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कोरबा के प्रवेशद्वार अब बताएंगे शहर की पहचान

थीम आधारित स्वागत द्वारों से बदलेगी ऊर्जाधानी की तस्वीर, निगम ने आम नागरिकों और कलाकारों से मांगे प्रस्ताव

छत्तीसगढ़/कोरबा :-  ऊर्जाधानी और औद्योगिक नगरी कोरबा के सौंदर्यीकरण को अब नई पहचान देने की तैयारी शुरू हो गई है। नगर पालिक निगम कोरबा शहर के प्रमुख स्थानों पर थीम आधारित आकर्षक प्रवेशद्वार बनाने जा रहा है। खास बात यह है कि इन प्रवेशद्वारों की डिजाइन केवल विशेषज्ञों तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि शहर के आम नागरिकों और स्थानीय कलाकारों की कल्पनाओं को भी इसमें शामिल किया जाएगा।

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निगम ने शहर की पहचान और विरासत से जुड़ी आठ अलग-अलग थीमों पर प्रवेशद्वारों की डिजाइन एवं प्रस्ताव आमंत्रित किए हैं। प्राप्त प्रस्तावों में से चयनित डिजाइनों के कलाकारों और रचनाकारों को निगम द्वारा विशेष रूप से सम्मानित एवं नकद पुरस्कार प्रदान किया जाएगा।

पांच स्थानों पर बनेंगे थीम आधारित प्रवेशद्वार

नगर निगम आयुक्त आशुतोष पाण्डेय के अनुसार शहर के प्रमुख स्थानों पर प्रारंभिक रूप से पांच थीम आधारित प्रवेशद्वारों के निर्माण की योजना है। इसके लिए नागरिकों और कलाकारों से 20 सितंबर तक प्रस्ताव आमंत्रित किए गए हैं। प्रस्ताव निगम के मुख्य प्रशासनिक भवन साकेत स्थित मुख्य कार्यालय में जमा किए जा सकते हैं।

आठ थीम में दिखेगी कोरबा की पूरी पहचान

ऊर्जा द्वार में बिजली के टावर, विद्युत किरणों की आधुनिक आकृतियों और ‘कोरबा-ऊर्जा राजधानी’ की पहचान के साथ आकर्षक एलईडी लाइटिंग का कॉन्सेप्ट रहेगा।

कोयला द्वार को कोरबा के खनन इतिहास से जोड़ा जाएगा। इसमें कोयले की परतों, खनन उपकरणों और आधुनिक स्टील व पत्थर की डिजाइन को प्रमुखता दी जाएगी।

हसदेव द्वार में बहती हसदेव नदी और उसकी लहरों से प्रेरित आर्क, हरियाली तथा नीली-सफेद रोशनी के माध्यम से प्राकृतिक सौंदर्य को दर्शाया जाएगा।

आदिवासी संस्कृति द्वार में स्थानीय जनजातीय कला, पारंपरिक ज्यामितीय पैटर्न और ट्राइबल आर्ट म्यूरल्स के साथ मिट्टी व पत्थर जैसी प्राकृतिक फिनिशिंग देखने को मिलेगी।

हरित कोरबा द्वार पर्यावरण और विकास के संदेश पर केंद्रित होगा। पेड़-पत्तियों से प्रेरित संरचना, वर्टिकल गार्डन और ग्रीन लैंडस्केपिंग इसके प्रमुख आकर्षण होंगे।

औद्योगिक कोरबा द्वार शहर की औद्योगिक पहचान को आधुनिक स्वरूप देगा। स्टील स्ट्रक्चर, उद्योगों से प्रेरित ज्यामितीय आकृतियां और एलईडी लाइटिंग इसके प्रमुख हिस्से होंगे।

जनजातीय एवं ग्रामीण विरासत द्वार में छत्तीसगढ़ की लोककला, पारंपरिक वाद्ययंत्र, नृत्य, कृषि और ग्रामीण जीवन को कलात्मक रूप में प्रदर्शित किया जाएगा।

वहीं भविष्य का कोरबा द्वार ऊर्जा, तकनीक और स्मार्ट सिटी की अवधारणा पर आधारित होगा। फ्यूचरिस्टिक आर्क, ऊर्जा प्रतीक, सोलर पैनल और ऊर्जा दक्ष एलईडी लाइटिंग के माध्यम से आधुनिक कोरबा की तस्वीर प्रस्तुत की जाएगी।

‘आपकी सोच से सजेगा आपके शहर का द्वार’

आयुक्त आशुतोष पाण्डेय ने नागरिकों और कलाकारों से अधिक से अधिक संख्या में रचनात्मक प्रस्ताव देने की अपील की है। उन्होंने कहा कि “आप सबकी सोच से आपके शहर का द्वार सजेगा।” नागरिकों की कल्पनाशीलता और सहभागिता से कोरबा को उसकी पहचान और गरिमा के अनुरूप और अधिक सुंदर एवं आकर्षक बनाया जा सकता है।

निगम का मानना है कि ये प्रवेशद्वार केवल शहर के सौंदर्यीकरण का माध्यम नहीं होंगे, बल्कि कोरबा की ऊर्जा, खनन, हसदेव, आदिवासी संस्कृति, औद्योगिक विरासत और भविष्य की विकास यात्रा को दर्शाने वाले पहचान चिह्न भी बनेंगे। यदि योजना अपने प्रस्तावित स्वरूप में आकार लेती है तो शहर में प्रवेश करने वाले लोगों को हर प्रमुख मार्ग पर कोरबा की एक अलग कहानी और पहचान देखने को मिल सकेगी।

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