क्वांर में करेला खाने से करें परहेज, गुड़ का सेवन बताया हितकारी
छत्तीसगढ़/कोरबा :- हिंदी मासानुसार आश्विन (क्वांर) मास का आरंभ 27 सितंबर 2026 से हो चुका है, जो 26 अक्टूबर 2026 तक रहेगा। आयुर्वेद में प्रत्येक माह के अनुसार विशेष खान-पान और दिनचर्या का वर्णन किया गया है। इसी विषय पर छत्तीसगढ़ प्रांत के ख्यातिलब्ध आयुर्वेद चिकित्सक एवं नाड़ी वैद्य डॉ. नागेंद्र नारायण शर्मा ने आश्विन मास में खान-पान और दिनचर्या को लेकर महत्वपूर्ण जानकारी दी है।
डॉ. नागेंद्र शर्मा ने बताया कि भारतीय परंपरा में ऋतुचर्या अर्थात ऋतु के अनुसार आहार-विहार अपनाने की परंपरा रही है। यह संस्कार हमें विरासत में मिला है। आश्विन (क्वांर) मास में वर्षा ऋतु के बाद बादल छंटने से आसमान साफ हो जाता है और सूर्य का प्रकाश तेज होने लगता है। आयुर्वेद के अनुसार इस दौरान पित्त दोष का प्रकोप होता है, जिससे पित्त जनित रोगों एवं त्वचा संबंधी परेशानियों की संभावना बढ़ सकती है। ऐसे में पित्त शामक खाद्य पदार्थों के साथ मधुर एवं तिक्त रस वाले, हल्के और ठंडे गुणों से युक्त आहार का सेवन करना चाहिए। वहीं पित्त बढ़ाने वाले खाद्य पदार्थों से परहेज करना चाहिए।
क्वांर मास में करेला खाने से करें परहेज
डॉ. शर्मा ने बताया कि आश्विन (क्वांर) मास में करेले का सेवन नहीं करना चाहिए। इस माह में गुड़ का सेवन हितकारी बताया गया है। छत्तीसगढ़ में भी खान-पान को लेकर एक प्रचलित लोकोक्ति है—
“क्वांर करेला कार्तिक महि, मरही नहीं त परही सही।”
इसका आशय है कि क्वांर मास में करेला और कार्तिक मास में महि अर्थात छाछ का सेवन करने से स्वास्थ्य संबंधी परेशानियां हो सकती हैं।
आश्विन मास में क्या खाना चाहिए?
डॉ. नागेंद्र शर्मा के अनुसार इस माह में विशेष रूप से गुड़ का सेवन करना चाहिए। अनाज में जौ, ज्वार और चावल तथा दालों में मूंग, मोठ, तुअर, मसूर और चना दाल का सेवन करना चाहिए। मौसमी फलों में मौसंबी, अनानास, बरसाती तरबूज, सफेद अनार, सीताफल और नारियल को आहार में शामिल किया जा सकता है।
सब्जियों में परवल, तरोई, लौकी, कद्दू, पुदीना और चौलाई का सेवन करना चाहिए। मसालों में काली मिर्च, हल्दी, जीरा, सूखा धनिया, मीठा नीम, इलायची तथा पतली दालचीनी का उपयोग करना चाहिए।
इन खाद्य पदार्थों से करें परहेज
डॉ. शर्मा ने बताया कि आश्विन मास में विशेष रूप से करेला नहीं खाना चाहिए। इसके अलावा अनाज में बाजरा और गेहूं, दालों में उड़द एवं कुलथी दाल से परहेज करना चाहिए। सब्जियों में ककड़ी, बैंगन, गाजर, मूली, फूलगोभी, पत्तागोभी, पालक, चुकंदर और अदरक का सेवन भी कम से कम करना चाहिए।
फलों में शकरकंद और पपीता से परहेज करने की सलाह दी गई है। साथ ही अधिक तेल, मिर्च-मसाले वाले, देर से पचने वाले भारी भोजन तथा बासी भोजन का सेवन भी कम से कम करना चाहिए।
दिनचर्या में भी रखें विशेष सावधानी
डॉ. नागेंद्र शर्मा के अनुसार आश्विन मास में खान-पान के साथ दिनचर्या पर भी विशेष ध्यान देना चाहिए। इस माह में तेज धूप में अधिक देर तक रहने, धूप में घूमने, दिन में सोने तथा आवश्यकता से अधिक भोजन करने से बचना चाहिए। शरीर को ढककर रखना चाहिए और स्नान के लिए हल्के गुनगुने पानी का उपयोग करना चाहिए।
उन्होंने बताया कि आयुर्वेद में ऋतु के अनुरूप खान-पान और दिनचर्या अपनाने का विशेष महत्व है। इसलिए आश्विन (क्वांर) मास में बताए गए आहार-विहार का ध्यान रखकर स्वास्थ्य के प्रति जागरूक रहना चाहिए।












