खनिज विभाग की बड़ी कार्रवाई, 1 टीपर, 2 ट्रैक्टर और 1620 घन मीटर अवैध रेत जब्त, लेकिन सवाल बरकरार—आखिर किसके संरक्षण में फल-फूल रहा अवैध कारोबार कार्रवाई के बावजूद बड़ा सवाल

कलेक्टर कुणाल दुदावत के निर्देश तथा उप संचालक खनि प्रशासन के मार्गदर्शन में 24 जून को विशेष अभियान चलाया गया। अभियान के दौरान सलिहाभाटा, भैसामुड़ा, कटबिटला, कुदमुरमाल, सोनपुरी, सीतामढ़ी, बरमपुर, राताखार, पोड़ी, कछार, चुहिया, बाल्को, कसनिया और कटघोरा सहित कई संवेदनशील क्षेत्रों में सघन जांच की गई।
जांच के दौरान बरमपुर, राताखार और कसनिया क्षेत्रों में अवैध रूप से रेत परिवहन करते पाए गए 1 टीपर और 2 ट्रैक्टर को जब्त कर सर्वमंगला पुलिस चौकी, रामपुर थाना तथा खनिज जांच चौकी कटघोरा की अभिरक्षा में रखा गया है।
इसके अलावा कछार क्षेत्र में 600 घन मीटर एवं 720 घन मीटर तथा सोनपुरी में 300 घन मीटर रेत के अवैध भंडारण को जब्त किया गया। इस प्रकार कुल 1620 घन मीटर अवैध रेत विभाग के कब्जे में ली गई है।
खनिज विभाग का कहना है कि अभियान का उद्देश्य अवैध उत्खनन, परिवहन और भंडारण पर प्रभावी नियंत्रण स्थापित करना, प्राकृतिक संसाधनों की सुरक्षा करना तथा शासन को होने वाली राजस्व हानि को रोकना है। विभाग ने स्पष्ट किया है कि खान एवं खनिज (विकास एवं विनियमन) अधिनियम 1957 तथा छत्तीसगढ़ गौण खनिज नियम 2015 के तहत दोषियों के विरुद्ध कड़ी कार्रवाई की जा रही है।
कार्रवाई के बावजूद बड़ा सवाल
हालांकि विभाग की यह कार्रवाई सराहनीय मानी जा रही है, लेकिन सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब लगातार छापेमारी में भारी मात्रा में अवैध रेत और वाहन पकड़े जा रहे हैं, तब आखिर यह अवैध कारोबार किसके संरक्षण में संचालित हो रहा है?
प्रतिबंध अवधि के दौरान भी नदी-नालों से लगातार रेत निकासी की शिकायतें सामने आती रही हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में देर रात और तड़के सुबह रेत परिवहन की गतिविधियां आम चर्चा का विषय बनी हुई हैं। ऐसे में यह सवाल उठना स्वाभाविक है कि यदि समय-समय पर इतनी बड़ी मात्रा में अवैध भंडारण और परिवहन पकड़ा जा रहा है, तो अब तक इस पूरे नेटवर्क के सरगनाओं तक कार्रवाई क्यों नहीं पहुंच पाई है?
खनिज विभाग की ताजा कार्रवाई ने यह जरूर साबित कर दिया है कि जिले में अवैध खनन का कारोबार अभी भी व्यापक स्तर पर संचालित हो रहा है। अब देखना होगा कि प्रशासन केवल वाहनों और रेत की जब्ती तक सीमित रहता है या फिर इस अवैध कारोबार के पीछे सक्रिय बड़े माफियाओं और उनके संरक्षकों तक भी कार्रवाई की आंच पहुंचती है।











