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नागपंचमी पर वन्यजीव संरक्षण की अपील: आस्था के साथ प्रकृति और नागों के जीवन का सम्मान करें

छत्तीसगढ़/कोरबा :-  नागपंचमी केवल नागों की पूजा का पर्व नहीं, बल्कि भारतीय परंपरा में प्रकृति और नागों के प्रति सम्मान की भावना से जुड़ा महत्वपूर्ण पर्व है। सावन शुक्ल पंचमी को मनाए जाने वाले इस पर्व पर नाग देवताओं की पूजा कर परिवार की सुख-समृद्धि, सुरक्षा और कल्याण की कामना की जाती है।

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हिंदू धार्मिक परंपरा में नागों का विशेष महत्व है। भगवान शिव के गले में नाग, भगवान विष्णु का शेषनाग की शय्या पर विराजमान होना और समुद्र मंथन में वासुकि नाग का उल्लेख नागों के धार्मिक महत्व को दर्शाता है। महाभारत की परंपरा में तक्षक नाग तथा भगवान कृष्ण और कालिया नाग की कथा भी नागों से जुड़ी प्रमुख मान्यताओं में शामिल हैं।

नागपंचमी और कृषि का संबंध

नागपंचमी का संबंध वर्षा ऋतु और पारंपरिक कृषि जीवन से भी रहा है। बारिश के दौरान जमीन के भीतर पानी भरने से साँप अपने बिलों से बाहर निकल सकते हैं। वहीं खेतों में साँप चूहों और अन्य कृंतकों की संख्या नियंत्रित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं, जिससे फसलों को होने वाले नुकसान को कम करने में मदद मिलती है।

इसलिए आज नागपंचमी को वन्यजीव संरक्षण और प्रकृति के प्रति संवेदनशीलता का संदेश देने के अवसर के रूप में भी देखा जा सकता है।

नागपंचमी पर क्या करें?

  • साँप दिखाई देने पर उससे सुरक्षित दूरी बनाए रखें।
  • साँप को पकड़ने या मारने का प्रयास न करें।
  • वन विभाग या प्रशिक्षित रेस्क्यू टीम को सूचना दें।
  • साँपों और अन्य वन्यजीवों के प्राकृतिक आवास का सम्मान करें।
  • बच्चों को वन्यजीवों के प्रति प्रेम और संरक्षण की भावना सिखाएं।
  • पूजा के नाम पर किसी भी जीव को कष्ट न पहुँचाएं।

क्या न करें?

  • साँप को दूध न पिलाएं।
  • साँप को पकड़कर भीड़ में प्रदर्शन न करें।
  • फोटो या वीडियो बनाने के लिए साँप के करीब न जाएं।
  • किसी भी वन्यजीव को चोट न पहुंचाएं और न ही उसे मारें।
  • अंधविश्वास के कारण वन्यजीवों के साथ क्रूरता न करें।

साँपों से जुड़े मिथक और सच्चाई

मिथक: साँप दूध पीते हैं।
सच्चाई: साँप स्तनधारी नहीं हैं और दूध उनका प्राकृतिक आहार नहीं है। उन्हें दूध पिलाना उनके लिए नुकसानदायक हो सकता है।

मिथक: साँप इंसानों से बदला लेते हैं।
सच्चाई: साँप इंसानों की तरह बदला लेने की योजना नहीं बनाते। खतरा महसूस होने पर वे सामान्यतः बचने या अपनी रक्षा करने का प्रयास करते हैं।

मिथक: साँप इंसान का पीछा करके उसे काटने आते हैं।
सच्चाई: अधिकांश परिस्थितियों में साँप इंसान से दूर जाने की कोशिश करते हैं। यदि कोई साँप आपकी दिशा में आता दिखाई दे तो उसे रास्ता दें और सुरक्षित दूरी बनाए रखें।

मिथक: साँप के पास नागमणि होती है।
सच्चाई: नागमणि लोककथाओं और पौराणिक मान्यताओं का हिस्सा है। वैज्ञानिक रूप से साँप के शरीर में किसी चमकने वाली या कीमती ‘मणि’ के होने का प्रमाण नहीं है।

मिथक: हर साँप जहरीला होता है।
सच्चाई: सभी साँप विषैले नहीं होते। अलग-अलग प्रजातियों की पहचान और व्यवहार अलग होता है, इसलिए किसी अनजान साँप को छूना या पकड़ना नहीं चाहिए।

आस्था के साथ संरक्षण का संकल्प

आस्था अपनी जगह है और विज्ञान अपनी जगह, लेकिन दोनों के बीच एक सुंदर रास्ता है—जीव के प्रति सम्मान।

साँप इंसानों को नुकसान पहुँचाने के उद्देश्य से हमारे घरों या खेतों में नहीं आते। वे भी भोजन, पानी और सुरक्षित स्थान की तलाश में रहते हैं और प्रकृति के पारिस्थितिक संतुलन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

नागपंचमी पर साँपों को पकड़कर उनके साथ फोटो खिंचवाना, उन्हें परेशान करना या भीड़ में प्रदर्शन करना पूजा की भावना नहीं होनी चाहिए। सच्ची श्रद्धा यही है कि नाग देवता के प्रति आस्था रखते हुए वास्तविक साँपों और अन्य वन्यजीवों को उनके प्राकृतिक जीवन के साथ सुरक्षित रहने दिया जाए।

“नागपंचमी पर नाग की पूजा करें, लेकिन नाग को परेशान न करें।
प्रकृति को पूजने का सबसे अच्छा तरीका है—प्रकृति के जीवों की रक्षा करना।” 🐍🌿❤️

नागपंचमी की हार्दिक शुभकामनाएं।

— अविनाश यादव
अध्यक्ष, RCRS – Reptile Care and Rescuer Society, Korba
संपर्क: 98279 17848, 90099 96789, 79879 57958

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