छत्तीसगढ़/बिलासपुर :- बिलासपुर रेंज में अपराधों की रोकथाम और कानून-व्यवस्था को और अधिक प्रभावी बनाने के उद्देश्य से पुलिस महानिरीक्षक (आईजी) राम गोपाल गर्ग के मार्गदर्शन में मंगलवार को उच्च स्तरीय ऑनलाइन कार्यशाला आयोजित की गई। कार्यशाला में रेंज के सभी जिलों के पुलिस अधीक्षक, एसडीओपी, थाना प्रभारी सहित करीब 200 पुलिस अधिकारी एवं कर्मचारी शामिल हुए।
बैठक का मुख्य उद्देश्य ‘प्रिवेंटिव पुलिसिंग’ (निवारक पुलिसिंग) को मजबूत करना, आदतन अपराधियों पर प्रभावी निगरानी स्थापित करना तथा संपत्ति एवं शरीर संबंधी अपराधों पर अंकुश लगाना रहा। इस दौरान पुलिस अधीक्षक सक्ती प्रफुल्ल ठाकुर ने गुंडा एवं निगरानी बदमाशों के संबंध में अपने अनुभव साझा करते हुए विस्तृत प्रस्तुतीकरण दिया।
आईजी श्री गर्ग ने स्पष्ट निर्देश दिए कि पुलिस का मुख्य लक्ष्य अपराध होने के बाद कार्रवाई करना नहीं, बल्कि अपराध की पुनरावृत्ति रोकना होना चाहिए। उन्होंने सक्रिय अपराधियों की नियमित निगरानी, खुफिया तंत्र को मजबूत करने तथा पुलिस-जन सहयोग बढ़ाने पर विशेष जोर दिया।
कार्यशाला में जारी किए गए प्रमुख निर्देश
- आदतन चोर, लुटेरों और अन्य अपराधियों का पुलिस रेगुलेशन के तहत A-Class (निगरानी) एवं B-Class (गुंडा) में वर्गीकरण कर उनका फोटो, फिंगरप्रिंट, बैंक खातों सहित पूरा रिकॉर्ड अद्यतन रखने के निर्देश दिए गए। गंभीर अपराधियों की गैंग हिस्ट्री शीट तैयार की जाएगी।
- गुंडा एवं निगरानी बदमाशों की सरप्राइज चेकिंग के लिए नई स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर (SOP) जारी की गई। चेकिंग का समय गोपनीय रखने, दो-तीन सदस्यीय टीम में कार्रवाई करने तथा सुरक्षा मानकों का पालन करने के निर्देश दिए गए।
- थानों में रोजनामचा, रजिस्टर-7, परवाना फाइल, ए-टू-ज़ेड अल्फाबेटिकल रजिस्टर सहित सभी अभिलेखों का व्यवस्थित संधारण सुनिश्चित करने और बीट पुलिसिंग को मजबूत करने के लिए ए, बी एवं सी नोटबुक व्यवस्था पुनः लागू करने पर जोर दिया गया।
- ‘एक गुंडा-एक जवान’ नीति के तहत प्रत्येक निगरानीशुदा बदमाश की जिम्मेदारी एक पुलिसकर्मी को सौंपी जाएगी। जमानत पर छूटने के बाद दोबारा अपराध करने वालों के विरुद्ध बीएनएसएस की धारा 480 के तहत तत्काल जमानत निरस्तीकरण की कार्रवाई करने के निर्देश दिए गए।
- आवश्यकतानुसार धारा 110 बीएनएसएस, बाउंड ओवर, जिला बदर, PIT NDPS सहित अन्य वैधानिक प्रावधानों का उपयोग करने तथा Natgrid और CDR के माध्यम से फरार आरोपियों की निगरानी करने को कहा गया।
- आईजी ने स्पष्ट किया कि कार्रवाई पूरी तरह कानून और मानवाधिकारों के अनुरूप होगी। पुट्टस्वामी निर्णय तथा सुप्रीम कोर्ट के अमानतुल्लाह खान बनाम दिल्ली पुलिस (2024) फैसले का पालन करते हुए विमुक्त जनजातियों, पिछड़े वर्गों एवं नाबालिगों के विरुद्ध मनमानी कार्रवाई नहीं की जाएगी।
- ग्राम अपराध नोटबुक (VCNB) को अद्यतन रखने, कोटवारों की नियमित हाजिरी, मुसाफिर रजिस्टर संधारित करने तथा अंतरराज्यीय एवं अंतरजिला अपराधियों की जानकारी Cri-MAC प्लेटफॉर्म के माध्यम से साझा करने के निर्देश भी दिए गए।
- वर्षों से अपराध छोड़कर सामान्य जीवन व्यतीत कर रहे व्यक्तियों को निगरानी सूची से हटाने की प्रक्रिया अपनाई जाएगी, ताकि पुलिस का पूरा ध्यान केवल सक्रिय अपराधियों पर केंद्रित रहे।
- राष्ट्रीय पर्वों और प्रमुख त्योहारों से पहले सभी थानों में गुंडा एवं निगरानी बदमाशों की परेड और आवश्यक काउंसलिंग आयोजित करने के भी निर्देश दिए गए।
कार्यशाला के समापन पर आईजी राम गोपाल गर्ग ने सभी जिला पुलिस अधीक्षकों को इन निर्देशों की स्वयं मॉनिटरिंग कर उनका अक्षरशः पालन सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि प्रिवेंटिव पुलिसिंग की सफलता पुलिस, कोटवार, पुलिस मित्रों और आम जनता के बेहतर समन्वय पर निर्भर करती है तथा इसी के माध्यम से क्षेत्र को अपराधमुक्त बनाने का लक्ष्य हासिल किया जा सकता है।











