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वन विभाग पर मंत्री की सख्ती से मचा हड़कंप, कोरबा में लकड़ी तस्करी और वनभूमि अतिक्रमण की शिकायतों पर केदार कश्यप ने मांगी रिपोर्ट, बोले—संरक्षण देने वालों पर होगी कार्रवाई

छत्तीसगढ़/कोरबा :-  कोरबा वन मंडल में लकड़ी तस्करी, अवैध कटाई और वनभूमि पर अतिक्रमण की शिकायतों ने अब शासन स्तर पर गंभीर रूप ले लिया है। कोरबा दौरे पर पहुंचे वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री केदार कश्यप के सामने जब लंबे समय से लंबित शिकायतों और कार्रवाई में कथित देरी का मुद्दा उठा तो उन्होंने वन विभाग के अधिकारियों से तत्काल जवाब-तलब किया। अधिकारियों के जवाब से असंतुष्ट मंत्री ने पूरे मामले की गंभीरता से जांच कराने और PCCF से रिपोर्ट प्रस्तुत करने के निर्देश दिए।

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मंत्री ने दो टूक कहा कि जंगल और वनभूमि से जुड़ी अवैध गतिविधियों को किसी भी स्तर पर संरक्षण बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। जांच में शिकायतें सही पाई गईं तो जिम्मेदारी तय कर संबंधित अधिकारियों-कर्मचारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। मंत्री के इस रुख के बाद कोरबा वन मंडल में अब विभागीय कार्रवाई को लेकर हलचल तेज हो गई है।

साल की लकड़ी से लेकर अभनपुर मिल तक पहुंचा मामला

मंत्री के सामने सीएसईबी कॉलोनी से काटी गई साल की लकड़ी का मामला भी प्रमुखता से उठा। आरोप है कि लकड़ी को वन विभाग के डिपो में जमा कराने के बजाय रायपुर के अभनपुर स्थित एक मिल में भेज दिया गया।

सीएसईबी विभाग के एक अधिकारी की शिकायत के बाद मामला सामने आया। इसके बाद डीएफओ के हस्तक्षेप से जांच शुरू हुई और पुलिस तथा वन विभाग की संयुक्त टीम ने अभनपुर स्थित मिल में कार्रवाई करते हुए करीब 9 लाख रुपये कीमत की लकड़ी जब्त की।

वहीं, इस मामले में वन विभाग की ओर से सिविल लाइन थाने में करीब 2 लाख रुपये की लकड़ी चोरी की रिपोर्ट दर्ज कराए जाने की बात सामने आई है। प्रकरण में कुछ वन अधिकारियों की भूमिका को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। आरोप है कि लकड़ी की कटाई और परिवहन की जानकारी होने के बावजूद समय रहते प्रभावी कार्रवाई नहीं की गई।

कुदमुरा रेंज की भूमिका भी जांच के दायरे में

मामले से जुड़े आरोपों में कुदमुरा रेंज के नवपदस्थ रेंजर का नाम भी सामने आया है। आरोप लगाया जा रहा है कि बड़ी मात्रा में काटी गई लकड़ी को बाहर भेजने के लिए लकड़ी कटाई की जिम्मेदारी संभालने वाले रेंजर को एक लकड़ी तस्कर का नाम बताया गया था।

हालांकि इन आरोपों की पुष्टि जांच के बाद ही हो सकेगी। यही वजह है कि अब मंत्री के निर्देश के बाद होने वाली जांच महत्वपूर्ण मानी जा रही है। निष्पक्ष जांच हुई तो लकड़ी की कटाई, परिवहन और उसे मिल तक पहुंचाने की पूरी कड़ी सामने आ सकती है।

बालको रेंज पर भी मंत्री की नजर

कोरबा के बालको रेंज में वनभूमि अतिक्रमण, अवैध पेड़ कटाई और वन्यजीवों के शिकार जैसी शिकायतें भी लंबे समय से चर्चा में हैं। स्थानीय जनप्रतिनिधियों की शिकायतों के बाद उद्योग मंत्री लखनलाल देवांगन द्वारा भी वन मंत्री को पत्र लिखकर मामले में जांच और कार्रवाई की मांग किए जाने की बात सामने आई है।

अब सवाल यह है कि लंबे समय से लंबित इन शिकायतों पर कार्रवाई क्यों नहीं हुई और यदि शिकायतों में तथ्य हैं तो जिम्मेदारी किसकी है? वन मंत्री के सख्त रुख के बाद यह मामला भी जांच के दायरे में आ सकता है।

अब रिपोर्ट खोलेगी कई राज!

मंत्री केदार कश्यप के निर्देश के बाद अब असली परीक्षा विभागीय जांच की है। क्या जांच सिर्फ लकड़ी जब्ती और चोरी की रिपोर्ट तक सीमित रहेगी या फिर लकड़ी कटाई से लेकर परिवहन और कथित संरक्षण देने वालों तक जिम्मेदारी तय होगी, इस पर सबकी नजर है।

PCCF को भेजी जाने वाली रिपोर्ट में यदि जिम्मेदारी तय होती है तो कोरबा वन मंडल में यह बड़ी विभागीय कार्रवाई का रास्ता खोल सकती है। फिलहाल मंत्री की सख्ती ने उन शिकायतों को फिर से केंद्र में ला दिया है, जिन पर लंबे समय से कार्रवाई का इंतजार किया जा रहा था।

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