छत्तीसगढ़/कोरबा :- राजस्व पुस्तक परिपत्र (आरबीसी) 6-4 के तहत जनहानि के मामलों में आर्थिक अनुदान स्वीकृति की प्रक्रिया को पारदर्शी और निष्पक्ष बनाने के लिए कलेक्टर एवं जिला दण्डाधिकारी कुणाल दुदावत ने सख्त निर्देश जारी किए हैं। संभावित फर्जीवाड़े और अनियमितताओं पर रोक लगाने के लिए अब संबंधित प्रकरणों में पुलिस विवेचक और शव परीक्षणकर्ता चिकित्सक के कथन भी दर्ज किए जाएंगे।
आरबीसी 6-4 के अंतर्गत जनहानि की सूचना संबंधित क्षेत्र के तहसीलदार, पटवारी अथवा कोटवार के माध्यम से दी जाएगी। सूचना मिलने के बाद अनुविभागीय अधिकारी (राजस्व) घटना स्थल का निरीक्षण करेंगे। इस दौरान यह जांच की जाएगी कि मृत्यु प्राकृतिक आपदा के कारण हुई है अथवा नहीं।
जनहानि से जुड़े मामलों में संबंधित थाने के विवेचक एवं शव परीक्षणकर्ता चिकित्सक को राजस्व न्यायालय में बुलाकर उनके कथन दर्ज किए जाएंगे। कथन दर्ज होने के बाद ही प्रकरण को विधिवत अनुशंसा के साथ आगे प्रस्तुत किया जाएगा। इससे अनुदान स्वीकृति के दौरान घटना से जुड़े आवश्यक तथ्य और साक्ष्य स्पष्ट रूप से उपलब्ध रहेंगे।
कलेक्टर कुणाल दुदावत ने अधिकारियों को निर्देशित किया है कि आरबीसी 6-4 के अंतर्गत प्राप्त प्रत्येक जनहानि प्रकरण में निर्धारित प्रक्रिया का कड़ाई से पालन किया जाए। उन्होंने कहा कि पात्र हितग्राहियों को नियमानुसार सहायता उपलब्ध कराना प्रशासन की प्राथमिकता है, लेकिन अनुदान स्वीकृति की प्रक्रिया में किसी भी प्रकार की अनियमितता या फर्जीवाड़े की गुंजाइश नहीं होनी चाहिए।
उन्होंने अधिकारियों को प्रत्येक प्रकरण में तथ्यों की गहन जांच करते हुए पारदर्शिता और निष्पक्षता सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं।












