छत्तीसगढ़/कोरबा :- तेज बारिश, कीचड़ भरे रास्ते और दुर्गम पहाड़ी क्षेत्र की कठिन परिस्थितियों के बीच कलेक्टर कुणाल दुदावत ने पोड़ी उपरोड़ा विकासखंड के दूरस्थ ग्राम समेलीभांठा स्थित विशेष पिछड़ी जनजाति बिरहोर बस्ती का दौरा कर प्रशासनिक संवेदनशीलता का परिचय दिया। उन्होंने गांव के स्कूल और आंगनबाड़ी भवन का निरीक्षण किया तथा बिरहोर परिवारों के बीच चौपाल लगाकर उनकी समस्याएं सुनीं। 
चौपाल में कलेक्टर ने ग्रामीणों से कहा कि प्रशासन का उद्देश्य केवल योजनाएं बनाना नहीं, बल्कि यह सुनिश्चित करना है कि अंतिम व्यक्ति तक उनका लाभ पहुंचे। शुरुआत में संकोच कर रहे ग्रामीण बाद में खुलकर अपनी समस्याएं बताने लगे।
ग्रामीणों ने बिजली, पेयजल, जर्जर स्कूल भवन की मरम्मत, स्कूल की बाउंड्रीवाल, मिडिल स्कूल की स्थापना, पुल निर्माण तथा भुडूपानी मोहल्ले में मूलभूत सुविधाओं की कमी जैसे मुद्दे उठाए। महिलाओं ने भी दैनिक जीवन से जुड़ी परेशानियों को विस्तार से रखा।
कलेक्टर ने मौके पर ही संबंधित अधिकारियों को आवश्यक कार्रवाई के निर्देश दिए। उन्होंने समेलीभांठा में स्कूल एवं आंगनबाड़ी भवन की मरम्मत, पेयजल के लिए बोर एवं सोलर ड्यूल पंप, विद्युत लाइन विस्तार, स्कूल की बाउंड्रीवाल, तालाब और पुल निर्माण, स्कूल परिसर के पास लगे बिजली के खंभे को हटाने तथा किसानों को आधुनिक कृषि यंत्र उपलब्ध कराने के निर्देश दिए। भुडूपानी के बच्चों के लिए समेलीभांठा स्कूल तक आने-जाने हेतु ई-रिक्शा की व्यवस्था सुनिश्चित करने को भी कहा गया।
निरीक्षण के दौरान यह भी सामने आया कि बिरहोर परिवार बांस शिल्प में दक्ष हैं। इसे देखते हुए कलेक्टर ने बांस उपलब्ध कराने, हस्तशिल्प निर्माण का प्रशिक्षण देने, आर्थिक सहायता उपलब्ध कराने और तैयार उत्पादों के विपणन की व्यवस्था विकसित करने के निर्देश दिए, ताकि जनजातीय परिवारों को स्थायी आजीविका मिल सके।
ग्राम पंचायत सरपंच श्रीमती अमिता राज ने भी गांव की विभिन्न आवश्यकताओं से कलेक्टर को अवगत कराया। कलेक्टर ने आश्वस्त किया कि विशेष पिछड़ी जनजाति बिरहोर परिवारों तक मूलभूत सुविधाएं पहुंचाना जिला प्रशासन की प्राथमिकताओं में शामिल है।
इस दौरान जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी प्रतीक जैन, एसडीएम मनोज बंजारे सहित अन्य अधिकारी उपस्थित रहे। बारिश के बीच आयोजित यह चौपाल केवल समस्याएं सुनने तक सीमित नहीं रही, बल्कि प्रशासन और बिरहोर समुदाय के बीच विश्वास, संवेदनशीलता और विकास के नए संवाद का सशक्त उदाहरण बनकर सामने आई।












