‘गांव-गांव, गली-गली बिक रही शराब, गांजा और नशे की गोलियां’—जिला अध्यक्ष जैनेंद्र कुर्रे के गंभीर आरोप; मंत्री लखन लाल देवांगन से भी मांगा जवाब
छत्तीसगढ़/कोरबा :- सात साल की मासूम बच्ची की संदिग्ध मौत ने कोरबा को झकझोर दिया है। जिस उम्र में बच्चे त्योहारों की खुशियों में डूबे रहते हैं, उस उम्र की एक बच्ची की जिंदगी का इस तरह अंत हो जाना पूरे समाज को कई असहज सवालों के सामने खड़ा करता है। आखिर बच्चों की सुरक्षा की जिम्मेदारी किसकी है? अपराधियों में कानून का भय क्यों नहीं दिखाई दे रहा? और यदि गलियों से लेकर गांवों तक नशे का कारोबार खुलेआम चलने के आरोप लग रहे हैं, तो उसे रोकने की जिम्मेदारी निभाने वाले तंत्र की जवाबदेही कौन तय करेगा?
रजगामार क्षेत्र में सात वर्षीय बालिका की संदिग्ध मौत और जिले में लगातार सामने आ रही आपराधिक घटनाओं को लेकर जोहार छत्तीसगढ़ पार्टी और छत्तीसगढ़िया क्रांति सेना ने कलेक्टर एवं पुलिस अधीक्षक को ज्ञापन सौंपकर शासन-प्रशासन को कटघरे में खड़ा किया है। संगठनों ने बच्ची के साथ अनाचार और हत्या की आशंका जताते हुए दोषियों को फांसी की सजा दिलाने की मांग की। साथ ही हत्या, चाकूबाजी और कथित अवैध नशे के कारोबार पर प्रभावी नियंत्रण नहीं होने का आरोप लगाते हुए कोरबा के विधायक एवं प्रदेश के मंत्री लखन लाल देवांगन की भूमिका पर भी सवाल उठाए हैं।
मासूम की मौत ने झकझोरा, दोषियों को कठोरतम सजा देने की मांग
रजगामार क्षेत्र में 19 अक्टूबर को घर के पास से लापता हुई लगभग सात वर्षीय बच्ची का शव 22 अक्टूबर को बरामद हुआ था। तीन दिनों तक बच्ची की तलाश के बाद सामने आई इस घटना ने परिजनों के दुख को असहनीय बना दिया और क्षेत्र में आक्रोश फैल गया। एक मासूम की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत ने बच्चों की सुरक्षा और कानून-व्यवस्था को लेकर गंभीर चिंता पैदा कर दी है।
ज्ञापन में संगठनों ने बच्ची के साथ अनाचार के बाद हत्या किए जाने की आशंका जताते हुए मामले की निष्पक्ष एवं उच्चस्तरीय जांच की मांग की। उन्होंने कहा कि जांच वैज्ञानिक साक्ष्यों, पोस्टमार्टम रिपोर्ट और अन्य तथ्यों के आधार पर होनी चाहिए, ताकि घटना की सच्चाई सामने आ सके। यदि अनाचार और हत्या की पुष्टि होती है, तो दोषियों को फांसी की सजा दिलाने के लिए कठोर कानूनी कार्रवाई की जाए। संगठनों ने पीड़ित परिवार को उचित मुआवजा और सुरक्षा उपलब्ध कराने की मांग भी की।
गांव-गांव और गली-गली नशे के कारोबार का आरोप, पुलिस की भूमिका पर उठाए सवाल
जोहार छत्तीसगढ़ पार्टी के जिला अध्यक्ष जैनेंद्र कुर्रे ने जिले में कथित अवैध शराब, गांजा और नशे की गोलियों की बिक्री को लेकर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने दावा किया कि गांव-गांव और गली-गली में नशीले पदार्थों की बिक्री हो रही है और इस अवैध कारोबार पर प्रभावी रोक नहीं लग पा रही है।
कुर्रे ने आरोप लगाया कि अवैध कारोबार करने वालों से पुलिस स्तर पर कथित वसूली की जाती है और इस रकम का हिस्सा विधायक-मंत्रियों तक पहुंचता है। उन्होंने अपने आरोपों को दृढ़ता से दोहराते हुए प्रशासन को गांवों और गलियों में सर्वे कराने की चुनौती दी। हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि और कथित लेन-देन के समर्थन में साक्ष्य सार्वजनिक होना अभी बाकी है। ऐसे गंभीर आरोपों की निष्पक्ष जांच ही उनकी वास्तविकता स्पष्ट कर सकती है।
जोहार छत्तीसगढ़ पार्टी के प्रदेश संगठन मंत्री सुरेंद्र राठौर ने भी जिले की कानून-व्यवस्था और गली-गली में कथित तौर पर चल रहे नशे के कारोबार को लेकर सवाल खड़े किए। उन्होंने इन गतिविधियों पर प्रभावी रोक लगाने और जिम्मेदार तंत्र की जवाबदेही तय करने की जरूरत पर जोर दिया। वहीं, छत्तीसगढ़िया क्रांति सेना के कोरबा जिला अध्यक्ष सुरजीत सोनी ने भी नशे के बढ़ते कारोबार और कानून-व्यवस्था की स्थिति पर सवाल उठाते हुए प्रशासन से ठोस कार्रवाई की मांग की।
