द्वारिका नगरी सामाजिक विकास ट्रस्ट ने छत्तीसगढ़ शासन से मांगी करीब 20 एकड़ जमीन; प्राचीन गुरुकुल परंपरा और आधुनिक शिक्षा का संगम, जनसहयोग से जल्द साकार करने की तैयारी—उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश में भी विस्तार की योजना
छत्तीसगढ़/कोरबा :- समाज सेवा को केवल वर्तमान जरूरतों तक सीमित न रखते हुए आने वाली पीढ़ियों के भविष्य को संवारने की दिशा में सुर्खियां न्यूज़ के संपादक एवं द्वारिका नगरी सामाजिक विकास ट्रस्ट के संस्थापक एवं अध्यक्ष-ट्रस्टी प्रीतम जायसवाल के नेतृत्व में एक व्यापक सामाजिक और शैक्षणिक संकल्प सामने आया है। ट्रस्ट की प्रबंध निदेशक एवं ट्रस्टी रेनू जायसवाल भी इन सेवा कार्यों में सक्रिय भूमिका निभा रही हैं।
ट्रस्ट की ओर से छत्तीसगढ़ शासन से कोरबा में करीब 20 एकड़ राजस्व भूमि उपलब्ध कराने का आग्रह किया गया है। शासन की ओर से सहयोग मिलने पर इस भूमि पर भगवान श्री कृष्ण द्वारकाधीश का भव्य मंदिर, आधुनिक सुविधाओं से युक्त गुरुकुल तथा सामाजिक एवं सांस्कृतिक गतिविधियों का व्यापक परिसर विकसित करने की परिकल्पना है।
छत्तीसगढ़ शासन-प्रशासन और औद्योगिक संस्थानों के सहयोग से जल्द आकार ले सकता है सपना
ट्रस्ट का कहना है कि कोरबा में प्रस्तावित इस बड़े सामाजिक एवं शैक्षणिक प्रकल्प को साकार करने में छत्तीसगढ़ शासन एवं जिला प्रशासन की भूमिका महत्वपूर्ण हो सकती है। यदि शासन की ओर से नियमानुसार भूमि उपलब्ध कराने के साथ आवश्यक सहयोग मिलता है और कोरबा के औद्योगिक संस्थान, सेवा क्षेत्र से जुड़े संगठन, सामाजिक संस्थाएं तथा सक्षम नागरिक भी अपनी क्षमता के अनुसार सहयोग करते हैं, तो मंदिर, गुरुकुल और सेवा परिसर के विकास की प्रक्रिया को गति दी जा सकती है।
ट्रस्ट ने कोरबा के औद्योगिक संस्थानों और सामाजिक संगठनों से भी अपील की है कि वे कॉरपोरेट सामाजिक उत्तरदायित्व (CSR), सामाजिक सहयोग अथवा नियमानुसार उपलब्ध अन्य माध्यमों से इस प्रकार की शिक्षा एवं सेवा आधारित परियोजनाओं में योगदान देने की संभावनाओं पर विचार करें। संस्था का मानना है कि शासन, उद्योग जगत और समाज की सामूहिक भागीदारी से इस महत्वाकांक्षी योजना को अपेक्षाकृत कम समय में चरणबद्ध तरीके से विकसित किया जा सकता है।
सरकार का सहयोग और समाज का दान बनेगा इस संकल्प की ताकत
द्वारिका नगरी सामाजिक विकास ट्रस्ट का कहना है कि इतने बड़े सामाजिक एवं शैक्षणिक प्रकल्प को साकार करने के लिए शासन का सहयोग और समाज की भागीदारी दोनों आवश्यक हैं। यदि शासन भूमि एवं आवश्यक सहयोग उपलब्ध कराता है और समाज के लोग अपनी स्वेच्छा एवं सामर्थ्य के अनुसार अधिक से अधिक दान और सहयोग करते हैं, तो इस परिसर के निर्माण और विकास की प्रक्रिया को तेजी से आगे बढ़ाया जा सकता है।
ट्रस्ट ने समाज के सक्षम लोगों, दानदाताओं, सामाजिक संगठनों और संस्थानों से इस अभियान से जुड़ने की अपील की है। संस्था का मानना है कि लोगों का छोटा-बड़ा सहयोग भी मिलकर बच्चों की शिक्षा, सामाजिक सेवा और इस व्यापक परिसर के निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।
प्राचीन गुरुकुल परंपरा के साथ आधुनिक शिक्षा
प्रस्तावित गुरुकुल इस पूरी योजना का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा होगा। ट्रस्ट की परिकल्पना है कि यहां प्राचीन भारतीय गुरुकुल पद्धति की मूल भावना को आधुनिक शिक्षा के साथ जोड़ा जाए।
गुरु-शिष्य परंपरा, संस्कार, अनुशासन, योग, नैतिक शिक्षा, व्यक्तित्व निर्माण और भारतीय संस्कृति की समझ के साथ बच्चों को वर्तमान समय के अनुरूप आधुनिक एवं गुणवत्तापूर्ण शिक्षा उपलब्ध कराने का प्रयास किया जाएगा।
