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शिवाय हॉस्पिटल की कल्चर रिपोर्ट पर गंभीर सवाल, जिस लैब के नाम से रिपोर्ट दी वहां मरीज का रिकॉर्ड ही नहीं!

ऑपरेशन के तीन महीने बाद भी संक्रमण और पस से जूझ रही महिला; पति ने फर्जी रिपोर्ट की आशंका जताते हुए कलेक्टर, एसपी, सीएमएचओ सहित पुलिस से की शिकायत, सीएमएचओ बोले- शिकायत मिली है, जांच कराई जा रही है

छत्तीसगढ़/कोरबा :-  बेहतर इलाज की उम्मीद में प्राइवेट अस्पताल पहुंची एक महिला आज ऑपरेशन के करीब तीन महीने बाद भी दर्द और संक्रमण से जूझ रही है। ऑपरेशन के बाद घाव से लगातार पस निकलने, सूजन बढ़ने और उपचार के बावजूद राहत नहीं मिलने का मामला अब अस्पताल की उपचार व्यवस्था से आगे बढ़कर मेडिकल जांच रिपोर्ट की विश्वसनीयता पर गंभीर सवाल खड़े कर रहा है। सबसे चौंकाने वाला आरोप यह है कि शिवाय हॉस्पिटल द्वारा मरीज के परिजनों को जिस लैब की कल्चर जांच रिपोर्ट दी गई, संबंधित लैब में मरीज के नाम से कोई सैंपल प्राप्त होने का रिकॉर्ड ही नहीं मिला। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि जब लैब में सैंपल पहुंचा ही नहीं तो जांच रिपोर्ट किस आधार पर तैयार हुई? मरीज के पति ने रिपोर्ट को संदिग्ध बताते हुए फर्जी रिपोर्ट तैयार किए जाने की आशंका जताई है और पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की है। इधर, सीएमएचओ डॉ. एसएन केसरी ने शिकायत मिलने की पुष्टि करते हुए बताया है कि मामले की जांच कराई जा रही है और जांच रिपोर्ट के आधार पर उचित कार्रवाई की जाएगी।

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मामला कोरबा के शिवाय हॉस्पिटल का है। विकास कुमार अग्रवाल ने अपनी पत्नी सोनम अग्रवाल के उपचार में संभावित चिकित्सकीय लापरवाही और जांच रिपोर्ट में गंभीर अनियमितता का आरोप लगाते हुए शिकायत की है। शिकायत के अनुसार, लगभग तीन महीने पहले उनकी पत्नी का शिवाय हॉस्पिटल में बच्चेदानी/फैलोपियन ट्यूब से संबंधित दूरबीन विधि (लैप्रोस्कोपिक सर्जरी) से ऑपरेशन किया गया था। ऑपरेशन के कुछ समय बाद ही टांके वाली जगह से पस निकलने लगा और सूजन बढ़ने लगी। जिस स्थान से दूरबीन का कैमरा अंदर डाला गया था, वहां से भी पस निकलने लगा।

परिजनों ने संबंधित डॉक्टर से संपर्क किया। दवाइयां दी गईं, लेकिन समस्या में सुधार नहीं हुआ। इसके बाद 24 अक्टूबर 2026 को सीटी स्कैन कराया गया। शिकायतकर्ता के अनुसार, सीटी स्कैन रिपोर्ट में ऑपरेशन वाली जगह पर लगभग 6.2 × 5.2 × 5 सेंटीमीटर आकार का पस जमा होने की पुष्टि हुई। संक्रमण पेट की दीवार की त्वचा के नीचे स्थित मांसपेशियों और आसपास के ऊतकों तक फैलने की बात भी रिपोर्ट में बताई गई।

सीटी स्कैन रिपोर्ट सामने आने के बाद ऑपरेशन के पुराने टांकों वाली जगह पर चीरा लगाकर घाव खोल दिया गया। उसे बिना टांका लगाए खुला रखकर प्रतिदिन ड्रेसिंग की जाने लगी। इसके बावजूद महिला को राहत नहीं मिली। कुछ समय बाद दूसरी जगह से भी पस निकलने लगा, जिसके कारण वहां भी चीरा लगाकर घाव खोलना पड़ा। एक ऑपरेशन के बाद लगातार घाव खुलना और अलग-अलग स्थानों से पस निकलना परिवार के लिए बेहद पीड़ादायक स्थिति बन गई है। 

जिस लैब की रिपोर्ट दी, वहां मरीज का सैंपल ही दर्ज नहीं!

