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मानसून में बढ़ा गलघोंटू रोग का खतरा, पशुपालक रहें सतर्क; समय पर टीकाकरण से बचाई जा सकती है पशुओं की जान

छत्तीसगढ़/रायपुर :-  मानसून के आगमन के साथ पशुओं में तेजी से फैलने वाली खतरनाक जीवाणुजनित बीमारी गलघोंटू (एचएस/बघर्रा) का खतरा बढ़ गया है। इसे देखते हुए पशुधन विकास विभाग ने राज्यभर के पशुपालकों से अपने मवेशियों का समय पर टीकाकरण कराने और बीमारी के शुरुआती लक्षण दिखाई देने पर तत्काल उपचार शुरू कराने की अपील की है। विभाग का कहना है कि समय रहते टीकाकरण और त्वरित चिकित्सा से इस जानलेवा बीमारी पर प्रभावी नियंत्रण पाया जा सकता है।
विभागीय अधिकारियों के अनुसार गलघोंटू रोग मुख्य रूप से गाय, भैंस और भेड़ को प्रभावित करता है। संक्रमित पशुओं में तेज बुखार, गले एवं जबड़े के नीचे सूजन, मुंह से अत्यधिक लार निकलना, नाक से स्राव, सांस लेने में तकलीफ और गले से घरघराहट जैसी आवाज इसके प्रमुख लक्षण हैं। कई मामलों में पशु चारा खाना छोड़ देते हैं, दूध उत्पादन घट जाता है और समय पर इलाज नहीं मिलने पर उनकी मौत भी हो सकती है।
पशु चिकित्सा विभाग ने पशुपालकों को सलाह दी है कि बीमारी के लक्षण दिखाई देने पर संक्रमित पशु को तुरंत अन्य पशुओं से अलग रखें, प्राथमिक उपचार शुरू करें और निकटतम पशु चिकित्सालय या पशु चिकित्सा अधिकारी से संपर्क करें। यदि किसी क्षेत्र में बड़ी संख्या में पशुओं में ऐसे लक्षण दिखाई दें तो इसकी सूचना तत्काल विभाग को देने की अपील की गई है।
मानसून के दौरान पशुधन की सुरक्षा के लिए विभाग ने समय पर टीकाकरण, नियमित स्वास्थ्य जांच और शीघ्र उपचार को सबसे प्रभावी उपाय बताया है। इसके लिए राज्यभर में निगरानी बढ़ाने और आवश्यक सतर्कता बरतने के निर्देश भी जारी किए गए हैं।
गौरतलब है कि गलघोंटू एक अत्यंत संक्रामक बीमारी है, जो बरसात के मौसम में तेजी से फैलती है। ऐसे में पशुपालकों की थोड़ी-सी लापरवाही बड़े आर्थिक नुकसान का कारण बन सकती है। विशेषज्ञों का मानना है कि समय पर टीकाकरण ही इस बीमारी से बचाव का सबसे प्रभावी और सुरक्षित उपाय है।

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