छत्तीसगढ़/कोरबा :- नगर पालिका परिषद बांकीमोगरा में सियासी उठापटक ने नया मोड़ ले लिया है। टेंडर प्रक्रिया में कथित गड़बड़ी को लेकर की गई शिकायत के बाद अब उसी मामले में यू-टर्न देखने को मिला है। कांग्रेस पार्षद दल के जिन सदस्यों ने पहले शिकायत पर हस्ताक्षर किए थे, उनमें से 7 पार्षदों (4 कांग्रेस और 3 भाजपा) ने अब संयुक्त संचालक, नगरीय प्रशासन विभाग बिलासपुर को खंडन पत्र सौंपते हुए अपने ही नेता प्रतिपक्ष मधुसूदन दास पर गुमराह करने का आरोप लगा दिया है। 
खंडन पत्र में पार्षद रूबी गुप्ता समेत अन्य सदस्यों ने स्पष्ट किया है कि उनसे धोखे में रखकर हस्ताक्षर कराए गए थे। पत्र में कहा गया है कि नगर पालिका में वार्डों के साथ भेदभाव या पार्षद निधि रोके जाने जैसी बातें पूरी तरह असत्य हैं। सभी 30 वार्डों में नियमानुसार राशि आवंटित हो रही है और विकास कार्य सुचारू रूप से जारी हैं। टेंडर प्रक्रिया भी ऑनलाइन और नियमों के तहत की जा रही है, जिसमें किसी प्रकार की मनमानी संभव नहीं है।
पार्षदों ने यह भी कहा कि नवगठित परिषद होने के बावजूद सीमित संसाधनों और स्टाफ की कमी के बीच भी विकास कार्य प्रभावित नहीं हुए हैं। उन्होंने पूर्व में लगाए गए आरोपों को “बेबुनियाद” बताते हुए पूरी तरह खारिज कर दिया।
वहीं, इस पूरे घटनाक्रम पर नेता प्रतिपक्ष मधुसूदन दास ने पलटवार करते हुए कहा है कि नगर पालिका में दबाव की राजनीति हावी है। कुछ लोगों की मजबूरी का फायदा उठाकर पार्षदों से खंडन कराया गया है। उन्होंने संकेत दिए कि टेंडर प्रक्रिया में गड़बड़ी के मुद्दे पर वे पीछे नहीं हटेंगे।
पहले क्या थी शिकायत?
इससे पहले संयुक्त संचालक को सौंपे गए शिकायत पत्र में आरोप लगाया गया था कि बांकीमोगरा नगर पालिका में टेंडर प्रक्रिया मनमाने तरीके से संचालित की जा रही है। टेंडर खोलने की समय-सीमा तय नहीं है और बिना ठेकेदारों को सूचना दिए प्रक्रिया पूरी कर ली जाती है। समय में बदलाव कर पारदर्शिता को प्रभावित किया जाता है।
शिकायत में यह भी कहा गया था कि निर्माण कार्यों की गुणवत्ता पर कोई ध्यान नहीं दिया जा रहा है और पार्षदों की आपत्तियों के बावजूद बिल जारी किए जा रहे हैं। सामान्य सभा में कार्यों को अलग नाम से प्रस्तुत कर स्वीकृति ली जाती है, जबकि जमीनी स्तर पर स्थिति अलग रहती है। विरोध करने वाले पार्षदों के वार्डों में काम रोकने या निधि रोकने का भी आरोप लगाया गया था।
इसके अलावा यह गंभीर आरोप भी लगाए गए थे कि जहां सामान्यतः टेंडर कम दर (Below) पर दिए जाते हैं, वहीं यहां अधिकांश कार्य अधिक दर (Above) पर आबंटित किए जा रहे हैं, जिससे राजस्व को नुकसान पहुंचाया जा रहा है।
सियासत गरम, सवाल बरकरार
शिकायत और खंडन के इस पूरे घटनाक्रम ने बांकीमोगरा नगर पालिका की राजनीति को गरमा दिया है। एक ओर पार्षदों का यू-टर्न है, तो दूसरी ओर नेता प्रतिपक्ष का दबाव की राजनीति का आरोप। ऐसे में टेंडर प्रक्रिया की पारदर्शिता और सच्चाई को लेकर सवाल अभी भी कायम हैं।











