डॉक्टर ने कह दिया ऑपरेशन ही विकल्प, नियम और परहेज से युवक छह माह में ही हो गया चंगा
छत्तीसगढ़/कोरबा :- आजकल स्नायुगत वात नसों से संबंधित रोग की समस्या एक आम बीमारी बनती जा रही है, जिससे पीड़ित लोगों को असहनीय दर्द का सामना करना पड़ता है। कुछ मामलों में तो मरीजों को सर्जरी तक करवानी पड़ती है। बिल्हा छत्तीसगढ़ के एक युवक भी इसी समस्या से जूझ रहे थे और डॉक्टरों ने उन्हें ऑपरेशन की सलाह दे दी थी। कन्हैया माखीजा, जो बिल्हा छत्तीसगढ़के रहने वाले हैं और बिल्हा में ही उनका व्यवसाय है। लंबे समय से स्नायुगत वात नसों से संबंधित रोग से पीड़ित थे ।उनकी हालत इतनी खराब थी कि उन्हें झुककर काम करने में बहुत परेशानी होती थी और असहनीय दर्द होता था। और उनका सीधा हांथ भी ऊपर नहीं उठ पाता था उसे भी उठाने में उन्हें असहनीय दर्द होता था जिसके कारण वो उसे उठा ही नहीं पाते थे। इसके लिये उन्होंने कई डॉक्टरों को दिखाया, और जांच भी कराइ एमआरआई कराने पर उनके एल 4 एल 5 में समस्या बताई गई जिसके लिये उन्हें ऑपरेशन कराने की सलाह दी गई। ऑपरेशन के डर से परेशान कन्हैया माखीजा थक हारकर अंत में अपने मित्र की सलाह पर आयुर्वेद चिकित्सक नाड़ीवैद्य डॉ. नागेंद्र नारायण शर्मा के पास पहुंचे। डॉ.नागेंद्र ने मरीज की रिपोर्ट देखी और नाड़ी परीक्षण किया l इसके बाद, उन्होंने आयुर्वेदिक दवाइयां, नियम और परहेज बताए। कन्हैया माखीजा ने डॉक्टर के निर्देशों का पालन पूरी निष्ठा से किया और फिर चमत्कार हो गया। मात्र 6 महीने में ही कन्हैया माखीजा पूरी तरह से स्वस्थ हो गए। अब वे दर्द से पूरी तरह राहत पा चुके हैं। और अपना सभी कार्य चलना फिरना अपितु झुककर करने वाला कार्य भी आसानी से कर रहे हैँ। और उनका हांथ भी पूरी तरह से बिना दर्द के उपर उठ रहा है । उनकी सभी रिपोर्ट भी नॉर्मल आ गई। इसके लिये कन्हैया माखीजा आयुर्वेद के इस उपचार को किसी चमत्कार से कम नहीं मानते, जहां डॉक्टरों ने ऑपरेशन की नौबत बता दी थी, वहीं वे मात्र परहेज और नियमों का पालन करके पूरी तरह स्वस्थ हो गए। कन्हैया माखीजा का कहना है कि उन्हें आयुर्वेद पर पूरा विश्वास हो गया है और अब वे दूसरों को भी आयुर्वेद चिकित्सा पद्धति को अपनाने की सलाह देते हैं। उनका अनुभव यह साबित करता है कि आयुर्वेद में गंभीर बीमारियों का सफल इलाज संभव है। यह उन लोगों के लिए आशा की किरण है जो स्नायुगत वात नसों से संबंधित रोग जैसी समस्याओं से जूझ रहे हैं और ऑपरेशन से डर रहे हैं। इसके लिये उन्होंने चिकित्सक नाड़ीवैद्य डॉ.नागेंद्र नारायण शर्मा के प्रति धन्यवाद ज्ञापित किया। नाड़ीवैद्य डॉ.नागेंद्र नारायण शर्मा ने बताया कि यह चमत्कार मेरा नहीं आयुर्वेद का है। आयुर्वेद जो संपूर्ण जगत के प्राणीयों के लिये हैं, जो ऋषियों एवं आचार्यो की देन है, जो शाश्वत है, नित्य है, विशुध्द और निरापद है। हम उस विधा के अनुयायी हैं, शिष्य हैं, चिकित्सक हैं। और इस पर हमें घमंड नहीं अपितु गर्व है की हम उस ऋषि परंपरा के संवाहक हैं। यह वाक्या आयुर्वेद चिकित्सा की प्रभावशीलता को दर्शाती है और यह साबित करती है कि आयुर्वेद चिकित्सा पद्धतियों में गंभीर बीमारियों का इलाज संभव है। आयुर्वेद के प्रति लोगों का विश्वास तेजी से बढ़ रहा है, और इस तरह की सफलताएं इसे और भी मजबूती प्रदान करती हैं। सभी लोगों को अपनी चिकित्सा के लिये प्राथमिकता के तौर पे आयुर्वेद चिकित्सा पद्धति को पहली प्राथमिकता देकर आयुर्वेद को अपनाना चाहिए।











