प्रो. भागवत प्रसाद दुबे के नेतृत्व में पारित हुए तीन ऐतिहासिक प्रस्ताव
छत्तीसगढ़/कोरबा :- राष्ट्रीय कॉलरी वर्कर्स फेडरेशन (आरसीडब्ल्यूएफ) के वरिष्ठ नेता प्रो. भागवत प्रसाद दुबे के आह्वान पर शुक्रवार 12 जून को कुसमुंडा स्थित महतारी अंगना (कबीर चौक) में आयोजित ठेका मजदूर महासभा में कोयला खदानों से जुड़े बड़ी संख्या में श्रमिकों ने हिस्सा लेकर अपने अधिकारों की लड़ाई को और तेज करने का संकल्प लिया। महासभा में तीन महत्वपूर्ण प्रस्ताव सर्वसम्मति से पारित किए गए तथा “कुसमुंडा घोषणा-पत्र” जारी कर स्थायी रोजगार और समान कार्य के लिए समान वेतन की मांग को बुलंद किया गया।
महासभा में प्रो. भागवत प्रसाद दुबे, मोहम्मद नासिर खान, भावेन्द्र तिवारी, यूबीकेकेएस संगठन के अध्यक्ष सपुरन कुलदीप, सीकेएस (गैर राजनीतिक संगठन) के अतुल दास महंत, उमा गोपाल, गोंडवाना पार्टी के गणेश सिंह ऊईके तथा समाजसेवी नेत्री अनुसुईया राठौर सहित कई श्रमिक नेता मंच पर उपस्थित रहे।
कोयला उद्योग की रीढ़ हैं ठेका श्रमिक
वक्ताओं ने कहा कि ड्रिलिंग, ब्लास्टिंग, डम्पर संचालन, रूफ बोल्टिंग और कोयला उत्खनन जैसे कोर कार्यों में कार्यरत ठेका मजदूर ही कोयला उद्योग की वास्तविक ताकत हैं। बावजूद इसके उन्हें स्थायी कर्मचारियों के समान सुविधाएं और अधिकार प्राप्त नहीं हो पा रहे हैं। नेताओं ने श्रमिकों से संगठित होकर संघर्ष तेज करने का आह्वान किया।
महासभा में पारित हुए तीन महत्वपूर्ण प्रस्ताव
महासभा में ओएसएचडब्ल्यूसी कोड-2020 की धारा 57 को लागू करते हुए कोर गतिविधियों में ठेका प्रथा समाप्त करने तथा वर्षों से कार्यरत श्रमिकों को चरणबद्ध तरीके से एसईसीएल का नियमित कर्मचारी बनाने की मांग उठाई गई।
इसके अलावा कॉन्ट्रैक्ट लेबर एक्ट-1970 के नियम 25(2)(v)(a) के तहत समान कार्य के लिए समान वेतन और ठेका प्रथा समाप्त करने से जुड़े प्रावधानों को नए श्रम कानूनों में शामिल करने हेतु केंद्र सरकार से संशोधन की मांग की गई।
साथ ही नेशनल कोल वेज एग्रीमेंट (एनसीडब्ल्यूए)-IV की कंडिका 11.5.1 का उल्लेख करते हुए एसईसीएल से स्थायी प्रकृति के कार्यों में लगे श्रमिकों को ऑन-रोल करने की मांग की गई।
जारी हुआ ‘कुसमुंडा घोषणा-पत्र’
महासभा में जारी घोषणा-पत्र में कहा गया कि प्रत्येक ठेका श्रमिक को नियुक्ति पत्र, वेतन पर्ची, रोजगार कार्ड, सामाजिक सुरक्षा, आवास तथा चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराई जानी चाहिए। “स्थायी कार्य के लिए स्थायी रोजगार” और “समान कार्य, समान वेतन, समान सम्मान” के सिद्धांत को आंदोलन का आधार बनाया गया।
सीएमडी मुख्यालय के घेराव का ऐलान
आरसीडब्ल्यूएफ के वरिष्ठ नेता प्रो. भागवत प्रसाद दुबे ने घोषणा की कि जून से अगस्त 2026 तक विभिन्न खदानों में कार्यरत ठेका मजदूरों का विस्तृत आंकड़ा संग्रहित किया जाएगा। इसके बाद श्रमिकों की मांगों को लेकर बिलासपुर स्थित एसईसीएल सीएमडी मुख्यालय का विशाल घेराव कर मांग-पत्र सौंपा जाएगा।
स्थानीय कार्यकर्ताओं की भूमिका की सराहना
कार्यक्रम को सफल बनाने में अशोक पटेल, गोविंदा सारथी, विनोद सारथी, संतोष चौहान, ललित महिलांगे, प्रकाश जायसवाल, महावीर यादव तथा छाल के अजय सिंह ठाकुर सहित अन्य कार्यकर्ताओं की सक्रिय भूमिका की मंच से सराहना की गई।
कार्यक्रम के अंत में यूबीकेकेएस संगठन के अध्यक्ष सपुरन कुलदीप ने सभी अतिथियों एवं श्रमिकों का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि मजदूरों के अधिकारों की यह लड़ाई अभी शुरुआत है और आने वाले समय में इसे और व्यापक रूप दिया जाएगा।











