सीएमएचओ ने शासकीय और निजी अस्पतालों को दिए सख्त निर्देश, पात्र मामलों की एंट्री और ब्लॉकिंग अनिवार्य
कलेक्टर की आगामी समीक्षा बैठक में अस्पतालवार होगी तुलना, कम प्रगति मिलने पर तय होगी जिम्मेदारी
छत्तीसगढ़/कोरबा :- सड़क दुर्घटनाओं और अन्य दुर्घटनाओं में घायल होने वाले पात्र पीड़ितों को पीएम राहत योजना का लाभ दिलाने के मामले में अब स्वास्थ्य विभाग ने अस्पतालों की जवाबदेही तय करने की तैयारी शुरू कर दी है। जिले के सभी शासकीय और निजी अस्पतालों को दुर्घटना प्रकरणों की नियमित समीक्षा कर योजना के तहत पात्र मामलों की अनिवार्य रूप से एंट्री और ब्लॉकिंग करने के निर्देश दिए गए हैं। खास बात यह है कि आगामी कलेक्टर की समीक्षा बैठक में अस्पतालवार प्रकरणों और की गई ब्लॉकिंग का तुलनात्मक परीक्षण किया जाएगा।
मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी ने स्पष्ट किया है कि योजना के लिए पात्र कोई भी दुर्घटना प्रकरण बिना ब्लॉकिंग के नहीं छूटना चाहिए। अस्पताल प्रबंधन को अपने यहां दर्ज दुर्घटना के प्रत्येक प्रकरण की समीक्षा कर यह सुनिश्चित करना होगा कि योजना के दायरे में आने वाले अधिकतम पात्र मामलों को समय पर चिन्हित कर प्रक्रिया में शामिल किया जाए।
अस्पतालों की कार्यप्रणाली पर होगी सीधी नजर
स्वास्थ्य विभाग के निर्देशों से स्पष्ट है कि अब केवल दुर्घटना प्रकरण दर्ज करना पर्याप्त नहीं होगा, बल्कि पात्र मामलों को योजना के अंतर्गत ब्लॉक करने की कार्रवाई भी सुनिश्चित करनी होगी। इसके लिए शासकीय के साथ-साथ निजी अस्पतालों को भी अपने स्तर पर नियमित समीक्षा की व्यवस्था करनी होगी।
अस्पताल में कितने दुर्घटना प्रकरण सामने आए और उनमें से कितने मामलों की पीएम राहत योजना के तहत ब्लॉकिंग की गई, इसका आंकड़ा अब महत्वपूर्ण माना जाएगा। इससे योजना के क्रियान्वयन में अस्पतालवार स्थिति सामने आएगी और पात्र मरीजों को योजना का लाभ दिलाने में होने वाली संभावित लापरवाही भी चिन्हित की जा सकेगी।
कलेक्टर की बैठक में खुलेगा अस्पतालवार रिपोर्ट का पन्ना
आगामी कलेक्टर समीक्षा बैठक को लेकर स्वास्थ्य विभाग ने अस्पतालों को विशेष रूप से सतर्क किया है। बैठक में प्रत्येक अस्पताल में दर्ज दुर्घटना प्रकरणों की संख्या और पीएम राहत योजना के अंतर्गत की गई ब्लॉकिंग की संख्या की समीक्षा की जाएगी।
अस्पतालों की प्रगति का तुलनात्मक परीक्षण किया जाएगा। यानी किस अस्पताल में कितने दुर्घटना प्रकरण आए और उनमें से कितने पात्र मामलों की ब्लॉकिंग हुई, इसकी तस्वीर सामने रखी जाएगी। कम प्रगति अथवा प्रक्रिया में लापरवाही पाए जाने पर संबंधित संस्था की जिम्मेदारी निर्धारित की जाएगी।
पात्र पीड़ितों को लाभ दिलाना प्राथमिकता
स्वास्थ्य विभाग का जोर इस बात पर है कि दुर्घटना के बाद उपचार के लिए अस्पताल पहुंचने वाले पात्र पीड़ित योजना के लाभ से वंचित न रहें। इसके लिए संबंधित अधिकारियों और कर्मचारियों को निर्धारित प्रक्रिया का गंभीरता से पालन करने के निर्देश दिए गए हैं।
सीएमएचओ ने अस्पतालों को तत्काल प्रभाव से पात्र दुर्घटना प्रकरणों की अधिकतम ब्लॉकिंग सुनिश्चित करने को कहा है। विभाग ने इसे सामान्य प्रशासनिक प्रक्रिया के बजाय महत्वपूर्ण और प्राथमिकता वाले कार्य के रूप में लेने के निर्देश दिए हैं।
अब आंकड़ों से तय होगी अस्पतालों की जवाबदेही
पीएम राहत योजना की ब्लॉकिंग को लेकर आगामी समीक्षा इसलिए भी महत्वपूर्ण मानी जा रही है क्योंकि इसमें अस्पतालवार आंकड़ों के आधार पर प्रदर्शन का आकलन किया जाएगा। इससे योजना के क्रियान्वयन में बेहतर प्रदर्शन करने वाले और अपेक्षाकृत कम प्रगति वाले अस्पतालों की स्थिति स्पष्ट होगी।
स्वास्थ्य विभाग की सख्ती का उद्देश्य यही है कि दुर्घटना पीड़ितों के लिए उपलब्ध सरकारी सहायता केवल कागजी प्रक्रिया तक सीमित न रहे, बल्कि पात्र हितग्राही तक समय पर पहुंचे। अब अस्पतालों को अपने यहां दर्ज दुर्घटना मामलों की नियमित निगरानी के साथ पात्र प्रकरणों की एंट्री और ब्लॉकिंग सुनिश्चित करनी होगी।












