छत्तीसगढ़/कोरबा :- देश की आजादी की 80वीं वर्षगांठ को लेकर देशभर में तिरंगा यात्राओं के माध्यम से राष्ट्रभक्ति और राष्ट्रीय ध्वज के सम्मान का संदेश दिया जा रहा है। कोरबा में भी भारतीय जनता पार्टी द्वारा विभिन्न क्षेत्रों में तिरंगा यात्राओं का आयोजन किया जा रहा है। लेकिन बालको क्षेत्र में निकली एक तिरंगा यात्रा उस समय चर्चा में आ गई, जब यात्रा में शामिल भाजपा के पार्षद एवं कई कार्यकर्ता उल्टा तिरंगा ध्वज हाथ में थामे नजर आए।
नगर पालिक निगम के बालको क्षेत्र में पूर्व नेता प्रतिपक्ष एवं भाजपा पार्षद हितानंद अग्रवाल की अगुवाई में तिरंगा यात्रा निकाली गई। इस दौरान बालको मंडल अध्यक्ष डिलेंद्र यादव, वरिष्ठ नेत्री मंजू सिंह सहित भाजपा के कई पदाधिकारी और कार्यकर्ता मौजूद रहे। भारत माता के जयकारों के साथ यात्रा बालको क्षेत्र के विभिन्न गलियों और मोहल्लों से होकर गुजरी।
लेकिन राष्ट्रध्वज के सम्मान में निकाली गई इस यात्रा में ही तिरंगे के सही स्वरूप को लेकर बड़ी चूक सामने आ गई। यात्रा में सबसे आगे चल रहे पूर्व नेता प्रतिपक्ष एवं भाजपा पार्षद हितानंद अग्रवाल के हाथ में तिरंगा ध्वज उल्टा दिखाई दिया। इतना ही नहीं, उनके पीछे चल रहे भाजपा पार्षद सहित कई कार्यकर्ताओं के हाथों में भी तिरंगा उल्टा नजर आया। पूरी यात्रा के दौरान कई लोगों ने उल्टा ध्वज थामे रखा और यह दृश्य कैमरों में भी कैद हो गया।
जिस तिरंगे के सम्मान का संदेश देने निकले, उसी को लेकर हुई चूक
तिरंगा यात्रा का उद्देश्य देश के राष्ट्रीय ध्वज के प्रति सम्मान और लोगों में राष्ट्रभक्ति की भावना जागृत करना था। ऐसे में यात्रा के दौरान ही कई हाथों में उल्टा तिरंगा नजर आना सवाल खड़े करता है। खास बात यह है कि यात्रा की अगुवाई करने वाले वरिष्ठ भाजपा नेता के हाथ में भी ध्वज उल्टा था और उनके आसपास पार्टी के कई पदाधिकारी एवं कार्यकर्ता मौजूद थे।
लोगों का सवाल है कि जब इतनी बड़ी संख्या में पार्टी के पदाधिकारी और कार्यकर्ता तिरंगा यात्रा में शामिल थे, तो किसी की नजर उल्टे तिरंगे पर क्यों नहीं पड़ी? क्या यात्रा शुरू करने से पहले राष्ट्रध्वज को सही तरीके से लगाने और उसके सम्मान से जुड़े नियमों की जांच नहीं की गई?
सोशल मीडिया पर प्रचार के बाद तस्वीरें हटाने की चर्चा
इस तिरंगा यात्रा का सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर भी जोर-शोर से प्रचार-प्रसार किया गया। यात्रा के दौरान बनाए गए फोटो और वीडियो सोशल मीडिया पर सामने आए। लेकिन जब लोगों का ध्यान इस ओर गया कि कई हाथों में तिरंगा उल्टा है, तो कुछ तस्वीरों और वीडियो को सोशल मीडिया से हटाए जाने की चर्चा भी होने लगी।
क्या मानवीय भूल मानकर मामला खत्म कर दिया जाएगा?
राष्ट्रध्वज देश की आन, बान और शान का प्रतीक है। इसलिए उसके प्रदर्शन में छोटी-सी चूक भी स्वाभाविक रूप से लोगों का ध्यान आकर्षित करती है। खासकर तब, जब वही ध्वज देशभक्ति और उसके सम्मान का संदेश देने के लिए आयोजित यात्रा में इस्तेमाल किया जा रहा हो।
अब चर्चा इस बात को लेकर है कि क्या जिला भाजपा संगठन, तिरंगा यात्रा के प्रभारी अथवा संबंधित पदाधिकारी इस चूक पर कोई जवाब देंगे? क्या इसे महज मानवीय त्रुटि मानकर नजरअंदाज कर दिया जाएगा या फिर भविष्य में ऐसी गलती दोबारा न हो, इसके लिए कोई जिम्मेदारी तय की जाएगी?
देशभक्ति के प्रदर्शन से ज्यादा जरूरी तिरंगे का सम्मान
तिरंगा यात्रा में शामिल होना निश्चित रूप से देशभक्ति की भावना का प्रतीक है, लेकिन राष्ट्रीय ध्वज के सम्मान के साथ उसके सही स्वरूप और प्रदर्शन का ध्यान रखना भी उतना ही आवश्यक है। बालको की इस यात्रा की तस्वीरें अब चर्चा का विषय बनी हुई हैं और लोग यही सवाल कर रहे हैं कि जिस तिरंगे को सम्मान देने और देशभक्ति का संदेश फैलाने के लिए यात्रा निकाली गई, उसी तिरंगे को सही तरीके से संभालने में इतनी बड़ी चूक आखिर कैसे हो गई?












