पुष्य नक्षत्र पर आयोजित शिविर में सैकड़ों बच्चों ने लिया लाभ, नाड़ीवैद्य डॉ. नागेंद्र शर्मा ने बताई आयुर्वेदिक परंपरा की उपयोगिता
छत्तीसगढ़/कोरबा :- ‘चलो आयुर्वेद की ओर’ मिशन के तहत लायंस क्लब कोरबा एवरेस्ट, पतंजलि चिकित्सालय एवं श्री शिव औषधालय के संयुक्त तत्वावधान में बच्चों में रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने के उद्देश्य से ‘बच्चे रहें स्वस्थ’ योजना के अंतर्गत स्वर्ण बिन्दु प्राशन संस्कार कार्यक्रम आयोजित किया गया। 5 अक्टूबर 2026, सोमवार को पुष्य नक्षत्र के अवसर पर महानदी कॉम्प्लेक्स, निहारिका स्थित पतंजलि चिकित्सालय एवं श्री शिव औषधालय में नाड़ीवैद्य डॉ. नागेंद्र नारायण शर्मा द्वारा बच्चों को स्वर्ण बिन्दु प्राशन कराया गया।
आयोजकों के अनुसार कार्यक्रम में अंचल के सैकड़ों बच्चों ने लाभ लिया। इस दौरान श्रुति सारथी एवं दिव्यांशु सारथी की माता श्रीमती श्याम सारथी ने अपने अनुभव साझा करते हुए बताया कि वह वर्ष 2022 से प्रत्येक माह पुष्य नक्षत्र में अपने दोनों बच्चों को स्वर्ण बिन्दु प्राशन करवा रही हैं। उनका दावा है कि पिछले चार वर्षों में उनके बच्चों को सर्दी-खांसी सहित किसी तरह की स्वास्थ्य समस्या नहीं हुई और दोनों बच्चे काफी सक्रिय रहते हैं।
श्रीमती सारथी ने इसके लिए पतंजलि चिकित्सालय एवं श्री शिव औषधालय की संचालिका श्रीमती प्रतिभा शर्मा तथा नाड़ीवैद्य डॉ. नागेंद्र नारायण शर्मा के प्रति आभार व्यक्त किया। उन्होंने अन्य अभिभावकों से भी स्वर्ण बिन्दु प्राशन के संबंध में चिकित्सकीय सलाह लेने की अपील की।
प्राचीन आयुर्वेदिक परंपरा को आगे बढ़ाने का प्रयास
नाड़ीवैद्य डॉ. नागेंद्र नारायण शर्मा ने बताया कि स्वर्ण बिन्दु प्राशन को आयुर्वेद में बच्चों के लिए महत्वपूर्ण संस्कार माना गया है। उनके अनुसार इसका उल्लेख काश्यप संहिता एवं सुश्रुत संहिता जैसे प्राचीन आयुर्वेदिक ग्रंथों में मिलता है। उन्होंने कहा कि यह प्राचीन परंपरा वर्तमान समय में सीमित हो गई है और संस्थान के माध्यम से इसे लोगों तक पहुंचाने का प्रयास किया जा रहा है।
उन्होंने कहा कि कार्यक्रम का उद्देश्य बच्चों के स्वास्थ्य के प्रति अभिभावकों को जागरूक करना और आयुर्वेदिक पद्धतियों के बारे में जानकारी उपलब्ध कराना है।
इनकी रही विशेष सहभागिता
कार्यक्रम में नाड़ीवैद्य डॉ. नागेंद्र नारायण शर्मा, श्री शिव औषधालय की संचालिका श्रीमती प्रतिभा शर्मा के अलावा नेत्रनन्दन साहू, कमल धारिया, अरुण मानिकपुरी, अश्वनी बुनकर, सिद्धराम सारथी, अनुराग कंवर, शैल कुमारी निषाद, गुनगुन राठीया एवं पंचकर्म टेक्नीशियन पिंकी बरेठ ने विशेष रूप से उपस्थित होकर योगदान दिया।












