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PM आवास में ‘फर्जीवाड़े’ का खेल? 46 नामों पर गंभीर सवाल, 11 मृतकों को भी मिला आवास!

‘सोनी’ के नाम स्वीकृति, ₹40 हजार की पहली किस्त ‘टोप्पो’ के खाते में पहुंचने का आरोप; 66 अपात्र हितग्राहियों की शिकायत से मचा हड़कंप

CEO प्रतीक जैन ने कहा—जांच में दोषी मिले तो FIR से लेकर शासकीय राशि की रिकवरी तक होगी कार्रवाई

छत्तीसगढ़/कोरबा :-  गरीब परिवारों को पक्की छत देने वाली प्रधानमंत्री आवास योजना ही अगर फर्जी नामों, मृत हितग्राहियों और दूसरे खातों में किस्त पहुंचने के आरोपों में घिर जाए तो सवाल उठना लाजिमी है। ग्राम पंचायत तिलकेजा में प्रधानमंत्री आवास योजना को लेकर सामने आई शिकायत ने योजना की पात्रता जांच, दस्तावेज सत्यापन और भुगतान व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

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शिकायत में 66 हितग्राहियों को अपात्र होने के बावजूद पात्र बनाए जाने का आरोप लगाया गया है। इनमें से 46 हितग्राहियों को पूरी तरह फर्जी बताया गया है। इतना ही नहीं, दावा है कि 11 ऐसे लोगों के नाम भी प्रधानमंत्री आवास स्वीकृत हुए, जिनकी मृत्यु कई वर्ष पहले हो चुकी थी। इसके बाद भी उनके नाम पर स्वीकृत आवास की पहली किस्त की राशि किसी जीवित व्यक्ति के खाते में पहुंचने का आरोप है।

‘सोनी’ के नाम PM आवास, ‘टोप्पो’ के खाते में पहली किस्त!

मामले में सामने आई जानकारी के मुताबिक कुछ मामलों में प्रधानमंत्री आवास जिस व्यक्ति के नाम स्वीकृत हुआ, पहली किस्त की ₹40 हजार की राशि उसके बजाय किसी दूसरे व्यक्ति के खाते में भेजे जाने का आरोप है।

शिकायत से जुड़े लोगों के अनुसार, एक मामले में ‘सोनी’ सरनेम वाले हितग्राही के नाम आवास स्वीकृत किया गया, जबकि ₹40 हजार की पहली किस्त कथित तौर पर ‘टोप्पो’ सरनेम वाले व्यक्ति के खाते में पहुंची।

अगर जांच में यह तथ्य सही साबित होता है तो यह सवाल बेहद गंभीर हो जाता है कि हितग्राही के नाम और भुगतान खाते का मिलान किसने किया, बैंक खाते का सत्यापन किस स्तर पर हुआ और राशि दूसरे व्यक्ति के खाते में कैसे पहुंची?

मृत्यु के 4, 5 और 10 साल बाद भी ‘जिंदा’ हुए हितग्राही?

मामले का सबसे चौंकाने वाला पहलू 11 मृत व्यक्तियों के नाम पर आवास स्वीकृति का आरोप है। शिकायत में बताया गया है कि इनमें कुछ लोगों की मृत्यु करीब 10 वर्ष, कुछ की 5 वर्ष और कुछ की 4 वर्ष पहले हो चुकी थी। इसके बावजूद उनके नाम प्रधानमंत्री आवास योजना में स्वीकृति होने का दावा किया गया है। और इससे भी गंभीर आरोप यह है कि मृतकों के नाम स्वीकृत आवास की ₹40 हजार की पहली किस्त किसी जीवित व्यक्ति के बैंक खाते में डाल दी गई। यानी सवाल सिर्फ यह नहीं कि मृत व्यक्ति के नाम आवास कैसे स्वीकृत हुआ, बल्कि यह भी है कि मृतक के नाम पर सरकारी राशि का भुगतान किसके खाते में और किस प्रक्रिया के तहत किया गया?

परिवारों को पता ही नहीं था कि मृत परिजन के नाम PM आवास स्वीकृत है

शिकायत के अनुसार, जिन मृत व्यक्तियों के नाम प्रधानमंत्री आवास स्वीकृत होने की जानकारी सामने आई, उनके परिजनों को भी इसकी जानकारी नहीं थी। बाद में जब उन्हें पता चला तो वे कथित तौर पर हैरान रह गए। अब वे भी इस पूरे मामले की निष्पक्ष जांच और कथित फर्जीवाड़े में शामिल दोषियों पर कड़ी कार्रवाई की मांग कर रहे हैं।

18 जुलाई 2024 में अपात्र, 2026 में अचानक पात्र कैसे?

