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राशन दुकान जाने निकली मासूम फिर घर नहीं लौटी, चौथे दिन नदी किनारे झाड़ियों में मिली लाश… आखिर उस नन्ही जान के साथ क्या हुआ?

रजगामार में 7 वर्षीय नाबालिग की रहस्यमयी मौत से सनसनी, करीम पोल्ट्री फार्म से करीब 400 मीटर दूर नदी किनारे झाड़ियों में मिला शव; हर आंख नम, हर जुबां पर एक ही सवाल—आखिर उस मासूम के साथ क्या हुआ?

छत्तीसगढ़/कोरबा :-  जिस उम्र में बच्चों की दुनिया खिलौनों, हंसी-ठिठोली और अपनों की गोद तक सिमटी होती है, उस उम्र में सात साल की मासूम की जिंदगी का इस तरह थम जाना हर किसी को झकझोर रहा है। घर के पास राशन दुकान जाने की बात कहकर निकली बच्ची फिर लौटकर नहीं आई। परिवार की उम्मीदें हर गुजरते पल के साथ उसके सुरक्षित लौटने का इंतजार करती रहीं, लेकिन चौथे दिन उसकी मौत की खबर ने उन उम्मीदों को गहरे दुख में बदल दिया। रजगामार में करीम पोल्ट्री फार्म से करीब 400 मीटर दूर नदी किनारे झाड़ियों में बच्ची का शव मिला है। उसकी मौत कैसे और किन परिस्थितियों में हुई, यह अब भी रहस्य बना हुआ है।

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नाबालिग अपने पिता और भाई-बहनों के साथ रजगामार बस्ती में रहती थी। परिवार मूल रूप से सक्ती जिले के ग्राम फगुरम का रहने वाला है। करीब चार महीने पहले बच्ची के पिता अपने चार बच्चों के साथ यहां आए थे। करीम पोल्ट्री फार्म में काम कर वे अपने परिवार का भरण-पोषण कर रहे थे। किसी ने नहीं सोचा था कि रोजमर्रा की जिंदगी के बीच अचानक ऐसा हादसा सामने आएगा, जो पूरे परिवार की दुनिया उजाड़ देगा।

दोपहर में निकली थी, फिर नहीं लौटी घर

परिजनों के मुताबिक, 19 अक्टूबर को दोपहर करीब डेढ़ बजे नाबालिग घर के पास राशन दुकान जाने की बात कहकर निकली थी। उस समय उसके पिता सो रहे थे। जब उनकी नींद खुली और बेटी घर पर नहीं मिली, तो उन्होंने आसपास तलाश शुरू की। गांव और आसपास के इलाकों में खोजबीन की गई, लेकिन मासूम का कहीं पता नहीं चला। आखिरकार पुलिस को मामले की सूचना दी गई।

बेटी के लापता होने के बाद परिवार पर क्या बीती होगी, इसका अंदाजा लगाना भी मुश्किल है। हर आहट पर उसके लौट आने की उम्मीद, हर रास्ते पर उसकी तलाश और हर गुजरते घंटे के साथ बढ़ती चिंता—परिजनों के लिए ये दिन किसी भयावह इंतजार से कम नहीं रहे होंगे। मगर जिस बेटी को वे सुरक्षित देखने की आस लगाए बैठे थे, चौथे दिन उसकी लाश मिलने की खबर सामने आई।

नदी तक पहुंचा डॉग स्क्वॉड, फिर भी नहीं सुलझा रहस्य

मामले की गंभीरता को देखते हुए बालको थाना प्रभारी निरीक्षक युवराज तिवारी और रजगामार चौकी प्रभारी पुलिस टीम के साथ मौके पर पहुंचे। पुलिस अधीक्षक सिद्धार्थ तिवारी, एएसपी लखन पटले, सीएसपी प्रतीक चतुर्वेदी और मुख्यालय डीएसपी प्रतिभा मरकाम ने भी गांव पहुंचकर जांच की। बच्ची की तलाश में डॉग स्क्वॉड की मदद ली गई। पुलिस डॉग बाघा पास की नदी तक पहुंचा, लेकिन इसके आगे बच्ची कहां गई, इसका सुराग नहीं मिल सका।

लगातार तलाश के बाद चौथे दिन करीम पोल्ट्री फार्म से करीब 400 मीटर दूर नदी किनारे झाड़ियों में नाबालिग का शव बरामद हुआ। शव मिलने के बाद मामले ने गंभीर और रहस्यमय मोड़ ले लिया है। अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि घर से निकलने के बाद मासूम कहां गई? इन दिनों उसके साथ क्या हुआ? उसकी मौत किन परिस्थितियों में हुई? फिलहाल इन सवालों के जवाब सामने नहीं आए हैं।

मासूम की मौत, कई सवाल और जांच से बंधी उम्मीदें

सात साल की बच्ची की मौत केवल एक परिवार का दुख नहीं, बल्कि पूरे समाज को भीतर तक झकझोर देने वाली घटना है। हालांकि, दुख और आशंकाओं के बीच किसी नतीजे पर पहुंचना जल्दबाजी होगी। यह स्पष्ट होना जरूरी है कि बच्ची की मौत कैसे हुई और घटना के पीछे की वास्तविक परिस्थितियां क्या थीं।

पुलिस अधीक्षक सिद्धार्थ तिवारी सहित पुलिस अधिकारी मौके पर मौजूद हैं और मामले की जांच की जा रही है। पोस्टमार्टम रिपोर्ट तथा पुलिस की जांच से ही मौत के कारणों का खुलासा हो सकेगा। फिलहाल रजगामार में एक ही सवाल गूंज रहा है—जो मासूम घर से राशन दुकान जाने की बात कहकर निकली थी, वह फिर कभी लौटकर क्यों नहीं आई? आखिर उस नन्ही जान के साथ क्या हुआ था? इन सवालों के जवाब मिलने का इंतजार है, ताकि मासूम की मौत से जुड़े रहस्य से पर्दा उठ सके और परिवार को सच्चाई का पता चल सके।

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