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“जनप्रतिनिधियों का अपमान बर्दाश्त नहीं” : जिला पंचायत अध्यक्ष समेत सदस्यों ने CEO के खिलाफ खोला मोर्चा, 5 प्रतिशत कमीशन और अभद्रता के लगाए गंभीर आरोप

जिला पंचायत गेट पर धरना-नारेबाजी, एक माह में कार्रवाई नहीं होने पर सदन में ताला लगाने की चेतावनी

छत्तीसगढ़/कोरबा :-  जिला पंचायत में उस समय हड़कंप की स्थिति निर्मित हो गई जब जिला पंचायत अध्यक्ष पवन सिंह, सहित जिला पंचायत सदस्यों ने जिला पंचायत CEO दिनेश नाग के खिलाफ खुला मोर्चा खोल दिया। आक्रोशित जनप्रतिनिधियों ने जिला पंचायत कार्यालय के मुख्य गेट के सामने धरना देते हुए जमकर नारेबाजी की और जिला CEO पर 5 प्रतिशत कमीशन मांगने, महिला जनप्रतिनिधियों से अभद्र व्यवहार करने तथा मनमानी कार्यशैली अपनाने जैसे गंभीर आरोप लगाए।

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धरने के दौरान जिला पंचायत अध्यक्ष पवन सिंह ने कहा कि जिला पंचायत CEO की कार्यप्रणाली से सभी जनप्रतिनिधि परेशान हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि चुने हुए प्रतिनिधियों की लगातार अनदेखी की जा रही है और अधिकारियों की तानाशाही हावी हो गई है। अध्यक्ष ने स्पष्ट चेतावनी देते हुए कहा कि यदि एक माह के भीतर जिला CEO के खिलाफ कार्रवाई नहीं हुई तो जिला पंचायत के सभी सदस्य सदन की कार्यवाही का बहिष्कार करेंगे और जरूरत पड़ने पर सदन में ताला लगाने की कार्रवाई भी की जाएगी।

जिला पंचायत सदस्यों ने आरोप लगाया कि CEO दिनेश नाग महिला जनप्रतिनिधियों से भी अभद्र भाषा में बात करते हैं और उनकी बातों को नजरअंदाज करते हैं। सदस्यों का कहना था कि विकास कार्यों को लेकर कई बार चर्चा करने के बावजूद उनकी समस्याओं और सुझावों को गंभीरता से नहीं लिया जाता।

जिला पंचायत अध्यक्ष ने यह भी कहा कि मै जिला खनिज न्यास निधि (DMF) शाखा का सदस्य हूं, लेकिन जिला CEO की कार्यप्रणाली से नाराज होकर आज होने वाली जिला खनिज न्यास की (DMF) की बैठक का बहिष्कार की घोषणा करता हूं। और बैठक में शामिल नहीं हुए उन्होंने कहा कि जब जनप्रतिनिधियों का सम्मान ही सुरक्षित नहीं है तो ऐसी बैठकों में शामिल होने का कोई औचित्य नहीं रह जाता।

बताया जा रहा है कि जिला CEO दिनेश नाग के खिलाफ असंतोष लंबे समय से पनप रहा था। पूर्व में भी कई जनप्रतिनिधि उनके खिलाफ आंदोलन की तैयारी कर चुके थे, लेकिन अपनी ही सरकार होने और वरिष्ठ नेताओं के हस्तक्षेप के बाद मामला शांत करा दिया गया था। इसके बावजूद जनप्रतिनिधियों का आरोप है कि CEO की कार्यशैली में कोई बदलाव नहीं आया और लगातार जनप्रतिनिधियों का अपमान किया जा रहा है।

धरने में शामिल सदस्यों ने कहा कि उन्होंने कई जिला पंचायत CEO देखे हैं, लेकिन इस प्रकार का व्यवहार पहली बार देखने को मिल रहा है। उनका आरोप है कि जिला CEO पूरी तरह अफसरशाही के रवैये में काम कर रहे हैं और जनप्रतिनिधियों की उपेक्षा कर अपनी मनमर्जी से निर्णय ले रहे हैं। अब जनप्रतिनिधियों ने आर-पार की लड़ाई का संकेत देते हुए प्रशासन और शासन से तत्काल हस्तक्षेप की मांग की है।

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