बिना सुरक्षा गार्ड चल रहा टोल, कर्मचारियों ने NHAI पर भी उठाए सवाल
छत्तीसगढ़/कोरबा-कटघोरा :- जिले के मदनपुर टोल प्लाजा (NH-130) में कार्यरत कर्मचारियों ने टोल संचालन एजेंसी पर श्रम कानूनों के गंभीर उल्लंघन के आरोप लगाए हैं। रविवार को आयोजित बैठक में बड़ी संख्या में टोल कर्मियों ने अपनी समस्याएं सामने रखते हुए भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) से मामले की निष्पक्ष जांच कर कार्रवाई की मांग की।
कर्मचारियों का आरोप है कि टोल एजेंसी M/S Ashish Jaiswal द्वारा न्यूनतम मजदूरी नियमों की खुलेआम अनदेखी की जा रही है। कर्मचारियों से निर्धारित 8 घंटे की जगह लगातार 12 घंटे तक ड्यूटी कराई जा रही है, जबकि साप्ताहिक अवकाश भी नहीं दिया जा रहा। कई कर्मचारियों को बिना किसी वैधानिक प्रक्रिया के नौकरी से हटाने का भी आरोप लगाया गया है।
कर्मचारियों का आरोप है कि टोल एजेंसी M/S Ashish Jaiswal द्वारा न्यूनतम मजदूरी नियमों की खुलेआम अनदेखी की जा रही है। कर्मचारियों से निर्धारित 8 घंटे की जगह लगातार 12 घंटे तक ड्यूटी कराई जा रही है, जबकि साप्ताहिक अवकाश भी नहीं दिया जा रहा। कई कर्मचारियों को बिना किसी वैधानिक प्रक्रिया के नौकरी से हटाने का भी आरोप लगाया गया है।

न्यूनतम वेतन से कम भुगतान का आरोप
टोल कर्मियों ने बताया कि राष्ट्रीय राजमार्ग के नियमों के अनुसार कुशल कर्मचारियों को प्रतिदिन 729 रुपये के हिसाब से लगभग 22,170 रुपये मासिक वेतन मिलना चाहिए, लेकिन उन्हें केवल 543 रुपये प्रतिदिन यानी करीब 17,500 रुपये मासिक दिए जा रहे हैं।
इसी प्रकार अर्धकुशल कर्मचारियों को नियमानुसार 614 रुपये प्रतिदिन यानी लगभग 18,420 रुपये प्रतिमाह मिलना चाहिए, जबकि उन्हें मात्र 350 रुपये प्रतिदिन के हिसाब से करीब 10,500 रुपये दिए जा रहे हैं।
वहीं अकुशल कर्मचारियों को 526 रुपये प्रतिदिन के हिसाब से लगभग 15,700 रुपये मासिक वेतन मिलना चाहिए, लेकिन उन्हें केवल 300 रुपये प्रतिदिन यानी करीब 9,000 रुपये ही दिए जा रहे हैं।
PF, बोनस, OT और मेडिकल सुविधा से भी वंचित
कर्मचारियों ने आरोप लगाया कि उन्हें पीएफ, मेडिकल सुविधा, बोनस और ओवरटाइम (OT) का लाभ भी नहीं दिया जा रहा है। छुट्टी लेने पर वेतन से कटौती की जाती है और कर्मचारियों पर लगातार दबाव बनाया जाता है।
इसी प्रकार अर्धकुशल कर्मचारियों को नियमानुसार 614 रुपये प्रतिदिन यानी लगभग 18,420 रुपये प्रतिमाह मिलना चाहिए, जबकि उन्हें मात्र 350 रुपये प्रतिदिन के हिसाब से करीब 10,500 रुपये दिए जा रहे हैं।
वहीं अकुशल कर्मचारियों को 526 रुपये प्रतिदिन के हिसाब से लगभग 15,700 रुपये मासिक वेतन मिलना चाहिए, लेकिन उन्हें केवल 300 रुपये प्रतिदिन यानी करीब 9,000 रुपये ही दिए जा रहे हैं।
PF, बोनस, OT और मेडिकल सुविधा से भी वंचित
कर्मचारियों ने आरोप लगाया कि उन्हें पीएफ, मेडिकल सुविधा, बोनस और ओवरटाइम (OT) का लाभ भी नहीं दिया जा रहा है। छुट्टी लेने पर वेतन से कटौती की जाती है और कर्मचारियों पर लगातार दबाव बनाया जाता है।

