124 पॉइंट्स चेकलिस्ट लागू, ई-साक्ष्य और डिजिटल फॉरेंसिक पर खास जोर
छत्तीसगढ़/बिलासपुर :- हत्या जैसे गंभीर प्रकरणों में जांच की गुणवत्ता सुधारने और दोषियों को सख्त सजा दिलाने के उद्देश्य से बिलासपुर रेंज पुलिस ने ‘स्मार्ट विवेचना’ की नई कार्यप्रणाली लागू कर दी है। पुलिस महानिरीक्षक (आईजी) श्री रामगोपाल गर्ग ने 28 अप्रैल 2026 को रेंज स्तर के अधिकारियों को इस संबंध में विशेष प्रशिक्षण दिया।
आईजी श्री गर्ग ने स्पष्ट किया कि पुलिस का लक्ष्य केवल आरोपी की गिरफ्तारी तक सीमित नहीं होना चाहिए, बल्कि वैज्ञानिक और ठोस साक्ष्यों के आधार पर न्यायालय में दोषसिद्धि सुनिश्चित करना होना चाहिए। इसी दिशा में अब हत्या के हर मामले में एक तय चेकलिस्ट के अनुसार जांच करना अनिवार्य कर दिया गया है।
वैज्ञानिक जांच पर जोर
नई व्यवस्था के तहत हत्या के मामलों में अब ‘ई-साक्ष्य’ ऐप के जरिए वीडियोग्राफी के साथ जप्ती की जाएगी। इससे साक्ष्यों की विश्वसनीयता बढ़ेगी और गवाहों के मुकरने की स्थिति में भी तकनीकी प्रमाण मजबूत रहेंगे।
घटनास्थल को ‘गोल्डन ऑवर’ में ही सील कर फोरेंसिक टीम, डॉग स्क्वॉड और फिंगरप्रिंट विशेषज्ञों की मौजूदगी में साक्ष्य जुटाने के निर्देश दिए गए हैं। बिना दस्ताने साक्ष्य छूने पर प्रतिबंध रहेगा।
124 बिंदुओं की चेकलिस्ट अनिवार्य
विवेचना में त्रुटि खत्म करने के लिए 124 बिंदुओं का विस्तृत प्रोटोकॉल तैयार किया गया है। एफआईआर से लेकर चार्जशीट तक हर प्रक्रिया का दस्तावेजीकरण किया जाएगा, ताकि बचाव पक्ष को तकनीकी खामियों का लाभ न मिल सके।
डिजिटल और साइबर फॉरेंसिक पर फोकस
अब जांच अधिकारी आरोपियों के डिजिटल फुटप्रिंट्स जैसे गूगल डेटा, इंटरनेट हिस्ट्री और व्हाट्सएप लॉग्स की भी जांच करेंगे। घटनास्थल के 100 किलोमीटर दायरे में लगे सीसीटीवी कैमरों की मैपिंग कर फुटेज को प्रमाणिक तरीके से केस डायरी में शामिल किया जाएगा।
DNA साक्ष्य बनेगा अहम आधार
मृतक के नाखूनों, बालों और कपड़ों से डीएनए साक्ष्य जुटाकर आरोपी की मौजूदगी वैज्ञानिक तरीके से साबित करने पर विशेष जोर दिया गया है।
पोस्टमार्टम और साक्ष्य सुरक्षा के सख्त निर्देश
संवेदनशील मामलों में रात में भी पर्याप्त रोशनी के साथ पोस्टमार्टम और उसकी वीडियोग्राफी अनिवार्य होगी। साथ ही साक्ष्यों की ‘चेन ऑफ कस्टडी’ को पूरी तरह सुरक्षित रखने के निर्देश दिए गए हैं, ताकि किसी भी प्रकार की छेड़छाड़ की संभावना खत्म हो सके।
अप्रैल 2026 से अनिवार्य लागू
आईजी ने निर्देश दिए हैं कि अप्रैल 2026 के बाद दर्ज होने वाले सभी हत्या प्रकरणों में इन नए प्रोटोकॉल का पालन अनिवार्य होगा। सीसीटीएनएस एंट्री से लेकर साइबर साक्ष्यों के संग्रह तक पूरी प्रक्रिया पारदर्शी और पेशेवर होगी।
इस प्रशिक्षण सत्र में मुंगेली के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक श्री भोजराम पटेल सहित रेंज के सभी जिलों के एएसपी से लेकर उपनिरीक्षक स्तर तक के अधिकारी वर्चुअल माध्यम से शामिल हुए। आईजी श्री गर्ग ने पीपीटी के जरिए जांच के महत्वपूर्ण बिंदुओं की विस्तृत जानकारी दी।
उन्होंने बताया कि ऐसे प्रशिक्षण सत्र हर सप्ताह अलग-अलग विषयों पर आयोजित किए जाएंगे, ताकि पुलिस अधिकारी आधुनिक जांच तकनीकों से अपडेट रहकर त्रुटिहीन विवेचना कर सकें।