इस पूरे मामले का सबसे गंभीर पहलू पस की कल्चर एवं सेंसिटिविटी जांच को लेकर सामने आया है। शिकायतकर्ता का कहना है कि बार-बार आग्रह करने पर डॉक्टर द्वारा घाव से निकलने वाले पस का सैंपल लेकर कल्चर जांच कराने की बात कही गई थी। लेकिन जब उन्होंने अगले दिन संबंधित लैब में संपर्क कर सैंपल के संबंध में जानकारी ली तो लैब कर्मचारियों ने बताया कि सोनम अग्रवाल के नाम से कोई सैंपल प्राप्त नहीं हुआ है और न ही उनके रिकॉर्ड में इस नाम की कोई एंट्री मौजूद है।

शिकायतकर्ता के पास लैब कर्मचारियों से हुई बातचीत की वीडियो रिकॉर्डिंग भी होने की बात कही गई है। उनका सवाल है कि जब संबंधित लैब में मरीज के नाम से सैंपल प्राप्त होने का कोई रिकॉर्ड ही नहीं है, तो शिवाय हॉस्पिटल द्वारा उन्हें दी गई कल्चर जांच रिपोर्ट किस आधार पर तैयार की गई? क्या वास्तव में मरीज के पस का सैंपल जांच के लिए भेजा गया था? यदि नहीं, तो रिपोर्ट कहां और किस आधार पर तैयार हुई? पति ने आशंका जताई है कि कहीं मरीज को दी गई रिपोर्ट फर्जी तो नहीं है। यह महज दस्तावेजी गड़बड़ी का मामला नहीं, बल्कि मरीज के उपचार और उसकी जान की सुरक्षा से जुड़ा बेहद गंभीर विषय है।

कलेक्टर से लेकर पुलिस और स्वास्थ्य विभाग तक शिकायत

विकास कुमार अग्रवाल ने इस मामले को गंभीर बताते हुए कलेक्टर, सीएसईबी पुलिस चौकी, थाना कोतवाली, पुलिस अधीक्षक तथा मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी (सीएमएचओ) सहित संबंधित अधिकारियों के समक्ष शिकायत प्रस्तुत की है। उन्होंने पूरे मामले की निष्पक्ष चिकित्सकीय एवं दस्तावेजी जांच कराने की मांग की है।

शिकायत में ऑपरेशन करने वाले डॉक्टर और उपचार में शामिल टीम से लिखित स्पष्टीकरण लेने, सैंपल वास्तव में कब लिया गया, किस कर्मचारी ने लिया, किस लैब में भेजा गया और लैब में उसकी प्राप्ति का रिकॉर्ड कहां है, इसकी जांच कराने की मांग की गई है। साथ ही अस्पताल और संबंधित लैब के रजिस्टर, सैंपल रिसीविंग रिकॉर्ड, जांच रिपोर्ट तथा अन्य मेडिकल दस्तावेजों का मिलान कराने का आग्रह किया गया है।

शिकायतकर्ता ने पत्नी की मेडिकल फाइल, ऑपरेशन नोट्स, डिस्चार्ज समरी, दवाइयों और ड्रेसिंग के रिकॉर्ड सहित सभी संबंधित दस्तावेजों की जांच कराने की मांग भी की है। इसके अलावा स्वतंत्र वरिष्ठ स्त्री रोग विशेषज्ञ एवं जनरल सर्जन के मेडिकल बोर्ड से महिला की वर्तमान स्थिति की जांच कराकर आगे के उचित उपचार की व्यवस्था सुनिश्चित करने का अनुरोध किया है। जांच में यदि चिकित्सकीय लापरवाही, रिपोर्ट में हेराफेरी अथवा किसी अन्य प्रकार की अनियमितता प्रमाणित होती है तो संबंधित डॉक्टर, अस्पताल प्रबंधन और जिम्मेदार कर्मचारियों के विरुद्ध नियमानुसार कार्रवाई की मांग की गई है।

सीएमएचओ बोले- शिकायत मिली है, जांच के बाद होगी कार्रवाई

मामले को लेकर मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी कोरबा डॉ. एसएन केसरी ने बताया कि इस संबंध में शिकायत प्राप्त हुई है। शिकायत की जांच कराई जा रही है। जांच में जो तथ्य सामने आएंगे और जो रिपोर्ट प्राप्त होगी, उसके आधार पर उचित कार्रवाई की जाएगी। स्वास्थ्य विभाग के इस रुख के बाद अब जांच की निष्पक्षता और उसकी रिपोर्ट पर सभी की निगाहें टिकी हैं।

सवाल सिर्फ इलाज का नहीं, मरीज की जान की सुरक्षा का भी

मरीज का पति अब अपनी पत्नी के बेहतर और सुरक्षित उपचार के साथ पूरे मामले की सच्चाई सामने लाना चाहता है। उसका कहना है कि किसी अस्पताल में इलाज कराने वाला मरीज और उसका परिवार डॉक्टर तथा अस्पताल की जांच रिपोर्ट पर भरोसा करता है। यदि उसी रिपोर्ट की प्रामाणिकता पर सवाल खड़े हो जाएं और संबंधित लैब में मरीज के नाम से सैंपल मिलने का रिकॉर्ड तक न हो, तो यह बेहद चिंताजनक स्थिति है।

फिलहाल शिकायत में लगाए गए आरोपों की स्वतंत्र जांच होना बाकी है। संबंधित लैब का मूल रिकॉर्ड, अस्पताल की रिपोर्ट और उपचार संबंधी दस्तावेजों का मिलान ही सच्चाई सामने ला सकता है। अब देखना होगा कि स्वास्थ्य विभाग की जांच में क्या तथ्य सामने आते हैं और मरीज को न्याय के साथ उचित उपचार दिलाने के लिए क्या कदम उठाए जाते हैं।

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