तंबाखू, शराब एवं पित्तवर्धक आहार हेपेटाइटिस का मुख्य कारण-डॉ.नागेंद्र शर्मा
हेपेटाइटिस से बचाव हेतु नशे से रहें दूर एवं जीवनशैली करें ठीक- डॉ.खुर्शीद खान
हेपेटाइटिस से बचाव हेतु नियमित करें योग, प्राणायाम-डॉ.सुरेंद्र मिश्रा
हेपेटाइटिस से बचाव हेतु सात्विक आहार का करें सेवन-डॉ.सोमेश कुशवाहा
छत्तीसगढ़/कोरबा :- विश्व हेपेटाइटिस दिवस के अवसर पर 28 जुलाई को लायंस क्लब कोरबा एवरेस्ट एवं आयुष मेडिकल एसोसिएशन के संयुक्त तत्वावधान में पतंजलि चिकित्सालय, श्री शिव औषधालय, महानदी कॉम्प्लेक्स, निहारिका रोड, कोरबा में निःशुल्क आयुर्वेद एवं योग चिकित्सा परामर्श शिविर आयोजित किया गया। शिविर में बड़ी संख्या में लोगों ने भाग लेकर विशेषज्ञ चिकित्सकों से परामर्श प्राप्त किया तथा हेपेटाइटिस (यकृत शोथ) से बचाव और उपचार की जानकारी हासिल की।
शिविर में छत्तीसगढ़ के वरिष्ठ आयुर्वेद विशेषज्ञ नाड़ीवैद्य डॉ. नागेंद्र नारायण शर्मा, डॉ. खुर्शीद खान (धरमजयगढ़), डॉ. सोमेश कुशवाहा (पेंड्रा) और डॉ. सुरेंद्र मिश्रा (पंतोरा) ने अपनी चिकित्सकीय सेवाएं प्रदान कीं। इस दौरान लिवर के लिए उपयोगी यकृत बूस्टर क्वाथ का निःशुल्क वितरण किया गया तथा यकृत स्वास्थ्य संबंधी पुस्तिकाएं भी लोगों को प्रदान की गईं।
डॉ. नागेंद्र नारायण शर्मा ने बताया कि हेपेटाइटिस यकृत (लिवर) में सूजन और संक्रमण पैदा करने वाला गंभीर रोग है। उन्होंने कहा कि मोटापा, मधुमेह, उच्च रक्तचाप, तंबाकू एवं शराब का सेवन, अत्यधिक भोजन तथा पित्तवर्धक आहार इसके प्रमुख कारणों में शामिल हैं। उन्होंने त्वचा और आंखों का पीला पड़ना, गहरे रंग का मूत्र, अत्यधिक थकान, भूख न लगना, उल्टी, पेट दर्द और सूजन जैसे लक्षण दिखाई देने पर तत्काल चिकित्सकीय जांच कराने की सलाह दी।
डॉ. खुर्शीद खान ने कहा कि हेपेटाइटिस से बचाव के लिए नशे से दूर रहना और संतुलित जीवनशैली अपनाना आवश्यक है। वहीं डॉ. सोमेश कुशवाहा ने सात्विक एवं संतुलित आहार को स्वस्थ लिवर की कुंजी बताया। डॉ. सुरेंद्र मिश्रा ने नियमित योग एवं प्राणायाम को यकृत स्वास्थ्य के लिए बेहद लाभकारी बताते हुए कपालभाति, अनुलोम-विलोम और भुजंगासन जैसे योगाभ्यास नियमित करने की सलाह दी।
शिविर में डॉ. प्रवीण श्रीवास, डॉ. विवेक साहू, श्री शिव औषधालय की संचालिका श्रीमती प्रतिभा शर्मा, नेत्रनंदन साहू, अश्वनी बुनकर, कमल धारिया, देवबली कुंभकार, सिद्धराम शाहनी, अनुराग, भानु प्रताप, पंचकर्म तकनीशियन पिंकी बरेठ तथा शैल कुमारी निषाद सहित अनेक लोगों ने सक्रिय सहयोग प्रदान किया।












