29 अक्टूबर तक भारी बारिश की आशंका, कटी फसल सुरक्षित स्थान पर रखने और खेतों में जल निकासी की व्यवस्था करने की अपील
छत्तीसगढ़/कोरबा :- बंगाल की खाड़ी में बन रहे चक्रवाती तूफान के प्रभाव से छत्तीसगढ़ में 29 अक्टूबर तक भारी से बहुत भारी बारिश की आशंका को देखते हुए इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय, रायपुर ने किसानों के लिए मौसम आधारित कृषि सलाह जारी की है। किसानों को अगले दो से चार दिनों तक धान, दलहन और तिलहन की पक चुकी फसलों की कटाई स्थगित रखने, कटी हुई फसल को सुरक्षित स्थान पर रखने तथा खेतों में जल निकासी की समुचित व्यवस्था करने की सलाह दी गई है।
कलेक्टर कुणाल दुदावत ने संभावित बारिश को ध्यान में रखते हुए संबंधित विभागों के अधिकारियों, कर्मचारियों और मैदानी अमले को अलर्ट रहने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने किसानों तक समय पर मौसम संबंधी जानकारी और कृषि सलाह पहुंचाने के साथ फसलों, उद्यानिकी उत्पादन और पशुधन की सुरक्षा के लिए आवश्यक तैयारियां सुनिश्चित करने को कहा है। उन्होंने अधिकारियों को अपने-अपने क्षेत्रों की स्थिति पर लगातार नजर रखने और जरूरत पड़ने पर तत्काल कार्रवाई करने के निर्देश भी दिए हैं।
28 और 29 अक्टूबर को भारी बारिश की आशंका
भारत मौसम विज्ञान विभाग के पूर्वानुमान के अनुसार दक्षिण-पूर्वी बंगाल की खाड़ी के ऊपर बना दबाव का क्षेत्र चक्रवाती तूफान का रूप ले सकता है। इसके प्रभाव से प्रदेश में बारिश की गतिविधियां बढ़ने तथा 28 और 29 अक्टूबर को कुछ स्थानों पर भारी से बहुत भारी वर्षा होने की संभावना है। इसे देखते हुए कोरबा जिले के किसानों को विशेष सतर्कता बरतने की सलाह दी गई है।
फसलों को नुकसान से बचाने के लिए जरूरी उपाय
कृषि वैज्ञानिकों के अनुसार, जिन खेतों में धान, दलहन और तिलहन की फसलें पकने की अवस्था में हैं, वहां अगले दो से चार दिनों तक कटाई टालना उचित होगा। जो किसान कटाई शुरू कर चुके हैं, वे कटी फसल को जल्द से जल्द सुरक्षित स्थान पर पहुंचाएं। खेतों में अतिरिक्त पानी की निकासी की व्यवस्था रखें, ताकि जलभराव के कारण फसलों को नुकसान न पहुंचे।
फसलों में रोग या कीट के लक्षण दिखाई देने पर मौसम साफ होने के बाद ही कीटनाशकों का छिड़काव करें। वहीं, रबी फसलों की बुवाई करने वाले किसान मौसम की स्थिति को ध्यान में रखते हुए नवंबर के प्रथम सप्ताह से बुवाई शुरू करें।
सब्जियों और फलदार पौधों को दें सहारा
तेज हवा और बारिश की आशंका को देखते हुए सब्जी एवं फल उत्पादकों को भी सावधानी बरतने की सलाह दी गई है। लता वाली सब्जियों, विशेषकर करेला और लौकी के पौधों को सहारा दें। केले के पौधों और फलदार वृक्षों को भी आवश्यकतानुसार सहारा देकर सुरक्षित रखें। सब्जियों के खेतों में जल निकासी की उचित व्यवस्था करें। बारिश के दौरान कीटनाशक और कवकनाशक दवाओं का छिड़काव करने से बचें।
पशुधन की सुरक्षा पर भी ध्यान दें
पशुपालकों को अपने पशुओं को सुरक्षित और सूखे स्थान पर रखने की सलाह दी गई है। तेज हवा और बारिश के दौरान पशुओं को पेड़ों के नीचे या खुले स्थान पर न बांधें। उनके लिए सूखे चारे और स्वच्छ पेयजल की पर्याप्त व्यवस्था सुनिश्चित करें, ताकि खराब मौसम में पशुओं को परेशानी न हो।
कलेक्टर कुणाल दुदावत ने संबंधित विभागों को कृषि सलाह का व्यापक प्रचार-प्रसार करने और किसानों तक समय पर जरूरी जानकारी पहुंचाने के निर्देश दिए हैं। कृषि विश्वविद्यालय ने भी किसानों से मौसम के पूर्वानुमान पर नजर रखने तथा कृषि वैज्ञानिकों की सलाह का पालन करने की अपील की है।