उद्देश्य यह है कि बच्चे केवल डिग्री हासिल करने तक सीमित न रहें, बल्कि ज्ञान, संस्कार, आत्मविश्वास, आत्मनिर्भरता और सामाजिक जिम्मेदारी के साथ भविष्य के लिए तैयार हों।
आर्थिक कमजोरी प्रतिभा के रास्ते में न बने बाधा
ट्रस्ट का लक्ष्य आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के बच्चों तथा मेधावी और प्रतिभाशाली विद्यार्थियों को बेहतर शैक्षणिक अवसर उपलब्ध कराना है। प्रस्तावित गुरुकुल में जरूरतमंद बच्चों को निशुल्क या सहयोग आधारित शिक्षा उपलब्ध कराने की दिशा में कार्य करने की योजना है।
द्वारकाधीश मंदिर बनेगा आस्था और संस्कृति का केंद्र
प्रस्तावित परिसर में भगवान श्री कृष्ण द्वारकाधीश का भव्य मंदिर भी निर्माण कराने की परिकल्पना है। मंदिर को धार्मिक आस्था के साथ भारतीय संस्कृति और आध्यात्मिक परंपरा से जोड़ते हुए विकसित किया जाएगा।
ट्रस्ट की सोच है कि मंदिर और गुरुकुल एक-दूसरे के पूरक बनें, जहां आस्था के साथ ज्ञान, संस्कार और सेवा को भी महत्व मिले।
धार्मिक एवं सांस्कृतिक पर्यटन को मिलेगा नया आयाम
प्रस्तावित परिसर को केवल स्थानीय लोगों के लिए नहीं, बल्कि धार्मिक एवं सांस्कृतिक पर्यटन की दृष्टि से भी विकसित करने की योजना है। यहां आने वाले श्रद्धालुओं और पर्यटकों को मंदिर दर्शन के साथ भारतीय संस्कृति, गुरुकुल परंपरा, पर्यावरण और सामाजिक सेवा से जुड़ी गतिविधियों को देखने-समझने का अवसर मिल सकेगा।
भविष्य में यह परिसर कोरबा आने वाले पर्यटकों के लिए एक अतिरिक्त आकर्षण बन सकता है। इससे आसपास के क्षेत्र में परिवहन, छोटे व्यवसायों और अन्य स्थानीय आर्थिक गतिविधियों को भी बढ़ावा मिलने की संभावना रहेगी।
गर्मी में जल सेवा से लेकर जरूरतमंदों तक वस्त्र और शिक्षा सामग्री
द्वारिका नगरी सामाजिक विकास ट्रस्ट द्वारा वर्तमान में भी विभिन्न सामाजिक सेवा गतिविधियां संचालित की जा रही हैं। गर्मी के मौसम में मानव सेवा जल केंद्र के माध्यम से राहगीरों और आम नागरिकों को निशुल्क ठंडा पानी, नींबू-जीरा और शरबत उपलब्ध कराया जाता है।
जरूरतमंद एवं आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों को वस्त्र एवं आवश्यक सामग्री उपलब्ध कराने के साथ गरीब बच्चों को शिक्षा सामग्री वितरण जैसे कार्य भी किए जाते हैं।
बुजुर्गों की सेवा और पर्यावरण संरक्षण भी अभियान का हिस्सा
ट्रस्ट की सामाजिक गतिविधियों में जरूरतमंद एवं बेसहारा बुजुर्गों के लिए सुरक्षित और सम्मानजनक वातावरण उपलब्ध कराने का संकल्प भी शामिल है। इसके साथ ही ‘रन फॉर ग्रीन’ और ‘एक पेड़ मां के नाम’ जैसे पर्यावरण संरक्षण एवं वृक्षारोपण अभियानों में भी संस्था की सहभागिता रही है।
भविष्य में हर दिन होगा निशुल्क भंडारा
ट्रस्ट की भविष्य की योजना में प्रस्तावित परिसर के पूर्ण रूप से विकसित होने के बाद प्रतिदिन निशुल्क भंडारे का आयोजन भी शामिल है। इसके माध्यम से यहां आने वाले श्रद्धालुओं, विद्यार्थियों, पर्यटकों और जरूरतमंद लोगों को निःशुल्क भोजन उपलब्ध कराने का संकल्प है। इस तरह परिसर को आस्था के साथ अन्न सेवा और मानव सेवा का केंद्र बनाने की परिकल्पना है।
उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से भी सहयोग की अपील
द्वारिका नगरी सामाजिक विकास ट्रस्ट ने उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से भी अपील की है कि उत्तर प्रदेश में ट्रस्ट को सामाजिक एवं शैक्षणिक गतिविधियों के विस्तार के लिए उपयुक्त भूमि उपलब्ध कराने तथा नियमानुसार आवश्यक सहयोग प्रदान करने की दिशा में पहल की जाए।
