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धान खरीदी से पहले कलेक्टर की सख्ती: एक भी किसान का खसरा छूटा तो जिम्मेदारी तय, 21 अक्टूबर तक देना होगा प्रमाण-पत्र

कुणाल दुदावत ने एग्रीस्टैक मिलान से लेकर खरीदी केंद्रों की तैयारी तक तय की समय-सीमा, 25 अक्टूबर तक केंद्र तैयार करने के निर्देश

छत्तीसगढ़/कोरबा :-  खरीफ विपणन वर्ष 2026-27 में धान खरीदी शुरू होने से पहले प्रशासन ने तैयारियों को लेकर सख्ती बढ़ा दी है। कलेक्टर कुणाल दुदावत ने स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि पंजीकृत किसानों के किसी भी पात्र खसरे को एग्रीस्टैक से मिलान में छूटने नहीं दिया जाए। किसानों को रकबे में कमी, खसरा छूटने या फसल प्रविष्टि में त्रुटि के कारण धान बेचने में परेशानी न हो, इसके लिए संबंधित अधिकारियों और समिति प्रबंधकों को समय-सीमा में पूरी प्रक्रिया सुनिश्चित करने को कहा गया है।

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कलेक्ट्रेट सभा कक्ष में आयोजित समीक्षा बैठक में कलेक्टर ने निर्देश दिया कि पिछले वर्ष पंजीकृत प्रत्येक किसान के सभी खसरे, फसल और रकबे का एग्रीस्टैक से मिलान कराया जाए। समिति प्रबंधक किसानों को बुलाकर ऑपरेटरों के माध्यम से बी-1 में दर्ज खसरे एवं फसल की जांच कराएं। उन्होंने साफ कहा कि किसी भी पंजीकृत किसान का एक भी पात्र खसरा छूटना नहीं चाहिए।

21 अक्टूबर तक देना होगा प्रमाण-पत्र

कलेक्टर ने तहसीलदारों और एसडीएम को तहसीलवार तथा समितिवार प्रगति की नियमित समीक्षा करने के निर्देश दिए। सभी समितियों को 21 अक्टूबर तक यह प्रमाण-पत्र देना होगा कि पंजीकृत किसानों के सभी पात्र खसरे एग्रीस्टैक में दर्ज हैं।

जिले में वर्तमान में 60 सक्रिय आदिम जाति सेवा सहकारी समितियों के अंतर्गत 73 धान खरीदी केंद्र संचालित हैं। समिति स्तर पर कुल 52,689 किसान पंजीकृत हैं, जिनमें से 52,383 किसानों का एग्रीस्टैक पंजीयन हो चुका है, जबकि 306 किसानों का पंजीयन अभी शेष है। कलेक्टर ने शेष पंजीयन जल्द पूरा कराने के साथ अगले दो-तीन दिनों तक इसकी दैनिक निगरानी करने के निर्देश दिए।

7,541 खसरे अपडेट फार्मर रिक्वेस्ट में लंबित

समीक्षा के दौरान सामने आया कि पिछले वर्ष पंजीकृत किसानों के 7,541 खसरे अपडेट फार्मर रिक्वेस्ट आवेदन की प्रक्रिया के लिए लंबित हैं। कलेक्टर ने इन मामलों की तहसीलवार सूची तैयार कर समितिवार संबंधित समितियों तक पहुंचाने और नियमित समीक्षा के माध्यम से इनके निराकरण के निर्देश दिए।

पटवारी अथवा ग्रामीण कृषि विस्तार अधिकारी स्तर पर लंबित प्रकरणों को भी समय-सीमा में पूरा करने के लिए कहा गया है।

वनपट्टाधारी किसानों के प्रकरणों पर विशेष नजर

कलेक्टर ने वनपट्टाधारी, डुबान, शासकीय भूमि और शासकीय पट्टाधारी किसानों के मामलों पर विशेष ध्यान देने को कहा। ऐसे मामलों में भूमि विवरण, खसरे और अक्षांश-देशांतर की प्रविष्टि पूरी कराने के निर्देश दिए गए हैं।

वनपट्टाधारी एवं अन्य पात्र पट्टाधारी किसानों को संबंधित समितियों में पंजीयन के लिए आवेदन प्रस्तुत करने को कहा गया है। कलेक्टर ने स्पष्ट किया कि 30 अक्टूबर के बाद प्राप्त आवेदन मान्य नहीं होंगे। समितियों को आवेदन, दस्तावेज सत्यापन और अन्य आवश्यक प्रक्रियाएं समय पर पूरी करने के लिए कार्ययोजना बनाने के निर्देश दिए गए।

उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि पात्र किसान का वास्तविक रकबा कम करना उद्देश्य नहीं है, बल्कि पंजीयन और राजस्व अभिलेखों का सही तरीके से मिलान किया जाना जरूरी है।

25 अक्टूबर तक तैयार होंगे धान खरीदी केंद्र

धान खरीदी केंद्रों की तैयारियों को लेकर भी कलेक्टर ने समय-सीमा तय कर दी है। सभी केंद्रों को 25 अक्टूबर तक पूरी तरह तैयार करने के निर्देश दिए गए हैं।

केंद्रों पर साफ-सफाई, नमी मापक यंत्रों का कैलिब्रेशन, इलेक्ट्रॉनिक कांटा-बांट एवं तौल उपकरणों का सत्यापन, बायोमेट्रिक डिवाइस, बारदाने, जल निकासी, बैनर-पोस्टर और निगरानी समिति की व्यवस्था सुनिश्चित करने को कहा गया है।

नए खरीदी केंद्रों में स्थल चयन के साथ कंप्यूटर, प्रिंटर, स्कैनर, जनरेटर, ऑपरेटर और केंद्र प्रभारी की उपलब्धता भी समय पर सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए। कर्मचारियों एवं ऑपरेटरों को आवश्यक प्रशिक्षण देने पर भी जोर दिया गया।

12 अक्टूबर से शुरू होगा प्रशिक्षण

बैठक में बताया गया कि मास्टर ट्रेनर्स का प्रशिक्षण 12 से 16 अक्टूबर, जिला एवं अनुविभाग स्तर का प्रशिक्षण 19 से 27 अक्टूबर तक प्रस्तावित है। खरीदी केंद्रों की संभागवार समीक्षा एवं ट्रायल रन नवंबर के पहले सप्ताह में प्रस्तावित है।

किसानों के लिए टोकन प्रक्रिया 6 नवंबर से शुरू होने तथा धान उपार्जन अवधि 15 नवंबर से 31 जनवरी तक संभावित होने की जानकारी दी गई।

बारदाने से लेकर बकेट क्लेम तक निगरानी

कलेक्टर ने पीडीएस बारदानों का समय पर संग्रहण कराने और उपलब्धता पर लगातार निगरानी रखने के निर्देश दिए। बकेट क्लेम के लक्ष्य की भी समीक्षा की गई।

प्रत्येक तहसीलदार को 10 गांव चिन्हित कर अक्टूबर माह में पटवारियों के माध्यम से बकेट क्लेम की शत-प्रतिशत कार्रवाई सुनिश्चित कराने को कहा गया। इसकी मॉनिटरिंग एसडीएम करेंगे।

इसके अलावा पॉलीगॉन ऐप ट्रेसिंग में आ रही समस्याओं का समाधान करने तथा डिजिटल कृषि मोबाइल ऐप में प्रविष्टियों के लिए सर्वेयर लगाकर काम में तेजी लाने के निर्देश दिए गए। धान विक्रय नहीं करने वाले किसानों की सहमति के आधार पर आवश्यक पंचनामा तैयार कराने को भी कहा गया।

किसानों से अपील- समिति में जाकर जरूर मिलाएं अपने खसरे

कलेक्टर कुणाल दुदावत ने किसानों से अपील की है कि वे अपनी संबंधित समिति में जाकर अपने सभी खसरों का मिलान कराएं और यह सुनिश्चित करें कि कोई खसरा पंजीयन से छूटा न हो। खसरे अथवा पंजीयन में किसी प्रकार की त्रुटि मिलने पर समिति स्तर पर उसका सुधार तत्काल कराने को कहा गया है।

उन्होंने समिति प्रबंधकों को किसानों की समस्याओं का समय पर निराकरण करने के निर्देश दिए हैं, ताकि धान खरीदी शुरू होने के बाद किसी किसान को पंजीयन, रकबे या खसरे से संबंधित समस्या के कारण परेशानी का सामना न करना पड़े।

बैठक में अपर कलेक्टर देवेंद्र पटेल एवं ओंकार यादव, खाद्य अधिकारी घनश्याम कंवर, उप पंजीयक सहकारिता एम. मिंज, जिला विपणन अधिकारी ऋतुराज देवांगन, सहकारी बैंक के नोडल अधिकारी सुशील जोशी, डिप्टी कलेक्टर तुलाराम भारद्वाज सहित सभी एसडीएम, तहसीलदार, बैंक मैनेजर, खाद्य निरीक्षक, सहकारिता निरीक्षक, वरिष्ठ कृषि विस्तार अधिकारी, समिति प्रबंधक एवं समिति ऑपरेटर उपस्थित रहे।

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