छत्तीसगढ़/कोरबा :- ट्रांसपोर्ट नगर स्थित शिवाय हॉस्पिटल में गंभीर मरीज के उपचार को लेकर परिजनों द्वारा लगाए गए आरोपों ने अस्पताल की व्यवस्थाओं पर सवाल खड़े कर दिए हैं। सोशल मीडिया पर सामने आए वीडियो में परिजनों ने आरोप लगाया है कि गंभीर हालत में मरीज को अस्पताल लाने के बाद समय पर वेंटिलेटर उपलब्ध नहीं कराया गया। बाद में करीब डेढ़ घंटे बाद उसी अस्पताल में वेंटिलेटर उपलब्ध होने की जानकारी दिए जाने की बात कही गई है।
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परिजनों के मुताबिक, मरीज की हालत गंभीर होने पर उसे शिवाय हॉस्पिटल लाया गया था। यहां वेंटिलेटर उपलब्ध नहीं होने की जानकारी मिलने के बाद वे मरीज को लेकर दूसरे अस्पतालों में सुविधा तलाशते रहे। आरोप है कि करीब डेढ़ घंटे बाद उन्हें शिवाय हॉस्पिटल में ही वेंटिलेटर उपलब्ध होने की जानकारी मिली। इस घटनाक्रम को लेकर परिजनों ने अस्पताल प्रबंधन से जुड़े स्वप्निल झा और आरएमओ की भूमिका पर भी सवाल उठाए हैं।
परिजनों का सवाल है कि यदि उस समय वेंटिलेटर उपलब्ध नहीं था तो बाद में अचानक इसकी व्यवस्था कैसे हुई। क्या उस दौरान कोई दूसरा मरीज वेंटिलेटर पर था और उसे हटाया गया? यदि ऐसा हुआ तो इसकी वजह क्या थी? इन सवालों का स्पष्ट जवाब फिलहाल सामने नहीं आया है।
मामले को लेकर अस्पताल की उपचार व्यवस्था और बिलिंग को लेकर भी परिजनों ने आरोप लगाए हैं। हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। अस्पताल प्रबंधन का पक्ष भी फिलहाल सामने नहीं आया है।
गंभीर मरीज के इलाज में समय अहम
गंभीर मरीज के उपचार में समय की भूमिका महत्वपूर्ण होती है। ऐसे में वेंटिलेटर जैसी जीवनरक्षक सुविधा की उपलब्धता को लेकर स्थिति स्पष्ट होना जरूरी है। अस्पताल प्रबंधन को यह स्पष्ट करना चाहिए कि संबंधित समय पर कितने वेंटिलेटर उपलब्ध थे, कितने मरीजों को वेंटिलेटर सपोर्ट दिया जा रहा था और संबंधित मरीज को तत्काल सुविधा क्यों नहीं मिल सकी।
शिवाय हॉस्पिटल 100 बिस्तरों वाले अस्पताल के रूप में संचालित है। ऐसे में गंभीर मरीजों के उपचार और आपातकालीन सुविधाओं को लेकर अस्पताल की व्यवस्थाओं पर उठ रहे सवालों का जवाब सामने आना जरूरी है। यदि वायरल वीडियो में लगाए गए आरोप सही नहीं हैं तो अस्पताल प्रबंधन की ओर से स्थिति स्पष्ट की जानी चाहिए, वहीं आरोप सही पाए जाते हैं तो संबंधित व्यवस्था की जिम्मेदारी भी तय होनी चाहिए।
फिलहाल पूरा मामला परिजनों के आरोप और सोशल मीडिया पर सामने आए वीडियो के आधार पर है। इसकी स्वतंत्र पुष्टि होना बाकी है। अस्पताल प्रबंधन का पक्ष सामने आने के बाद ही मामले की पूरी तस्वीर स्पष्ट हो सकेगी।