शिकायत पत्र के मुताबिक 18 जुलाई 2024 की विशेष ग्रामसभा में प्रधानमंत्री आवास योजना की स्थायी प्रतीक्षा सूची के 214 हितग्राहियों का वाचन किया गया था। इसमें कई लोगों को शासकीय नौकरी, पक्का मकान, अन्यत्र निवास अथवा पूर्व में आवास का लाभ लेने जैसे कारणों से अपात्र बताया गया था। आरोप है कि बाद में 14 अप्रैल 2026 को तैयार नई कार्यवाही पंजी में कुछ अपात्र हितग्राहियों को नियमों को दरकिनार कर पात्र दर्ज कर दिया गया। शिकायतकर्ता ने ऐसे 66 हितग्राहियों की पात्रता तत्काल निरस्त करने की मांग की है।

23 जून की कथित फर्जी प्रविष्टि, फिर खातों में पहुंची लाखों की रकम

शिकायत में आरोप लगाया गया है कि 23 जून 2026 को कूटरचित ग्रामसभा पंजी के आधार पर पोर्टल पर कथित फर्जी प्रविष्टियां की गईं। इसके बाद 48 से अधिक अपात्र/फर्जी खातों में प्रधानमंत्री आवास की पहली किस्त के रूप में ₹40 हजार प्रति हितग्राही की दर से राशि आवंटित कर आहरित किए जाने का आरोप है।

यदि जांच में यह आरोप सही पाया जाता है तो मामला केवल पात्रता में गड़बड़ी तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि शासकीय दस्तावेजों और सरकारी राशि के कथित दुरुपयोग का गंभीर प्रकरण बन सकता है।

पूर्व जनपद सदस्य और RTI कार्यकर्ता ने उठाई आवाज

मामले को लेकर पूर्व जनपद सदस्य शकुंतला केवर्त और RTI कार्यकर्ता जितेंद्र कुमार साहू ने कलेक्टर जनदर्शन में शिकायत कर पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की है।शिकायत में कथित रूप से गलत तरीके से जारी राशि की शत-प्रतिशत वसूली, दोषी सरपंच-सचिव एवं संबंधित अधिकारियों-कर्मचारियों के खिलाफ कार्रवाई और FIR दर्ज करने की मांग की गई है।

CEO प्रतीक जैन का सख्त रुख—दोषी मिले तो FIR भी, रिकवरी भी

शिकायत को गंभीरता से लेते हुए जिला पंचायत CEO प्रतीक जैन ने जिला स्तरीय जांच टीम गठित कर दी है।CEO प्रतीक जैन ने स्पष्ट किया है कि जांच में यदि कोई अधिकारी-कर्मचारी दोषी पाया जाता है तो उसके खिलाफ FIR से लेकर शासकीय राशि की रिकवरी तक की कार्रवाई की जाएगी। शासन की योजनाओं में किसी भी प्रकार की अनियमितता को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

अब जांच के घेरे में ‘नाम से लेकर खाते’ तक पूरी कहानी

तिलकेजा का यह मामला अब सिर्फ प्रधानमंत्री आवास की स्वीकृति तक सीमित नहीं है। जांच में यह पता लगाना होगा कि—

1.   किसने अपात्रों को पात्र बनाया?
2.   मृतकों के नाम पर स्वीकृति किसने दी?
3.  ‘सोनी’ के नाम की राशि ‘टोप्पो’ के खाते में कैसे पहुंची?
4.   ₹40 हजार की किस्त जारी करने से पहले बैंक खाते का सत्यापन किसने किया?
5.   पोर्टल पर कथित प्रविष्टियां किसने कीं?
6.   और सरकारी राशि का वास्तविक लाभ किसे मिला?

इन सवालों के जवाब जांच रिपोर्ट से सामने आएंगे। आरोप अभी जांच के अधीन हैं और उनकी पुष्टि प्रशासनिक जांच के बाद ही होगी। लेकिन यदि शिकायत में लगाए गए आरोप प्रमाणित होते हैं, तो तिलकेजा में प्रधानमंत्री आवास योजना का यह मामला फर्जी हितग्राहियों, मृतकों के नाम स्वीकृति और दूसरे खातों में सरकारी किस्त पहुंचाने की गंभीर अनियमितता के रूप में सामने आ सकता है।

अब नजर जांच रिपोर्ट पर है—क्योंकि इसी जांच से तय होगा कि ‘कागजों में बने आवास’ की इस पूरी कहानी में असली जिम्मेदार कौन हैं।

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