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कोलियरी प्रबंधन की मनमानी पर CGIT का बड़ा फैसला, कामगार बारेलाल के हक में आया निर्णय

जबलपुर/छत्तीसगढ़/कोरबा। केंद्रीय सरकार औद्योगिक न्यायाधिकरण (CGIT), जबलपुर ने साउथ ईस्टर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड (SECL) चिरमिरी क्षेत्र के प्रबंधन द्वारा कामगार बारेलाल की जन्मतिथि से संबंधित की गई कार्रवाई को खारिज करते हुए उनके पक्ष में महत्वपूर्ण पंचाट (Award) सुनाया है। न्यायाधिकरण ने माना कि स्कूल लीविंग सर्टिफिकेट में दर्ज जन्मतिथि को नजरअंदाज कर मेडिकल जांच के आधार पर कामगार को समय से पहले सेवानिवृत्त करना विधिसम्मत नहीं था।

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सही जन्मतिथि 02 जनवरी 1960 मानने का निर्देश

न्यायाधिकरण के पीठासीन अधिकारी पी.के. श्रीवास्तव, एच.जे.एस. (सेवानिवृत्त) ने अपने निर्णय में निर्देश दिया कि कुरासिया कॉलरी में सहायक फोरमैन के पद पर कार्यरत कामगार बारेलाल की जन्मतिथि स्कूल लीविंग सर्टिफिकेट के अनुसार 02 जनवरी 1960 मानी जाए।

पूर्ण बैक-वेजेस और सभी आनुषंगिक लाभ का हकदार

न्यायाधिकरण ने निर्देश दिया कि कामगार को उसकी सही जन्मतिथि के आधार पर नियुक्ति से सेवानिवृत्ति तक सेवा में माना जाए। इसके साथ ही उसे पूर्ण पिछले वेतन (Back-wages), सेवाकालीन लाभ तथा सेवानिवृत्ति के बाद मिलने वाले सभी आनुषंगिक लाभ (Consequential and Post-retiral Benefits) प्रदान किए जाएं।

प्रबंधन को सभी देय लाभों का भुगतान पंचाट की तिथि से 90 दिनों के भीतर करने का निर्देश दिया गया है। निर्धारित अवधि में भुगतान नहीं होने पर 6 प्रतिशत वार्षिक ब्याज देने का भी प्रावधान किया गया है।

1983 की नियुक्ति से शुरू हुआ था विवाद

मामले के अनुसार, वर्ष 1983 में नियुक्ति के समय प्रबंधन ने मेडिकल जांच के आधार पर बारेलाल की जन्मतिथि 26 सितंबर 1957 दर्ज कर ली थी। जबकि रोजगार कार्यालय तथा कार्यभार ग्रहण करते समय कामगार ने अपना स्कूल लीविंग सर्टिफिकेट प्रस्तुत किया था, जिसमें उनकी जन्मतिथि 02 जनवरी 1960 दर्ज थी।

कामगार ने सेवा के महज नौ वर्ष के भीतर वर्ष 1992 में जन्मतिथि सुधारने के लिए आवेदन प्रस्तुत किया था। आरोप है कि इसके बावजूद प्रबंधन ने उनके आवेदन पर उचित कार्रवाई नहीं की और उन्हें दर्ज जन्मतिथि के आधार पर समय से पहले सेवानिवृत्त करने की कार्रवाई की। इस मामले में राष्ट्रीय कोलियरी वर्कर्स फेडरेशन ने कामगार के पक्ष को मजबूती से उठाया।

Implementation Instruction No. 76 का दिया हवाला

न्यायाधिकरण ने Implementation Instruction No. 76 का उल्लेख करते हुए कहा कि नियमों के तहत शिक्षित कर्मचारी की जन्मतिथि मान्यता प्राप्त संस्थान द्वारा जारी स्कूल लीविंग सर्टिफिकेट के आधार पर निर्धारित की जानी चाहिए।

न्यायाधिकरण ने अपने निर्णय में सर्वोच्च न्यायालय के दीपाली गुंडू सुरवासे तथा हिंदुस्तान टिन वर्क्स से संबंधित महत्वपूर्ण निर्णयों का भी हवाला दिया। इन निर्णयों के आधार पर गलत तरीके से सेवा समाप्ति या सेवानिवृत्ति की स्थिति में सेवा की निरंतरता और पूर्ण बैक-वेजेस दिए जाने के सिद्धांत को रेखांकित किया गया।

श्रम अधिकारों की दिशा में महत्वपूर्ण फैसला

CGIT जबलपुर का यह निर्णय श्रमिक अधिकारों की रक्षा की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है। निर्णय से यह संदेश गया है कि किसी कर्मचारी के वैध दस्तावेजों और लागू नियमों की अनदेखी कर प्रबंधन द्वारा एकतरफा कार्रवाई नहीं की जा सकती।

कामगार बारेलाल के पक्ष में आए इस फैसले से श्रमिक संगठनों में भी संतोष का माहौल है। यह निर्णय सेवा अभिलेखों में जन्मतिथि से जुड़े विवादों तथा कर्मचारियों की सेवानिवृत्ति संबंधी मामलों में महत्वपूर्ण नजीर के रूप में देखा जा रहा है।

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