छत्तीसगढ़/कोरबा :- बांकीमोगरा थाना क्षेत्र के ग्राम ढपढप में आयोजित पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री की श्री हनुमंत कथा अब विवादों के घेरे में आती जा रही है। ताजा घटनाक्रम में शास्त्री जी के करीबी माने जाने वाले बसंत अग्रवाल के साथ आयोजकों द्वारा धक्का-मुक्की किए जाने की बात सामने आई है, जिससे शास्त्री जी के सेवकों और समर्थकों में नाराजगी बढ़ गई है।
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, अग्रसेन भवन में कार्यक्रम के दौरान बसंत अग्रवाल और आयोजन समिति के कुछ लोगों के बीच कहासुनी हुई, जो देखते ही देखते धक्का-मुक्की में बदल गई। इस घटना ने पूरे आयोजन की व्यवस्थाओं और आपसी समन्वय पर सवाल खड़े कर दिए हैं। बताया जा रहा है कि बसंत अग्रवाल कार्यक्रम की व्यवस्थाओं को लेकर सक्रिय थे, लेकिन आयोजक पक्ष के साथ तालमेल न बनने के कारण विवाद की स्थिति निर्मित हुई।
प्रेस की उपेक्षा पर भी सवाल
इस पूरे आयोजन को लेकर स्थानीय मीडिया में भी नाराजगी देखने को मिल रही है। जानकारी के अनुसार, इतने बड़े धार्मिक आयोजन के बावजूद कोरबा प्रेस क्लब के पत्रकारों को न तो विधिवत पास उपलब्ध कराया गया और न ही पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री की कोई औपचारिक प्रेस कॉन्फ्रेंस आयोजित की गई। यही कारण बताया जा रहा है कि प्रिंट और इलेक्ट्रॉनिक मीडिया में इस कार्यक्रम को अपेक्षित तवज्जो नहीं मिल पा रही है। स्थानीय स्तर पर चर्चा है— “नाम बड़े और दर्शन छोटे”—जो आयोजन की व्यवस्थाओं पर सवाल खड़ा कर रही है।
चंदे को लेकर भी उठ रहे सवाल
आयोजकों द्वारा पूर्व में प्रेस वार्ता के दौरान बताया गया था कि इस आयोजन में लगभग सवा करोड़ रुपये चंदे के माध्यम से जुटाए जा रहे हैं। वहीं, कार्यक्रम को शासन-प्रशासन का व्यापक सहयोग मिलने के साथ-साथ कोरबा की औद्योगिक पृष्ठभूमि को देखते हुए विभिन्न उद्योगों से भी सहयोग मिलने की संभावना जताई जा रही है।
सूत्रों के अनुसार, आयोजन के लिए करीब एक महीने पहले से ही चंदा संग्रह की प्रक्रिया शुरू कर दी गई थी और इसके लिए बाकायदा कार्यालय भी संचालित किया गया। बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने भी स्वेच्छा से सहयोग राशि दी है। ऐसे में अब यह चर्चा भी जोर पकड़ रही है कि चंदे के पैसों के आपसी लेन-देन और व्यवस्थाओं को लेकर असहमति ही विवाद की एक बड़ी वजह हो सकती है।
समन्वय के अभाव से बढ़ा विवाद
स्थानीय लोगों का मानना है कि जहां इस आयोजन के माध्यम से धार्मिक और सामाजिक सौहार्द का संदेश जाना चाहिए था, वहीं लगातार सामने आ रहे विवादों से इसकी छवि प्रभावित हो रही है। शास्त्री जी के सेवकों में नाराजगी और आयोजकों के बीच खींचतान से यह स्पष्ट है कि समन्वय की कमी ने स्थिति को और बिगाड़ दिया है।
फिलहाल कथा और दरबार का आयोजन जारी है, लेकिन विवादों की छाया इस धार्मिक कार्यक्रम पर साफ दिखाई दे रही है। ऐसे में अब सभी की नजर इस बात पर है कि आगे आयोजक और संबंधित पक्ष इस स्थिति को कैसे संभालते हैं, ताकि आस्था का यह आयोजन विवादों से बाहर निकल सके।



















