छत्तीसगढ़/कोरबा :- राष्ट्रीय राजमार्ग-149B के उरगा-चांपा फोरलेन मार्ग पर मवेशियों का जमघट वाहन चालकों के लिए लगातार खतरा बनता जा रहा है। पाताढ़ी-उरगा से लेकर सरगबुंदिया, मड़वारानी, कोथारी, पचपेड़ी और जमनीपाली टोल नाका तक कई स्थानों पर सड़क पर मवेशियों के विचरण से यातायात प्रभावित हो रहा है। सोमवार को सरगबुंदिया के समीप फोरलेन पर दर्जनों गाय-बैलों का झुंड नजर आया। वाहन चालक अचानक सामने आ रहे मवेशियों से बचने के लिए सावधानीपूर्वक वाहन निकालते दिखाई दिए।
फोरलेन जैसे तेज रफ्तार मार्ग पर सड़क के बीच मवेशियों का बैठे या विचरण करते रहना किसी बड़े हादसे की आशंका को बढ़ाता है। दिन के समय वाहन चालक किसी तरह स्थिति संभाल लेते हैं, लेकिन शाम और रात के समय यही स्थिति और अधिक गंभीर हो सकती है। तेज गति से आने वाले वाहनों के सामने अचानक मवेशी आने पर वाहन अनियंत्रित होने की स्थिति में जान-माल का नुकसान हो सकता है।
हाईकोर्ट की चिंता के बाद भी हालात जस के तस
सड़कों पर मवेशियों के जमावड़े और इससे होने वाली दुर्घटनाओं को लेकर छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट में भी मामला पहुंच चुका है। सुनवाई के दौरान सड़क सुरक्षा को लेकर गंभीर चिंता जताई गई थी और राज्य सरकार से इस समस्या के समाधान के लिए रोड मैप मांगा गया था। इसके बावजूद राष्ट्रीय राजमार्ग के इस हिस्से में मवेशियों की समस्या पूरी तरह समाप्त होती नजर नहीं आ रही है।
ऐसे में सवाल एनएचएआई की सड़क सुरक्षा व्यवस्था को लेकर उठ रहे हैं। राष्ट्रीय राजमार्ग पर नियमित पेट्रोलिंग, दुर्घटना संभावित स्थानों की निगरानी और सड़क पर मवेशियों के प्रवेश को रोकने के लिए प्रभावी व्यवस्था की जिम्मेदारी संबंधित एजेंसियों की है। इसके बावजूद यदि लगातार मवेशियों के झुंड फोरलेन पर नजर आ रहे हैं तो निगरानी व्यवस्था की प्रभावशीलता पर सवाल उठना स्वाभाविक है।
टोल वसूली के साथ सुरक्षा व्यवस्था भी जरूरी
उरगा-चांपा मार्ग पर टोल वसूली की व्यवस्था है। ऐसे में वाहन चालकों का कहना है कि टोल भुगतान के साथ सुरक्षित और सुगम यात्रा की अपेक्षा भी रहती है। सड़क पर मवेशियों का लगातार विचरण इस अपेक्षा के विपरीत स्थिति पैदा कर रहा है। सवाल यह है कि टोल वसूली वाले मार्ग पर नियमित पेट्रोलिंग और सड़क सुरक्षा की निगरानी कितनी प्रभावी है।
मवेशियों के कारण होने वाली दुर्घटनाएं केवल वाहन चालकों के लिए ही नहीं, बल्कि सड़क पर विचरण कर रहे मवेशियों के लिए भी जानलेवा साबित हो सकती हैं। खासकर रात के समय बिना पर्याप्त रोशनी के सड़क पर बैठे मवेशी दिखाई नहीं देने से दुर्घटना का खतरा कई गुना बढ़ जाता है।
बड़ा हादसा होने का इंतजार तो नहीं?
पाताढ़ी से जमनीपाली टोल नाका तक कई हिस्सों में मवेशियों की मौजूदगी के बावजूद यदि प्रभावी कार्रवाई नहीं होती है तो यह स्थिति कभी भी गंभीर हादसे का कारण बन सकती है। लोगों का कहना है कि दुर्घटना के बाद व्यवस्था सुधारने के बजाय पहले से ही समस्या की रोकथाम पर ध्यान दिया जाना चाहिए।
अब देखना होगा कि एनएचएआई और संबंधित जिम्मेदार एजेंसियां राष्ट्रीय राजमार्ग को मवेशियों से सुरक्षित रखने के लिए क्या ठोस कदम उठाती हैं। सड़क सुरक्षा केवल टोल वसूली तक सीमित नहीं हो सकती; सुरक्षित यातायात सुनिश्चित करने के लिए निगरानी और त्वरित कार्रवाई भी उतनी ही जरूरी है।












