छत्तीसगढ़/रायपुर :- छत्तीसगढ़ सरकार ने राज्य में माइक्रो ब्रुअरी खोलने की अनुमति देकर नई आबकारी नीति के तहत बड़ा फैसला लिया है। अब प्रदेश में ताजा (क्राफ्ट) बीयर का स्थानीय स्तर पर उत्पादन किया जा सकेगा और उसे उसी परिसर में ग्राहकों को परोसा जाएगा। सरकार का मानना है कि इससे होटल, रेस्टोरेंट और पर्यटन उद्योग को बढ़ावा मिलने के साथ-साथ राज्य के राजस्व और रोजगार में भी वृद्धि होगी।
आबकारी विभाग के अनुसार, माइक्रो ब्रुअरी स्थापित करने के लिए 10 लाख रुपये वार्षिक लाइसेंस शुल्क निर्धारित किया गया है। इसके अलावा ब्रुअरी के लिए कम से कम 4,000 वर्गफीट परिसर होना अनिवार्य होगा। लाइसेंस मिलने के बाद निर्धारित नियमों के तहत बीयर के उत्पादन और बिक्री की अनुमति दी जाएगी।
क्या होती है माइक्रो ब्रुअरी?
माइक्रो ब्रुअरी ऐसी इकाई होती है, जहां सीमित मात्रा में ताजा बीयर तैयार की जाती है। इसे लंबे समय तक स्टोर नहीं किया जाता, बल्कि उसी परिसर में ग्राहकों को परोसा जाता है। इसका उद्देश्य बेहतर गुणवत्ता, ताजगी और अलग-अलग फ्लेवर वाली बीयर उपलब्ध कराना होता है।
क्राफ्ट बीयर क्यों है खास?
क्राफ्ट बीयर छोटे बैच में तैयार की जाती है, जिसमें उच्च गुणवत्ता वाले माल्ट, हॉप्स, यीस्ट और अन्य प्राकृतिक सामग्री का उपयोग किया जाता है। इसी वजह से इसका स्वाद और गुणवत्ता सामान्य फैक्ट्री में बनने वाली बीयर से अलग और अधिक ताजा मानी जाती है।
इन राज्यों में पहले से सफल मॉडल
कर्नाटक, महाराष्ट्र, हरियाणा, पंजाब और गोवा जैसे राज्यों में माइक्रो ब्रुअरी पहले से संचालित हैं। खासतौर पर बेंगलुरु को भारत की ‘क्राफ्ट बीयर कैपिटल’ माना जाता है। अब छत्तीसगढ़ भी इस दिशा में कदम बढ़ाने वाला नया राज्य बन गया है।
गौरतलब
नई व्यवस्था से राज्य में निजी निवेश को बढ़ावा मिलने, होटल एवं हॉस्पिटैलिटी सेक्टर के विस्तार, स्थानीय स्तर पर रोजगार के नए अवसर सृजित होने और पर्यटन को नई गति मिलने की उम्मीद जताई जा रही है।











