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कलमीडुग्गु में संस्कार केंद्र का शुभारंभ, बच्चों में नैतिक मूल्यों के विकास की पहल

सरस्वती शिशु मंदिर प्रगति नगर की पहल, भारतीय संस्कृति और जीवन-मूल्यों से जोड़ने का रखा गया लक्ष्य

छत्तीसगढ़/कोरबा :-  भारतीय संस्कृति, नैतिक मूल्यों और संस्कारों से बच्चों को जोड़ने के उद्देश्य से सरस्वती शिशु मंदिर उच्चतर माध्यमिक विद्यालय, प्रगति नगर, एनटीपीसी कोरबा के तत्वावधान में दर्री के कलमीडुग्गु में संस्कार केंद्र का शुभारंभ किया गया। इस पहल का उद्देश्य बच्चों में सदाचार, अनुशासन, सेवा, सहयोग और सामाजिक उत्तरदायित्व की भावना विकसित करना है।

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कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में कलमीडुग्गु की वार्ड पार्षद श्रीमती राधा महंत तथा विशिष्ट अतिथि के रूप में वनांचल शिक्षा सेवा न्यास, छत्तीसगढ़ के प्रांत प्रमुख श्री नरेश जायसवाल उपस्थित रहे। इस अवसर पर विद्यालय के प्राचार्य श्री लक्ष्मी नारायण जायसवाल, प्रधानाचार्य श्री परस राम देवांगन, विशिष्ट आचार्य श्री अशोक कुमार चन्द्रवंशी, आचार्या श्रीमती शैल कैवर्त, संस्कार केंद्र की आचार्या श्रीमती प्रिया राजपूत तथा कलमीडुग्गु महिला मंडल की सदस्याएं भी शामिल हुईं।

संस्कारों से व्यक्तित्व निर्माण पर जोर

वनांचल शिक्षा सेवा न्यास के प्रांत प्रमुख श्री नरेश जायसवाल ने कहा कि संस्कार केंद्र की स्थापना का मुख्य उद्देश्य बच्चों के मन में भारतीय संस्कृति, नैतिकता, अनुशासन, सदाचार, सेवा और सहयोग के भाव विकसित करना है। बाल्यावस्था व्यक्तित्व और चरित्र निर्माण की महत्वपूर्ण अवस्था होती है। इसी दौरान बच्चों को माता-पिता के प्रति आदर, बड़ों के प्रति सम्मान, परिवार के प्रति आत्मीयता तथा समाज के प्रति अपने कर्तव्यों का बोध कराना आवश्यक है।

उन्होंने कहा कि सरस्वती शिक्षा संस्थान, रायपुर के मार्गदर्शन में संचालित यह केंद्र केवल शिक्षा तक सीमित नहीं है, बल्कि बच्चों में सामाजिक और सांस्कृतिक चेतना विकसित करने का माध्यम भी बनेगा। इसके माध्यम से बच्चों में राष्ट्रप्रेम, परोपकार, सहिष्णुता, कर्तव्यनिष्ठा और मानवीय संवेदनाओं जैसे गुणों को विकसित करने का प्रयास किया जाएगा।

संस्कारवान बच्चों से सशक्त समाज की उम्मीद

कार्यक्रम में इस बात पर जोर दिया गया कि शिक्षा जहां ज्ञान प्रदान करती है, वहीं संस्कार जीवन को सही दिशा देते हैं। बचपन में विकसित होने वाले नैतिक मूल्य आगे चलकर बच्चों के व्यक्तित्व, पारिवारिक जीवन और सामाजिक व्यवहार को प्रभावित करते हैं। कलमीडुग्गु में शुरू किया गया यह संस्कार केंद्र बच्चों को भारतीय परंपराओं और जीवन-मूल्यों से जोड़ने की दिशा में एक सार्थक पहल है।

मुख्य अतिथि श्रीमती राधा महंत ने बच्चों के उज्ज्वल भविष्य की कामना करते हुए उन्हें आशीर्वाद दिया। अंत में शांति मंत्र के पश्चात प्रसाद वितरण किया गया और कार्यक्रम का समापन हुआ।

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