ट्रस्ट की योजना उत्तर प्रदेश में भी गुरुकुल, शिक्षा, संस्कार, सामाजिक सेवा, जरूरतमंदों की सहायता, पर्यावरण संरक्षण और धार्मिक-सांस्कृतिक गतिविधियों को एक साथ जोड़कर सेवा केंद्र विकसित करने की है।
उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश में भी विस्तार की तैयारी
द्वारिका नगरी सामाजिक विकास ट्रस्ट की योजना केवल कोरबा तक सीमित नहीं है। संस्था द्वारा उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश में भी इसी प्रकार की सामाजिक एवं शैक्षणिक गतिविधियों को आगे बढ़ाने की योजना बनाई गई है।
इन राज्यों में जरूरतमंद एवं मेधावी बच्चों के लिए गुरुकुल की स्थापना, शिक्षा एवं संस्कार आधारित गतिविधियां, सामाजिक सेवा, जरूरतमंदों की सहायता, पर्यावरण संरक्षण तथा धार्मिक-सांस्कृतिक गतिविधियों को एक साथ जोड़ने की परिकल्पना है।
बड़े मंदिर ट्रस्टों और धार्मिक संस्थानों से भी सहयोग की अपील
द्वारिका नगरी सामाजिक विकास ट्रस्ट के संस्थापक एवं अध्यक्ष-ट्रस्टी प्रीतम जायसवाल ने देश के बड़े धार्मिक एवं मंदिर ट्रस्टों से भी इस सामाजिक संकल्प में सहयोग की अपील की है। उन्होंने कहा कि शिरडी के श्री साईबाबा संस्थान, तिरुपति बालाजी, वैष्णो देवी, सिद्धिविनायक मंदिर सहित देश के अन्य बड़े धार्मिक संस्थान, अपनी क्षमता और नियमों के अनुरूप ऐसे सामाजिक एवं शैक्षणिक प्रकल्पों में सहयोग करें।
उन्होंने कहा कि बड़े धार्मिक संस्थानों की सेवा परंपरा से प्रेरणा लेकर यदि गुरुकुल निर्माण, गरीब बच्चों की शिक्षा, अन्नदान, वृद्ध सेवा और सामाजिक विकास जैसे कार्यों में सहयोग मिले तो समाज के कमजोर वर्ग के हजारों बच्चों और परिवारों को लाभ पहुंचाया जा सकता है।
20 एकड़ जमीन से आकार ले सकता है कोरबा का बड़ा सामाजिक सपना
करीब 20 एकड़ भूमि का प्रस्ताव इस पूरी परिकल्पना की आधारशिला है। छत्तीसगढ़ शासन एवं जिला प्रशासन का सहयोग, औद्योगिक संस्थानों की सामाजिक भागीदारी और आम नागरिकों का जनसहयोग इस योजना को गति देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।
परिकल्पित परिसर में द्वारकाधीश मंदिर आस्था का केंद्र, गुरुकुल ज्ञान और संस्कार का केंद्र, सामाजिक गतिविधियां सेवा का केंद्र तथा पूरा परिसर पर्यटन और सांस्कृतिक गतिविधियों का आकर्षण बने—इसी सोच के साथ योजना को आगे बढ़ाने का संकल्प लिया गया है।
द्वारिका नगरी सामाजिक विकास ट्रस्ट की अपील
द्वारिका नगरी सामाजिक विकास ट्रस्ट ने छत्तीसगढ़ शासन, जिला प्रशासन, औद्योगिक संस्थानों, धार्मिक संस्थाओं, सामाजिक संगठनों, दानदाताओं और आम नागरिकों से अपील की है कि वे इस व्यापक सेवा संकल्प से जुड़ें। ट्रस्ट का कहना है कि सरकार का सहयोग और समाज की सहभागिता जितनी मजबूत होगी, उतनी ही तेजी से इस योजना को धरातल पर उतारने की दिशा में कार्य किया जा सकेगा।
ट्रस्ट ने सभी सहयोगकर्ताओं से अपनी स्वेच्छा एवं सामर्थ्य के अनुसार दान और सहयोग करने की अपील की है, ताकि शिक्षा, संस्कार, अन्न सेवा, सामाजिक सेवा और धार्मिक-सांस्कृतिक गतिविधियों से जुड़े इस संकल्प को आगे बढ़ाया जा सके।
द्वारिका नगरी सामाजिक विकास ट्रस्ट
पंजीयन क्रमांक: 202501050100038
वेबसाइट: dwarikanagari.com
खाता धारक: द्वारिका नगरी सामाजिक विकास ट्रस्ट
खाता क्रमांक: 44780621261
बैंक: स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (SBI)
IFSC: SBIN0006047
मुख्य कार्यालय: सीएसईबी कॉलोनी, गणेश चौक के पास, कोरबा, छत्तीसगढ़ – 495677
संपर्क:
प्रीतम जायसवाल, अध्यक्ष एवं ट्रस्टी: 8871991491
97706 21818
कार्यालय: 07759-296186












