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एसीबी समूह की कोयला वाशरियों और पावर प्लांटों की 1999 से CBI जांच की मांग

18 अगस्त को दीपका-गेवरा में होगा विशाल शांतिपूर्ण जनआंदोलन

छत्तीसगढ़/कोरबा :-  भारतीय जनाधिकार पार्टी छत्तीसगढ़ ने एसीबी समूह की दीपका, गेवरा, कुसमुंडा, चाकाबुड़ा, रतीजा, रेंकी, बिंझरी सहित अन्य संबद्ध कोयला वाशरियों, रिजेक्ट कोयला आधारित ताप विद्युत गृहों, कोयला परिवहन, रेलवे साइडिंग एवं अन्य औद्योगिक इकाइयों में वर्ष 1999 से वर्तमान तक के संचालन की सीबीआई जांच, उच्चस्तरीय एसआईटी गठन, बहु-एजेंसी फॉरेंसिक ऑडिट तथा भौतिक सत्यापन की मांग** की है।

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पार्टी का कहना है कि मामला केवल किसी एक वाशरी अथवा प्रदूषण से संबंधित नहीं है, बल्कि कोयला खरीद, वाशिंग, रिजेक्ट कोयला, परिवहन, रेलवे साइडिंग, पावर जनरेशन, फ्लाई ऐश, जल दोहन, औद्योगिक ईंधन, जीएसटी एवं कर लाभ सहित पूरी कोयला-ईंधन-पर्यावरण-वित्तीय श्रृंखला की व्यापक जांच से जुड़ा है।

जांच के लिए प्रमुख मांगें

कोयला प्रवाह और वाशरी क्षमता का सत्यापन: पार्टी ने कोल कंट्रोलर ऑर्गेनाइजेशन के रिकॉर्ड के आधार पर प्रत्येक वाशरी की स्वीकृत क्षमता, पर्यावरणीय स्वीकृति, CTE/CTO तथा वास्तविक कच्चे कोयले की प्राप्ति, वॉश्ड कोल, रिजेक्ट एवं मिडलिंग्स के उत्पादन और प्रेषण का वर्षवार फॉरेंसिक मिलान कराने की मांग की है।

एक-एक टन कोयले का हिसाब: टेंडर, रेलवे साइडिंग, वेब्रिज और डिस्पैच रिकॉर्ड के आधार पर बताए गए एक करोड़ मीट्रिक टन से अधिक कोयला एवं रिजेक्ट मूवमेंट का खदान से वाशरी, पावर प्लांट, वास्तविक खपत और स्टॉक तक एंड-टू-एंड मिलान कराने की मांग की गई है।

रिजेक्ट कोल की जांच: मास बैलेंस एवं फॉरेंसिक ऑडिट के माध्यम से यह जांच करने की मांग की गई है कि कहीं व्यावसायिक रूप से उपयोगी कोयले को रिजेक्ट श्रेणी में तो दर्ज नहीं किया गया। साथ ही रिजेक्ट आधारित पावर प्लांटों में ईंधन आपूर्ति, बॉयलर फीडिंग और बिजली उत्पादन के आंकड़ों का मिलान कराने की मांग की गई है।

डिजिटल रिकॉर्ड की फॉरेंसिक जांच: वेब्रिज सर्वर के रॉ लॉग, GPS, FASTag, CCTV, RFID और रेलवे रेक रिकॉर्ड का डिजिटल फॉरेंसिक ऑडिट कराने की मांग की गई है, ताकि कथित फर्जी ट्रिप, बोगस वाहनों एवं वजन संबंधी संभावित हेरफेर की जांच हो सके।

जल, पर्यावरण और जनस्वास्थ्य: दीपका-गेवरा क्षेत्र की नदियों, नालों, तालाबों एवं भूजल के औद्योगिक उपयोग का हाइड्रोलॉजिकल ऑडिट तथा वाशरी, क्रशिंग एवं भारी परिवहन से प्रभावित क्षेत्र में PM10, PM2.5 और कोयला धूल के प्रभाव का स्वतंत्र वैज्ञानिक एवं स्वास्थ्य मूल्यांकन कराने की मांग की गई है।

फ्लाई ऐश और स्लरी का सत्यापन: पावर प्लांटों से निकलने वाली फ्लाई ऐश तथा वाशरी स्लरी के उत्पादन, भंडारण और निष्पादन का ड्रोन एवं GIS मैपिंग के माध्यम से भौतिक सत्यापन कराने की मांग की गई है।

PESA, ग्रामसभा और भूमि अधिकार: प्रभावित ग्रामीण एवं अनुसूचित क्षेत्रों में परियोजना विस्तार के दौरान ग्रामसभा की वैधानिक प्रक्रिया, वन एवं राजस्व भूमि तथा जल स्रोतों के उपयोग की निष्पक्ष जांच कराने की मांग की गई है।

औद्योगिक डीजल, बायोडीजल और टैक्स लाभ: वर्ष 2015 से वर्तमान तक वाशरियों, पावर प्लांटों एवं परिवहन में इस्तेमाल औद्योगिक डीजल एवं बायोडीजल की आपूर्ति श्रृंखला, ई-वे बिल, GST रिकॉर्ड तथा सरकारी कर छूट एवं प्रोत्साहनों का वित्तीय फॉरेंसिक ऑडिट कराने की मांग की गई है।

श्रमिक अधिकार और विभागीय जवाबदेही: नियमित एवं ठेका श्रमिकों के PF, ESI, न्यूनतम वेतन, सुरक्षा उपकरण और दुर्घटना रिकॉर्ड की जांच के साथ SECL, पर्यावरण संरक्षण मंडल, खनन राजस्व एवं श्रम विभाग से संबंधित निगरानी और नियामकीय प्रक्रियाओं की भी जांच की मांग की गई है।

डिजिटल साक्ष्यों को सुरक्षित रखने की मांग

भारतीय जनाधिकार पार्टी ने जांच शुरू होने से पहले वेब्रिज सर्वर, GPS, CCTV, OCEMS/CEMS, ERP तथा वित्तीय अभिलेखों को सुरक्षित एवं संरक्षित करने की मांग की है, ताकि जांच के दौरान महत्वपूर्ण डिजिटल एवं दस्तावेजी साक्ष्यों से किसी प्रकार की छेड़छाड़ न हो सके।

18 अगस्त को दीपका-गेवरा में धरना-प्रदर्शन

पार्टी ने बताया कि इन मांगों को लेकर 18 अगस्त 2026 को सुबह 11 बजे एसीबी (India) लिमिटेड कार्यालय, SECL परिक्षेत्र दीपका/गेवरा, जिला कोरबा के समक्ष चरणबद्ध एवं शांतिपूर्ण धरना-प्रदर्शन और जनआंदोलन किया जाएगा।

पार्टी ने कहा कि उसका उद्देश्य किसी व्यक्ति अथवा संस्था को पूर्वाग्रह से दोषी ठहराना नहीं, बल्कि लगाए जा रहे आरोपों की निष्पक्ष, पारदर्शी और वैधानिक जांच सुनिश्चित कराना है।

पार्टी का संदेश

भारतीय जनाधिकार पार्टी ने कहा कि कोयला राष्ट्रीय संपदा है, पानी जनता के जीवन का आधार है और जंगल-जमीन आने वाली पीढ़ियों की विरासत है। इसलिए प्रत्येक टन कोयले और प्रत्येक बूंद पानी के उपयोग का पारदर्शी हिसाब होना चाहिए।

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