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कीचड़, उफनते नाले और टूटा पुल… फिर भी नहीं रुके कलेक्टर के कदम

90 किमी दूर सुदूर गांवों तक पैदल पहुंचकर लिया हाल, बोले—आज नहीं, आने वाले वर्षों की मजबूती के लिए बनेंगे पुल

क्षतिग्रस्त पुल-पुलियों का निरीक्षण, पीएमजीएसवाई के ईई को तत्काल प्रस्ताव तैयार करने के निर्देश

छत्तीसगढ़/कोरबा :- बरसात के मौसम में जब नदी-नाले उफान पर होते हैं, तब ग्रामीण क्षेत्रों में पुल और पुलियाएं केवल आवागमन का साधन नहीं बल्कि जीवनरेखा बन जाते हैं। इनके क्षतिग्रस्त होने से बच्चों की पढ़ाई, मरीजों का इलाज, किसानों की आवाजाही और ग्रामीणों का दैनिक जीवन प्रभावित होता है। इसी संवेदनशीलता को ध्यान में रखते हुए कलेक्टर कुणाल दुदावत ने गुरुवार को पोड़ी उपरोड़ा विकासखंड के लगभग 90 से 100 किलोमीटर दूर स्थित सुदूर गांवों का दौरा कर क्षतिग्रस्त पुल-पुलियों का निरीक्षण किया।       

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लगातार बारिश के कारण रास्ते कीचड़ से लथपथ थे और कई स्थानों पर वाहन आगे नहीं बढ़ सके। इसके बावजूद कलेक्टर ने अपनी गाड़ी रास्ते में ही छोड़ दी और पैदल चलकर निरीक्षण स्थल तक पहुंचे। उनके साथ प्रशासनिक अधिकारी एवं अभियंता भी कठिन रास्ता पार कर मौके पर पहुंचे।

ग्राम सुखरीताल-हरदेवा के बीच क्षतिग्रस्त पुल का निरीक्षण करते हुए कलेक्टर ने अधिकारियों से कहा कि केवल मरम्मत पर्याप्त नहीं होगी। बारिश समाप्त होने के बाद नए पुल का निर्माण वैज्ञानिक डिजाइन, पर्याप्त जल निकासी क्षमता और भविष्य की बाढ़ परिस्थितियों को ध्यान में रखकर किया जाए, ताकि ऐसी समस्या दोबारा उत्पन्न न हो।

इसके बाद कलेक्टर ने पनगंवा में बकई नदी पर तेज बहाव से क्षतिग्रस्त पुल का निरीक्षण किया। प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के अंतर्गत पनगंवा-सरमा मार्ग पर आवागमन पूरी तरह बाधित होने की जानकारी मिलने पर उन्होंने पीएमजीएसवाई के कार्यपालन अभियंता सी.एस. तँवर को बाढ़ आपदा राहत मद से प्रस्ताव तैयार कर शीघ्र प्रस्तुत करने के निर्देश दिए।

निरीक्षण के दौरान सरमा तथा हरदेवा-सुखरीताल के बीच क्षतिग्रस्त पुलियाओं का भी जायजा लिया गया। ग्राम सरमा में लोक निर्माण विभाग की पुलिया पर तत्काल मिट्टी भरकर आवागमन बहाल करने के निर्देश दिए गए, जबकि सुखरीताल में वर्षा समाप्त होते ही नई एवं अधिक मजबूत पुलिया के निर्माण की प्रक्रिया शुरू करने को कहा गया।

कलेक्टर ने स्पष्ट कहा कि विकास का अर्थ केवल क्षतिग्रस्त संरचनाओं की मरम्मत नहीं, बल्कि ऐसे टिकाऊ और गुणवत्तापूर्ण निर्माण हैं जो आने वाले वर्षों में भी भारी बारिश और बाढ़ का सामना कर सकें। उन्होंने संबंधित विभागों को गुणवत्ता से किसी भी प्रकार का समझौता नहीं करने के निर्देश दिए।

उन्होंने ग्रामीणों से अपील करते हुए कहा कि भारी वर्षा के दौरान उफनते नदी-नालों को पार करने का प्रयास न करें और प्रशासन द्वारा जारी सुरक्षा निर्देशों का पालन करें।

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