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SECL मुख्यालय में भूविस्थापितों की उच्चस्तरीय बैठक, 4-5 दिनों में लिखित निर्णय का आश्वासन

दीपका तालाबंदी आंदोलन के बाद बिलासपुर में सीएमडी सभागार में मैराथन चर्चा, बसाहट, मकान नापी, सोलसियम, मुआवजा और नौकरी सहित मांगों पर हुई विस्तृत बातचीत

छत्तीसगढ़/बिलासपुर/कोरबा :-  कटघोरा विधायक प्रेमचंद पटेल की अगुवाई में हरदीबाजार, रेंकी और सराईसिंगार क्षेत्र के भूविस्थापितों की मांगों को लेकर सोमवार को एसईसीएल मुख्यालय बिलासपुर स्थित सीएमडी सभागार में उच्चस्तरीय बैठक आयोजित की गई। बैठक में भूविस्थापितों की वर्षों से लंबित मांगों पर एसईसीएल प्रबंधन के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ मैराथन चर्चा हुई। बैठक के अंत में प्रबंधन ने सभी प्रमुख विषयों पर विचार कर आगामी 4 से 5 दिनों के भीतर लिखित रूप में आधिकारिक निर्णय देने का आश्वासन दिया।

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उल्लेखनीय है कि 19 सितंबर को भूविस्थापितों ने अपनी मांगों को लेकर एसईसीएल दीपका महाप्रबंधक कार्यालय के मुख्य गेट पर करीब 8 घंटे तक तालाबंदी आंदोलन किया था। तीन दौर की वार्ता के बाद एसडीएम कटघोरा नितिन दुबे और दीपका जीएम की मध्यस्थता से 21 सितंबर को बिलासपुर मुख्यालय में उच्चस्तरीय बैठक आयोजित करने पर सहमति बनी थी।

सोमवार को हुई बैठक में एसईसीएल प्रबंधन की ओर से निदेशक (कार्मिक/डीएचआर) बीरंची दास, निदेशक (तकनीकी/पीएंडपी) मोहपात्रा, जीएम (एलएंडआर) बिपिन कुमार लाल तथा दीपका जीएम अशोक कुमार सहित वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे।

बैठक में भूविस्थापितों की प्रमुख मांगों पर बिंदुवार चर्चा की गई। पूर्ण विकसित बसाहट के मुद्दे पर सुपेतपारा बाईपास के पास उतरदा की जमीन पर सहमति नहीं बनने के बाद जयंती नगर को ही सर्वसुविधायुक्त रूप से विकसित कर भूविस्थापितों को बसाहट देने के प्रस्ताव पर चर्चा हुई।

वर्ष 2004 से 2010 के बीच हुए अधिग्रहण के बाद खरीदी-बिक्री के पश्चात निर्मित मकानों की नापी कर मकान मालिकों को सोलसियम सहित मुआवजा देने के विषय पर भी विस्तृत चर्चा हुई। वहीं ड्रोन सर्वे के बाद बने मकानों को नया मानकर 60 प्रतिशत कटौती किए जाने के निर्णय पर पुनर्विचार करते हुए पूर्ण सोलसियम के साथ 100 प्रतिशत मुआवजा दिए जाने के मुद्दे पर भी सार्थक चर्चा हुई।

भूविस्थापितों ने वर्ष 2004 में लागू अधिग्रहण नीति के तहत प्रत्येक खाते पर रोजगार देने की मांग रखी। इस पर एसईसीएल प्रबंधन ने मामले पर विचार कर सकारात्मक निर्णय लेने का आश्वासन दिया। इसके अलावा शेष 212 एकड़ भूमि के अधिग्रहण और बसाहट के संबंध में भी जल्द स्थिति स्पष्ट करने की बात कही गई।

अमगांव, दर्राखांचा, जोकही, डबरी, मलगांव और सुवाभोड़ा सहित अन्य गांवों के लंबित रोजगार, मुआवजा एवं बसाहट से जुड़े मामलों को 15 दिनों के भीतर निपटाने के विषय पर भी चर्चा हुई।

बैठक में यह भी कहा गया कि जब तक मुआवजा राशि का पूर्ण भुगतान नहीं हो जाता, तब तक हरदीबाजार में किसी भी मकान को नहीं तोड़ा जाएगा।

बैठक के अंत में एसईसीएल निदेशकों की टीम ने भूविस्थापितों को आश्वस्त किया कि उनके द्वारा उठाए गए सभी विषयों पर गंभीरता से विचार कर आगामी 4 से 5 दिनों के भीतर लिखित रूप में आधिकारिक निर्णय उपलब्ध कराया जाएगा।

बैठक में विधायक प्रेमचंद पटेल के साथ हरदीबाजार सरपंच लोकेश्वर कंवर, उपसरपंच रेखा जायसवाल, श्यामू जायसवाल, रघुराज सिंह उईके, नरेश टंडन, व्यास राठौर, महेंद्र राठौर, राजेश जायसवाल, शिव यादव, फिरोज खान, जगदीश अग्रवाल, अनिल टंडन, मन्नु राठौर, राजाराम राठौर, प्रदीप पांडेय, ममता ओग्रे, प्रेम डिक्सेना, शशीधर सोनी, सुरेंद्र राठौर, प्रदीप राठौर, इंद्रभूषण ओढ़े, सुधीर कंवर, चंद्रिका प्रजापति, दिलीप राठौर, कमलेश राठौर, पंकज धुर्वा, रमन कुल्हाड़े, गणेश श्रीवास सहित बड़ी संख्या में भूविस्थापित ग्रामीण उपस्थित रहे।

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