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SECL: भिलाई बाजार के भू-विस्थापितों की 17 मांगों पर DRRC में मंथन, पुनर्वास स्थल पर नहीं बनी सहमति

नए बाजार भाव से मुआवजा, नौकरी में प्राथमिकता और 25 लाख रुपये बसाहट राशि की मांग; बिरदा के प्रस्तावित पुनर्वास स्थल को ग्रामीणों ने बताया अनुपयुक्त

छत्तीसगढ़/कोरबा :-  एसईसीएल से प्रभावित भिलाई बाजार के भू-विस्थापितों की 17 सूत्रीय मांगों को लेकर कलेक्टोरेट सभाकक्ष में जिला पुनर्वास एवं पुनर्व्यवस्थापन समिति (DRRC) की बैठक कलेक्टर कुणाल दुदावत की अध्यक्षता में आयोजित हुई। बैठक में भू-विस्थापितों ने मुआवजा, रोजगार, पुनर्वास और व्यवस्थापन से जुड़े विभिन्न मुद्दों को प्रमुखता से उठाया। हालांकि, सबसे अहम मुद्दे पुनर्वास स्थल को लेकर ग्रामीणों और एसईसीएल के बीच सहमति नहीं बन सकी।

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भू-विस्थापितों ने मांग रखी कि अधिग्रहित भूमि का मुआवजा वर्तमान नए बाजार भाव के अनुरूप निर्धारित किया जाए। इसके साथ ही प्रभावित परिवारों को स्थायी नौकरी में प्राथमिकता देने, वैकल्पिक रोजगार उपलब्ध कराने तथा उचित पारिश्रमिक सुनिश्चित करने की मांग भी रखी गई। ग्रामीणों का कहना था कि जिन प्रभावित परिवारों का रकबा निर्धारित कटऑफ से कम है, उन्हें भी मानवीय आधार पर रोजगार अथवा नौकरी का अवसर दिया जाना चाहिए।

बैठक में ठेका कंपनियों में काम करने वाले प्रभावित परिवारों के लिए HPC रेट के अनुसार भुगतान सुनिश्चित करने का मुद्दा भी उठाया गया। भू-विस्थापितों ने कहा कि विस्थापन के बाद केवल जमीन का मुआवजा देना पर्याप्त नहीं है, बल्कि प्रभावित परिवारों के दीर्घकालिक रोजगार और आजीविका की व्यवस्था भी सुनिश्चित की जानी चाहिए।

बिरदा पुनर्वास स्थल बना सबसे बड़ा मुद्दा

बैठक में सबसे अधिक विवाद पुनर्वास स्थल को लेकर सामने आया। ग्रामीणों ने एसईसीएल द्वारा चिन्हित बिरदा स्थल को लेकर आपत्ति जताते हुए कहा कि वहां चट्टान, पत्थर, मिट्टी और पानी जैसी समस्याएं हैं। ग्रामीणों ने ऐसे स्थान पर पुनर्वास स्वीकार करने से इनकार करते हुए अपनी सहमति से नया पुनर्वास स्थल चयनित करने की मांग रखी। उनका कहना था कि तीन महीने के भीतर प्रभावितों की सहमति से उपयुक्त पुनर्वास स्थल का चयन किया जाए, ताकि भविष्य में बसाहट को लेकर नई समस्याएं खड़ी न हों।

भू-विस्थापितों ने बसाहट के लिए दी जाने वाली राशि को वर्तमान परिस्थितियों को देखते हुए 11 लाख रुपये से बढ़ाकर 25 लाख रुपये करने की मांग भी रखी। इसके अलावा पिछले करीब 50 वर्षों से प्रभावित क्षेत्र में निवास कर रहे भूमिहीन परिवारों को भी पुनर्वास एवं व्यवस्थापन का लाभ देने की मांग की गई। बैठक में आशीष पाटले की नौकरी की प्रक्रिया को भी आगे बढ़ाने का मुद्दा उठाया गया।

मांगों पर विचार का आश्वासन, ग्रामीण असंतुष्ट

कलेक्टर कुणाल दुदावत ने बैठक में कहा कि मुआवजा, पुनर्वास और व्यवस्थापन से जुड़े विभिन्न विषयों पर चर्चा हुई है। ग्रामीणों द्वारा रखी गई मांगों पर नियमानुसार विचार किया जाएगा।

हालांकि बैठक के बाद ग्रामीणों में असंतोष नजर आया। भू-विस्थापितों का कहना है कि उनकी 17 सूत्रीय मांगों को लेकर स्पष्ट समाधान सामने नहीं आया है। विशेष रूप से पुनर्वास स्थल के मुद्दे पर सहमति नहीं बन पाने से ग्रामीणों की चिंता बरकरार है। ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि यदि उनकी मांगों का समाधान नहीं किया गया तो आने वाले दिनों में बड़े स्तर पर विरोध-प्रदर्शन किया जाएगा।

भिलाई बाजार के भू-विस्थापितों के लिए यह बैठक इसलिए भी महत्वपूर्ण मानी जा रही है क्योंकि मुआवजा, रोजगार और पुनर्वास से जुड़े मुद्दे लंबे समय से प्रभावित परिवारों की प्रमुख चिंता रहे हैं। अब देखना होगा कि DRRC में हुई चर्चा के बाद इन मांगों पर प्रशासन और एसईसीएल की ओर से आगे क्या ठोस पहल की जाती है।

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