एनटीपीसी के गोद लिए गांव की बदहाली भी आई सामने
छत्तीसगढ़/कोरबा :- सुशासन तिहार के पहले ही दिन कोरबा जिले के कटघोरा जनपद पंचायत अंतर्गत धनरास ग्राम पंचायत में आयोजित 1 मई को जन समस्या निवारण शिविर में व्यवस्थाओं की पोल खुल गई। ब्लॉक स्तरीय अधिकारियों की लापरवाही साफ तौर पर सामने आई, जहां मूलभूत व्यवस्थाएं तक सुनिश्चित नहीं की जा सकीं। 
शिविर में सबसे गंभीर स्थिति आवेदन प्रक्रिया को लेकर रही। अधिकारियों द्वारा आवेदन फार्म तक उपलब्ध नहीं कराए गए, जिसके चलते ग्रामीणों को मजबूरन ₹5 में फॉर्म खरीदना पड़ा और ₹10 खर्च कर फोटो कॉपी कर आवेदन जमा करना पड़ा। यह स्थिति ब्लॉक स्तर की तैयारी और समन्वय की कमी को दर्शाती है। 
कलेक्टर की पूर्व चेतावनी के बावजूद ब्लॉक स्तर पर व्यवस्थाओं को लेकर कोई ठोस पहल नहीं दिखी। प्रचार-प्रसार के अभाव में ग्रामीणों की संख्या भी सीमित रही, जिससे “जितने अधिकारी, उतने ही ग्रामीण” जैसी स्थिति बन गई। 
विभागीय स्टालों में भी अव्यवस्था का आलम रहा। शासन की योजनाओं के पंपलेट, जिनके माध्यम से आम जनता को जागरूक करते हुए योजनाओं की जानकारी दी जाती है, वे अधिकांश विभागीय स्टालों में नजर नहीं आए। इसके कारण ग्रामीणों को शासन की योजनाओं की संपूर्ण और सही जानकारी नहीं मिल पाई। वहीं कुछ स्थानों पर निजी संस्थानों के पंपलेट बंटते दिखाई दिए, जिससे प्रशासनिक लापरवाही और उजागर हुई। 
भीषण गर्मी के बीच न पीने के पानी की समुचित व्यवस्था रही और न ही भोजन की। दोपहर में खानापूर्ति के नाम पर केवल मुर्रा (लाई) बांटा गया, वह भी हाथों और गमछे में। बैठने की व्यवस्था भी पर्याप्त नहीं थी, जिससे ग्रामीण और अधिकारी दोनों ही पेड़ों की छांव में बैठने को मजबूर दिखे। 
इन तमाम अव्यवस्थाओं के बावजूद शिविर में करीब 300 आवेदन प्राप्त हुए, जिनमें से लगभग 100 का मौके पर निराकरण किया गया। यह जानकारी कार्यक्रम में उपस्थित उद्योग मंत्री लखन लाल देवांगन द्वारा दी गई। 
इसी बीच, जिस धनरास गांव में यह शिविर आयोजित हुआ, वह एनटीपीसी द्वारा गोद लिया गया गांव है, लेकिन जमीनी हकीकत कुछ और ही कहानी बयां करती है। गांव में बने राखड़ (ऐश) डेम के कारण ग्रामीणों को कई समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है। गर्मियों में उड़ने वाली राख घरों तक पहुंचकर खाने-पीने की सामग्री को दूषित कर रही है, जिससे लोगों के स्वास्थ्य पर विपरीत प्रभाव पड़ रहा है। वहीं खेतों की उर्वरता भी प्रभावित हो रही है और कई जगह जमीन बंजर जैसी होती जा रही है। पानी की समस्या भी यहां गंभीर बनी हुई है। 
गांव की स्थिति को देखकर ऐसा प्रतीत होता है कि एनटीपीसी द्वारा कॉर्पोरेट सामाजिक उत्तरदायित्व (CSR) के तहत किए जाने वाले कार्य केवल कागजों तक सीमित हैं और जमीनी स्तर पर उसका अपेक्षित असर नजर नहीं आता।
कुल मिलाकर, सुशासन तिहार जैसे महत्वाकांक्षी आयोजन के पहले दिन ही ब्लॉक स्तरीय अधिकारियों की लापरवाही, विभागीय तैयारियों की कमी और एनटीपीसी के गोद लिए गांव की बदहाल स्थिति ने शासन-प्रशासन की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। अब देखना होगा कि इन खामियों पर जिम्मेदारों के खिलाफ क्या कार्रवाई होती है।












