांसफार्मर से सप्लाई देने वाली विद्युत लाइन 11 केवी लाइन के संपर्क में आ गई, जिसके चलते अचानक हाई वोल्टेज सप्लाई घरों तक पहुंच गई। घटना के दौरान कई घरों में बल्ब फूट गए, पंखों से धुआं निकलने लगा और कुछ उपकरणों में ब्लास्ट जैसी स्थिति बन गई। अचानक हुए इस घटनाक्रम से घबराए लोगों ने मुख्य स्विच और एमसीबी बंद कर घरों से बाहर निकलकर अपनी जान बचाई।
प्रत्यक्षदर्शियों का कहना है कि जब तक लोग स्थिति को समझ पाते, तब तक उनके घरों में लगे कई महंगे इलेक्ट्रॉनिक उपकरण खराब हो चुके थे। घटना के बाद प्रभावित परिवारों में भारी नाराजगी देखी गई। लोगों का सवाल है कि यदि विभाग द्वारा नियमित रखरखाव और निगरानी की जा रही है तो फिर इतनी गंभीर तकनीकी चूक कैसे हुई।
टला बड़ा हादसा
रहवासियों का कहना है कि यह केवल संयोग रहा कि इस घटना में कोई जनहानि नहीं हुई। यदि हाई वोल्टेज के कारण किसी घर में आग लग जाती तो बड़ा हादसा हो सकता था। आगजनी, करंट लगने या अन्य गंभीर घटनाओं की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता था।
भरपाई को लेकर उठे सवाल
घटना के बाद सबसे बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि खराब हुए इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों और आर्थिक नुकसान की भरपाई कौन करेगा। प्रभावित परिवारों ने विद्युत विभाग से नुकसान का सर्वे कराकर उचित मुआवजा देने की मांग की है।
मेंटेनेंस पर करोड़ों खर्च, फिर भी लचर व्यवस्था
स्थानीय नागरिकों ने आरोप लगाया कि विद्युत विभाग हर वर्ष मेंटेनेंस और लाइन सुधार कार्यों पर करोड़ों रुपये खर्च होने का दावा करता है, लेकिन जमीनी स्तर पर व्यवस्थाएं बदहाल हैं। बार-बार सामने आ रही तकनीकी खामियां विभागीय कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर रही हैं।
लोगों की मांग
कॉलोनीवासियों ने घटना की उच्च स्तरीय जांच, जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई तथा प्रभावित परिवारों को शीघ्र मुआवजा देने की मांग की है। साथ ही भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए विद्युत नेटवर्क की व्यापक जांच और सुधार कार्य कराने की आवश्यकता जताई है।












