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बाढ़ के खतरे को लेकर निगम अलर्ट, 24 घंटे सक्रिय रहेगा कंट्रोल रूम

साकेत भवन में मुख्य बाढ़ नियंत्रण केन्द्र सक्रिय, आयुक्त आशुतोष पाण्डेय ने किया औचक निरीक्षण

07 जोन में मैदानी अमला तैनात, निचली बस्तियों और जलभराव वाले क्षेत्रों पर लगातार निगरानी

छत्तीसगढ़/कोरबा :-  लगातार हो रही बारिश और हसदेव नदी सहित निगम क्षेत्र के नदी-नालों में बढ़ते जलस्तर को देखते हुए नगर पालिक निगम कोरबा ने अपनी आपदा एवं बाढ़ नियंत्रण व्यवस्था को पूरी तरह अलर्ट मोड पर कर दिया है। साकेत भवन में स्थापित निगम के मुख्य बाढ़ नियंत्रण केन्द्र में 24 घंटे निगरानी और आपात स्थिति में तत्काल राहत-बचाव की व्यवस्था सुनिश्चित की गई है।

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इसी क्रम में निगम आयुक्त श्री आशुतोष पाण्डेय ने गुरुवार को मुख्य बाढ़ नियंत्रण केन्द्र का औचक निरीक्षण किया। उन्होंने नियंत्रण कक्ष में उपलब्ध व्यवस्थाओं, कर्मचारियों की तैनाती और सूचनाओं के आदान-प्रदान की व्यवस्था का जायजा लिया। आयुक्त ने बाढ़ नियंत्रण कार्यप्रभारी एवं अधीक्षण अभियंता भूषण उरांव को व्यवस्थाओं की लगातार निगरानी करते हुए किसी भी आपात स्थिति में तत्काल कार्रवाई सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।

बांगो बांध और हसदेव नदी के बढ़ते जलस्तर पर नजर

लगातार बारिश के चलते बांगो बांध और हसदेव नदी का जलस्तर बढ़ा है। हसदेव नदी के गेट भी खोले गए हैं। ऐसे में नदी-नालों के किनारे तथा निचले इलाकों में जलभराव की संभावित स्थिति को देखते हुए निगम ने अपनी तैयारियां तेज कर दी हैं।

महापौर श्रीमती संजूदेवी राजपूत एवं आयुक्त श्री आशुतोष पाण्डेय के मार्गदर्शन में मानसून की शुरुआत से ही बाढ़ एवं अतिवृष्टि से निपटने के लिए आवश्यक व्यवस्थाएं तैयार रखी गई थीं। वर्तमान परिस्थितियों को देखते हुए इन्हें और अधिक सक्रिय कर दिया गया है।

तीन पालियों में 24 घंटे कर्मचारी तैनात

साकेत भवन स्थित मुख्य बाढ़ नियंत्रण केन्द्र में कर्मचारियों की तीन पालियों में 24 घंटे तैनाती की गई है। किसी भी प्रकार की बाढ़, जलभराव अथवा आपदा की सूचना निगम नियंत्रण केन्द्र तक पहुंचाने के लिए टेलीफोन नंबर 226672 जारी किया गया है। बाढ़ नियंत्रण के प्रभारी अधिकारी अधीक्षण अभियंता भूषण उरांव हैं। उनका मोबाइल नंबर 97520-94139 है।

सातों जोन में अलग-अलग अधिकारी संभालेंगे जिम्मेदारी

निगम ने बाढ़ नियंत्रण व्यवस्था को जोनवार भी मजबूत किया है। इसके लिए सातों जोन में उप प्रभारी नियुक्त किए गए हैं।

  • कोरबा शहर जोन: मनीष यादव – 97705-69975
  • टी.पी. नगर जोन: सोमनाथ डेहरे – 82259-77036
  • कोसाबाड़ी जोन: पीयूष राजपूत – 94241-41063
  • पं. रविशंकर शुक्लनगर जोन: मोतीलाल बरेठ – 77730-07167
  • बालको जोन: आकाश अग्रवाल – 97520-94225
  • दर्री जोन: यशवंत जोगी – 83050-87567
  • सर्वमंगला नगर जोन: रमेश सूर्यवंशी – 89629-85823

निचली बस्तियों में लगातार निगरानी

आयुक्त श्री पाण्डेय स्वयं शहर की निचली बस्तियों और संभावित जलभराव वाले क्षेत्रों का निरीक्षण कर रहे हैं। वहीं निगम के सभी सात जोन कमिश्नर अपने अधीनस्थ कर्मचारियों एवं मैदानी अमले के साथ नदी किनारे बसे मोहल्लों, निचली बस्तियों और संवेदनशील क्षेत्रों का लगातार जायजा ले रहे हैं।

निगम की टीम लोगों को भी सतर्क कर रही है कि यदि घर या बस्ती में जलभराव की स्थिति बनने लगे तो तत्काल निगम को सूचना दें और आवश्यकता पड़ने पर सुरक्षित स्थानों अथवा निर्धारित सेल्टर केन्द्रों में पहुंचें।

जलभराव प्रभावितों के लिए 11 सेल्टर केन्द्र तैयार

निगम द्वारा जलभराव की स्थिति में प्रभावित परिवारों के ठहरने और भोजन की व्यवस्था के लिए 11 सेल्टर केन्द्र तैयार किए गए हैं। इनमें प्राथमिक एवं पूर्व माध्यमिक शालाओं सहित अन्य निर्धारित भवन शामिल हैं।

प्रमुख सेल्टर केन्द्रों में प्राथमिक आदिवासी जाति कन्या सीतामणी, पूर्व माध्यमिक शाला सीतामणी, पूर्व माध्यमिक शाला आदिवासी जाति कन्या मिशन रोड, प्राथमिक माध्यमिक शाला आदिवासी जाति कन्या रानी गेट के पास, प्राथमिक शाला लालघाट, अंबेडकर स्कूल, प्राथमिक शाला जोगियाडेरा, कबीर भवन, सुमेधा स्कूल, एसईसीएल स्कूल और शासकीय प्राथमिक शाला प्रेमनगर शामिल हैं।

आवश्यकता पड़ने पर प्रियदर्शनी इंदिरा स्टेडियम को मुख्य सेल्टर केन्द्र के रूप में उपयोग किया जा सकेगा।

जलभराव की स्थिति में तत्काल शुरू होगा राहत अभियान

आयुक्त श्री पाण्डेय ने सभी जोन कमिश्नरों और उप जोन प्रभारियों को निर्देश दिए हैं कि वे अपने-अपने क्षेत्रों में जलस्तर और जलभराव की स्थिति पर लगातार नजर रखें। कहीं भी स्थिति बिगड़ने पर तत्काल बचाव एवं राहत कार्य शुरू कर प्रभावित परिवारों को सुरक्षित सेल्टर केन्द्रों तक पहुंचाया जाए।

निगम प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि लगातार बारिश के बीच सुरक्षा, बचाव और राहत व्यवस्था में किसी भी स्तर पर लापरवाही नहीं बरती जाएगी तथा संवेदनशील क्षेत्रों में मैदानी अमले की सतत मौजूदगी सुनिश्चित की गई है।

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