बिना सुरक्षा गार्ड चल रहा टोल प्लाजा
टोल कर्मियों ने सुरक्षा व्यवस्था को लेकर भी गंभीर सवाल उठाए हैं। कर्मचारियों का कहना है कि नियमों के अनुसार टोल प्लाजा में कम से कम दो गनर की तैनाती अनिवार्य होनी चाहिए, लेकिन यहां एक भी सुरक्षा गार्ड मौजूद नहीं है। इससे कर्मचारियों की सुरक्षा हमेशा खतरे में बनी रहती है।
मामले में जब टोल मैनेजर से चर्चा की गई तो उन्होंने भी टोल प्लाजा में सुरक्षा गार्डों की नियुक्ति नहीं होने की बात स्वीकार की। कर्मचारियों का आरोप है कि सुरक्षा व्यवस्था की यह लापरवाही किसी बड़ी घटना को न्योता दे सकती है।
मामले में जब टोल मैनेजर से चर्चा की गई तो उन्होंने भी टोल प्लाजा में सुरक्षा गार्डों की नियुक्ति नहीं होने की बात स्वीकार की। कर्मचारियों का आरोप है कि सुरक्षा व्यवस्था की यह लापरवाही किसी बड़ी घटना को न्योता दे सकती है।

NHAI की मॉनिटरिंग पर भी उठे सवाल
कर्मचारियों ने कहा कि टोल प्लाजा में वेतन भुगतान से लेकर सुरक्षा व्यवस्था तक भारी अनियमितताएं हैं, जिससे यह स्पष्ट होता है कि NHAI अधिकारियों की मॉनिटरिंग कमजोर है। कर्मचारियों का आरोप है कि टोल प्लाजा में नियमों का पालन सुनिश्चित कराने में संबंधित अधिकारी पूरी तरह विफल साबित हो रहे हैं।
75 की जगह 37 कर्मचारियों से कराया जा रहा काम
कर्मचारियों के मुताबिक टोल प्लाजा के संचालन के लिए लगभग 70 से 75 कर्मचारियों की आवश्यकता है, लेकिन वर्तमान में केवल 37 कर्मचारी ही कार्यरत हैं। स्टाफ की भारी कमी के कारण कर्मचारियों पर अतिरिक्त कार्यभार बढ़ गया है और उन्हें लगातार लंबे समय तक काम करना पड़ रहा है।
कर्मचारियों ने कहा कि वे लंबे समय से अपनी समस्याएं प्रबंधन और अधिकारियों के सामने रखते आ रहे हैं, लेकिन अब तक केवल आश्वासन ही मिला है। अब उन्होंने NHAI से हस्तक्षेप कर श्रम कानूनों का पालन सुनिश्चित कराने और पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है।
नाराज कर्मचारियों ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द समाधान नहीं हुआ तो वे आंदोलन का रास्ता अपनाने को मजबूर होंगे।
कर्मचारियों ने कहा कि वे लंबे समय से अपनी समस्याएं प्रबंधन और अधिकारियों के सामने रखते आ रहे हैं, लेकिन अब तक केवल आश्वासन ही मिला है। अब उन्होंने NHAI से हस्तक्षेप कर श्रम कानूनों का पालन सुनिश्चित कराने और पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है।
नाराज कर्मचारियों ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द समाधान नहीं हुआ तो वे आंदोलन का रास्ता अपनाने को मजबूर होंगे।
https://youtu.be/bzutsgkjplE?si=tvc5HI44DNppln7-













