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हसदेव बांयी तट नहर की जर्जर हालत पर जल संसाधन विभाग का स्पष्टीकरण, अब दो हिस्सों में होगी मरम्मत की निविदा

आरडी 5700 मीटर पर क्षतिग्रस्त हुआ नहर का पैनल, टूटे स्लैब दोबारा बनेंगे; गुणवत्ता की भी होगी जांच

छत्तीसगढ़/कोरबा :-  सुनालिया पुल से आगे हसदेव बांयी तट नहर की जर्जर स्थिति और मरम्मत को लेकर प्रकाशित समाचार के बाद जल संसाधन विभाग ने पूरे मामले पर स्थिति स्पष्ट की है। विभाग के अनुसार नहर के मरम्मत, जीर्णोद्धार एवं आधुनिकीकरण का कार्य अभी पूर्ण नहीं हुआ है। वहीं क्षतिग्रस्त हिस्सों की दोबारा मरम्मत कराने के साथ कार्य की गुणवत्ता की जांच भी कराई जाएगी।

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जल संसाधन विभाग के अनुसार हसदेव बांयी तट नहर के आरडी 4.45 किलोमीटर से 9.65 किलोमीटर तक मरम्मत, जीर्णोद्धार एवं आधुनिकीकरण का कार्य अनुबंध के तहत मेसर्स विष्णु प्रसाद अग्रवाल, बिलासपुर को सौंपा गया है। इसी कार्य के दौरान आरडी 5700 मीटर पर नहर के बायीं ओर का पैनल क्षतिग्रस्त हुआ है।

भारी बारिश से पैनल क्षतिग्रस्त होने का विभाग का दावा

विभाग ने बताया कि नहर में सीसी लाइनिंग का कार्य गुणवत्तापूर्ण तरीके से कराया गया है। जिस स्थान पर पैनल क्षतिग्रस्त हुआ है, वहां नहर गहरी कटिंग में है। विभाग के अनुसार भारी वर्षा के दौरान पानी सीसी लाइनिंग की कोपिंग से पैनल के अंदर चला गया, जिसके कारण पैनल क्षतिग्रस्त हुआ।

हालांकि विभाग ने यह भी स्पष्ट किया है कि नहर का मरम्मत कार्य अभी पूरा नहीं हुआ है। बारिश के कारण जिन स्थानों पर स्लैब टूटे हैं, उन्हें तोड़कर दोबारा निर्माण कराने के निर्देश ठेकेदार को दिए गए हैं। साथ ही संबंधित कार्य की गुणवत्ता की जांच भी कराई जाएगी।

चार बार निविदा, नहीं मिले पात्र ठेकेदार

सुनालिया पुल से आगे जर्जर नहर के मरम्मत कार्य को लेकर विभाग के सामने एक और चुनौती रही है। विभाग के मुताबिक इस कार्य के लिए चार बार निविदा आमंत्रित की गई, लेकिन पात्र निविदाकार नहीं आने के कारण सभी निविदाएं निरस्त करनी पड़ीं।

अब विभाग ने कार्य को दो हिस्सों में विभाजित कर दोबारा निविदा आमंत्रित करने की प्रक्रिया शुरू की है। निविदा प्रक्रिया पूरी होने और अनुबंध होने के बाद क्षतिग्रस्त एवं जर्जर नहर के मरम्मत कार्य को शीघ्र शुरू कराने की बात विभाग ने कही है।

मरम्मत के साथ गुणवत्ता जांच पर भी रहेगी नजर

हसदेव बांयी तट नहर सिंचाई व्यवस्था के लिहाज से महत्वपूर्ण है। ऐसे में मरम्मत के बाद नहर की मजबूती और निर्माण की गुणवत्ता अहम होगी। विभाग द्वारा क्षतिग्रस्त पैनल और टूटे स्लैब के पुनर्निर्माण के साथ गुणवत्ता जांच की बात कही गई है। अब निगाह इस बात पर रहेगी कि दोबारा होने वाला निर्माण कितना टिकाऊ रहता है और जर्जर हिस्सों की मरम्मत कितनी तेजी से पूरी होती है।

विभाग के स्पष्टीकरण से यह साफ है कि सुनालिया पुल से आगे नहर की समस्या के समाधान के लिए प्रक्रिया चल रही है, लेकिन चार बार निविदा निरस्त होने के कारण मरम्मत कार्य में देरी हुई है। अब दो हिस्सों में नई निविदा प्रक्रिया शुरू होने के बाद कार्य को गति मिलने की उम्मीद है।

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