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कनकी पंचायत में भ्रष्टाचार की शिकायत और RTI की जानकारी रोकने का आरोप, मामला एसपी-कलेक्टर तक पहुंचा

सरपंच और पूर्व सरपंच के खिलाफ शासकीय मद में गड़बड़ी की शिकायत; आवेदक ने जान-माल की सुरक्षा की जताई आशंका, निष्पक्ष जांच की मांग

छत्तीसगढ़/कोरबा :-  जनपद पंचायत करतला अंतर्गत ग्राम पंचायत कनकी में पंचायत के आय-व्यय और विकास कार्यों की जानकारी मांगने का मामला अब गंभीर आरोपों के बीच पुलिस और जिला प्रशासन तक पहुंच गया है। ग्राम पंचायत के वर्तमान सरपंच और पूर्व सरपंच के खिलाफ शासकीय मद में कथित गड़बड़ी तथा विकास कार्यों में अनियमितता की शिकायत की गई है। वहीं, सूचना के अधिकार अधिनियम के तहत मांगी गई जानकारी उपलब्ध नहीं कराने का आरोप भी लगाया गया है। शिकायतकर्ता मोहम्मद इकबाल मेमन ने पहले कलेक्टर के जनदर्शन में जानकारी दिलाने की गुहार लगाई और अब 12 अक्टूबर 2026 को पुलिस अधीक्षक को आवेदन देकर मामले में कार्रवाई तथा अपनी सुरक्षा सुनिश्चित करने की मांग की है।

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आय-व्यय का हिसाब मांगने पर शुरू हुआ विवाद

शिकायत के अनुसार, मोहम्मद इकबाल मेमन ने 24 जून 2026 को ग्राम पंचायत कनकी के जन सूचना अधिकारी के समक्ष सूचना के अधिकार अधिनियम, 2005 की धारा 6(1) के तहत आवेदन प्रस्तुत किया था। आरोप है कि निर्धारित प्रक्रिया के बावजूद उन्हें मांगी गई जानकारी नहीं मिली। इसके बाद उन्होंने 20 जुलाई को प्रथम अपील प्रस्तुत की। शिकायतकर्ता का कहना है कि इस प्रक्रिया में भी उन्हें राहत नहीं मिली और आवेदन निरस्त कर दिया गया।

इसके बाद 22 अगस्त 2026 को उन्होंने फिर से आवेदन देकर ग्राम पंचायत के विभिन्न मदों में हुए आय-व्यय का विवरण मांगा। जानकारी नहीं मिलने पर 23 सितंबर को मुख्य कार्यपालन अधिकारी, जनपद पंचायत करतला के समक्ष प्रथम अपील की गई। अंततः 5 अक्टूबर 2026 को कलेक्टर कोरबा के जनदर्शन में शिकायत प्रस्तुत कर समय-सीमा के भीतर जानकारी उपलब्ध कराने की मांग की गई।

तीन वर्षों के आय-व्यय और सीसी रोड निर्माण का मांगा विवरण

आवेदक ने वर्ष 2024, 2025 और 2026 के मूलभूत मद, 14वें वित्त आयोग तथा 15वें वित्त आयोग से संबंधित आय-व्यय का विवरण मांगा है। इसके साथ ही ग्राम पंचायत कनकी के घनघस मोहल्ला से छेरका डबरी तक सीसी रोड निर्माण पर हुए खर्च की जानकारी भी मांगी गई है।

शिकायतकर्ता का कहना है कि इन अभिलेखों से पंचायत को प्राप्त सरकारी राशि और उसके उपयोग की वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकती है। उनका आरोप है कि जानकारी उपलब्ध नहीं कराए जाने से पंचायत के कार्यों में पारदर्शिता को लेकर संदेह पैदा हो रहा है।

एसपी को शिकायत, सरपंच और पूर्व सरपंच पर लगाए गंभीर आरोप

मामले में 12 अक्टूबर 2026 को पुलिस अधीक्षक कोरबा को दिए गए आवेदन में मोहम्मद इकबाल मेमन ने ग्राम पंचायत कनकी के वर्तमान सरपंच और पूर्व सरपंच के खिलाफ जांच की मांग की है। आवेदन में आरोप लगाया गया है कि शासकीय मद की राशि में कथित गड़बड़ी और विकास कार्यों में अनियमितता को लेकर शिकायत की गई है। शिकायतकर्ता ने यह भी उल्लेख किया है कि मामले में जिला प्रशासन के स्तर पर शिकायत और जांच की प्रक्रिया चल रही है।

आवेदन में शिकायतकर्ता ने आशंका जताई है कि उनकी शिकायतों और जनहित से जुड़े मुद्दों को उठाने के कारण उन्हें परेशान किया जा सकता है। उन्होंने पुलिस अधीक्षक से मामले की निष्पक्ष जांच कराने तथा किसी अप्रिय घटना की आशंका को देखते हुए आवश्यक सुरक्षा और कानूनी कार्रवाई सुनिश्चित करने का निवेदन किया है।

क्या पंचायत के आय-व्यय का ब्योरा सार्वजनिक होगा?

इस पूरे मामले में अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि ग्राम पंचायत कनकी में विभिन्न सरकारी मदों से प्राप्त राशि और विकास कार्यों पर हुए खर्च का विवरण आवेदक को कब तक उपलब्ध कराया जाएगा। सूचना का अधिकार नागरिकों को सरकारी कामकाज में पारदर्शिता सुनिश्चित करने का कानूनी माध्यम देता है। ऐसे में बार-बार आवेदन और अपील के बाद भी जानकारी नहीं मिलने का आरोप प्रशासनिक व्यवस्था के सामने सवाल खड़ा करता है।

हालांकि, सरपंच और पूर्व सरपंच के खिलाफ लगाए गए वित्तीय अनियमितता के आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि होना बाकी है। संबंधित जन सूचना अधिकारी, पंचायत सचिव, वर्तमान सरपंच और पूर्व सरपंच का पक्ष भी सामने आना महत्वपूर्ण है। पुलिस अधीक्षक को दिए गए आवेदन पर क्या कार्रवाई होती है और कलेक्टर जनदर्शन में की गई शिकायत के बाद सूचना उपलब्ध कराने के लिए क्या कदम उठाए जाते हैं, इस पर अब निगाहें टिकी हैं।

अब जांच और जवाबदेही जरूरी

ग्राम पंचायत ग्रामीण विकास की सबसे महत्वपूर्ण इकाई है। यहां होने वाले निर्माण कार्यों और सरकारी राशि के खर्च का हिसाब स्पष्ट होना चाहिए। यदि शिकायत में लगाए गए आरोप सही पाए जाते हैं, तो नियमानुसार जिम्मेदारी तय की जानी चाहिए। वहीं, यदि आरोपों में तथ्य नहीं मिलते हैं, तो जांच के जरिए स्थिति स्पष्ट होनी चाहिए। फिलहाल, शिकायतकर्ता की मांग है कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच हो, मांगी गई जानकारी उपलब्ध कराई जाए और उनकी सुरक्षा संबंधी आशंका पर भी उचित कदम उठाए जाएं।

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