छत्तीसगढ़/कोरबा :- आयुर्वेद के माध्यम से आम जनमानस की निरंतर सेवा एवं आयुर्वेद क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान के लिए कोरबा के सुप्रसिद्ध आयुर्वेद चिकित्सक एवं श्री शिव औषधालय के संस्थापक नाड़ीवैद्य पंडित शिव कुमार शर्मा को जमना फार्मास्यूटिकल्स भोपाल द्वारा सम्मानित किया गया। यह सम्मान बिलासपुर के होटल दी आनंदा इम्पीरियल में आयोजित वितरक, वैद्य-चिकित्सक सम्मेलन के गरिमामय समारोह में प्रदान किया गया। 
समारोह में जमना फार्मास्यूटिकल्स भोपाल के डायरेक्टर वैद्य सुषेण माहेश्वरी, मार्केटिंग मैनेजर राजेश गुप्ता, डिप्टी मार्केटिंग मैनेजर अनिल ढोके एवं एसएसओ नेत्र नंदन साहू ने पंडित शिव कुमार शर्मा को शाल ओढ़ाकर, श्रीफल, स्मृति चिन्ह एवं सम्मान पत्र भेंट कर सम्मानित किया। 
कार्यक्रम का शुभारंभ भगवान धनवंतरी के तैलचित्र पर माल्यार्पण एवं दीप प्रज्वलन के साथ हुआ। इस अवसर पर वैद्य सुषेण माहेश्वरी ने कहा कि संस्थान का मुख्य उद्देश्य आयुर्वेद का प्रचार-प्रसार करना तथा आमजन तक गुणवत्ता युक्त शुद्ध औषधियां उपलब्ध कराना है। उन्होंने कहा कि गुणवत्ता ही संस्थान की सर्वोच्च प्राथमिकता है।
स्थानीय वितरक श्रीराम मेडिकल एजेंसी बिलासपुर के संचालक नरेंद्र शर्मा ने आयुर्वेद के महत्व और उसके प्रचार-प्रसार में वितरकों एवं चिकित्सकों की भूमिका पर प्रकाश डालते हुए अपने अनुभव साझा किए।
सम्मेलन में छत्तीसगढ़ में आयुर्वेद चिकित्सा के क्षेत्र में किए जा रहे सेवाकार्यों और समर्पण की सराहना करते हुए पंडित शिव कुमार शर्मा के योगदान को विशेष रूप से रेखांकित किया गया। आयोजकों ने कहा कि उन्होंने अपने संस्थान श्री शिव औषधालय के माध्यम से न केवल कोरबा बल्कि संपूर्ण छत्तीसगढ़ में आयुर्वेद के प्रचार-प्रसार और जनसेवा का महत्वपूर्ण कार्य किया है।
इस अवसर पर एएसएम छत्तीसगढ़ संतोष स्वर्णकार, रायपुर मैनेजर खेमन साहू, बिलासपुर के मनोज साहू, राजनांदगांव के प्रेम नारायण चौबे, कोरबा के नेत्र नंदन साहू, रायपुर डिपो स्टोर प्रभारी रमेश कुमार टांडी सहित प्रदेशभर के वितरक, वैद्य एवं चिकित्सक उपस्थित रहे। कार्यक्रम में 150 से अधिक प्रतिष्ठित वैद्य, चिकित्सक एवं वितरकों ने सहभागिता निभाई।
कार्यक्रम का संचालन डिप्टी मार्केटिंग मैनेजर अनिल ढोके ने किया, जबकि आभार प्रदर्शन एसएसओ नेत्र नंदन साहू ने छत्तीसगढ़ी भाषा में कर सभी का मन मोह लिया। अंत में “सर्वे भवन्तु सुखिनः, सर्वे सन्तु निरामयाः” की सामूहिक प्रार्थना के साथ सम्मेलन का समापन हुआ।