तीनों पदाधिकारियों की ओर से उठाए गए सवालों ने अवैध नशे के कारोबार पर निगरानी, पुलिस की कार्यप्रणाली और प्रशासनिक जवाबदेही को चर्चा के केंद्र में ला दिया है। इन आरोपों की निष्पक्ष जांच और जमीनी स्तर पर कार्रवाई से ही स्थिति की वास्तविकता स्पष्ट हो सकेगी।
दशहरा की रात युवक की हत्या ने कानून-व्यवस्था पर उठाए सवाल
संगठनों ने 20 अक्टूबर को मानिकपुर चौकी क्षेत्र के मुड़ापार दशहरा मैदान में राहुल उर्फ गोल्डन की हत्या का मामला भी उठाया। आरोप है कि दशहरा उत्सव के दौरान डीजे पर नाचने को लेकर हुए विवाद में युवक पर चाकू से हमला किया गया, जिससे उसकी मौत हो गई।
त्योहारों और सार्वजनिक आयोजनों के बीच इस तरह की हिंसक घटनाएं आम लोगों की सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ाती हैं। संगठनों ने सवाल उठाया कि सार्वजनिक कार्यक्रमों में सुरक्षा व्यवस्था कितनी प्रभावी है और चाकूबाजी जैसी घटनाओं को रोकने के लिए पुलिस की ओर से क्या ठोस कदम उठाए जा रहे हैं। उनका कहना है कि अपराध होने के बाद कार्रवाई के साथ-साथ ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए भी प्रभावी व्यवस्था जरूरी है।
मंत्री लखन लाल देवांगन पर भी उठाए सवाल
ज्ञापन के दौरान जिले की राजनीतिक और प्रशासनिक व्यवस्था को लेकर भी सवाल उठाए गए। संगठनों ने मंत्री लखन लाल देवांगन की भूमिका पर सवाल खड़े करते हुए कहा कि जब जिले के जनप्रतिनिधि सरकार में मंत्री पद पर हैं, तब भी जिले में बढ़ते अपराध और अवैध नशे के कारोबार पर प्रभावी नियंत्रण क्यों नहीं दिखाई दे रहा है?
इसी क्रम में जोहार छत्तीसगढ़ पार्टी के जिला अध्यक्ष जैनेंद्र कुर्रे ने पूर्व राजस्व मंत्री जयसिंह अग्रवाल को भी निशाने पर लिया। कुर्रे ने कहा कि जिस तरह जनता ने जयसिंह अग्रवाल को नकार दिया था, उसी तरह यदि कोरबा में बिगड़ती कानून-व्यवस्था को ठीक नहीं कराया गया, तो जनता मंत्री लखन लाल देवांगन को भी जवाब देगी। उन्होंने मंत्री से जिले में अपराध और अवैध नशे के कारोबार पर प्रभावी अंकुश लगाने तथा कानून-व्यवस्था सुधारने की मांग की।
संगठनों ने हत्या, चाकूबाजी, चोरी, लूट और अवैध नशे के कारोबार पर अंकुश लगाने में कथित नाकामी को लेकर प्रशासन से जवाबदेही तय करने की मांग की। उनका कहना है कि केवल कार्रवाई के आश्वासन से काम नहीं चलेगा, बल्कि धरातल पर कानून-व्यवस्था में सुधार दिखाई देना चाहिए।
प्रशासन से ठोस कार्रवाई की मांग
जोहार छत्तीसगढ़ पार्टी और छत्तीसगढ़िया क्रांति सेना ने मांग की कि मासूम बालिका की मौत के मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषियों को कठोरतम सजा दिलाई जाए। जिले में अवैध नशे के कारोबार पर प्रभावी कार्रवाई की जाए और लगातार बढ़ रही आपराधिक घटनाओं पर रोक लगाने के लिए ठोस रणनीति बनाई जाए। इसके साथ ही, यदि किसी अधिकारी की लापरवाही सामने आती है, तो उसके खिलाफ भी कार्रवाई की जाए।
ज्ञापन सौंपने के दौरान जोहार छत्तीसगढ़ पार्टी के प्रदेश संगठन मंत्री सुरेंद्र राठौर, जिला अध्यक्ष जैनेंद्र कुर्रे और छत्तीसगढ़िया क्रांति सेना के कोरबा जिला अध्यक्ष सुरजीत सोनी सहित दोनों संगठनों के पदाधिकारी एवं कार्यकर्ता मौजूद रहे।
संगठनों ने प्रशासन से इन मामलों को गंभीरता से लेते हुए त्वरित कार्रवाई की मांग की। मासूम की संदिग्ध मौत, जिले में बढ़ते अपराध और अवैध नशे के कारोबार को लेकर उठे सवालों के बीच अब निगाहें प्रशासन के कदमों पर हैं। सवाल सिर्फ एक घटना का नहीं, बल्कि कोरबा में बच्चों और आम नागरिकों की सुरक्षा तथा कानून-व्यवस्था पर जनता के भरोसे का भी है।












