एक विभाग ने बताया आग बुझाने पर करोड़ों खर्च, दूसरे ने कहा कोयले को कोई नुकसान नहीं; जांच एजेंसियों से की गई शिकायत
छत्तीसगढ़/कोरबा :- साउथ ईस्टर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड (SECL) के कुसमुंडा क्षेत्र से सामने आए एक मामले ने कोयला कंपनी के कार्यप्रणाली और वित्तीय प्रबंधन पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। आरटीआई कार्यकर्ता एवं पत्रकार जितेंद्र कुमार साहू द्वारा प्राप्त दस्तावेजों के आधार पर यह आरोप लगाया गया है कि वर्ष 2020 से 2025 के बीच कोल स्टॉक में आग बुझाने के नाम पर करोड़ों रुपए खर्च किए गए, जबकि दूसरे विभाग के रिकॉर्ड में आग से कोयले की किसी प्रकार की क्षति दर्ज नहीं है।
प्राप्त जानकारी के अनुसार, परियोजना अभियंता (सिविल) द्वारा जारी पत्र क्रमांक SECL/GM(M)/KSM/C/26/520 दिनांक 27 अप्रैल 2026 में उल्लेख किया गया है कि वर्ष 2020 से 2025 के बीच कोल स्टॉक में लगी आग को नियंत्रित एवं बुझाने के कार्यों पर 4 करोड़ 27 लाख 96 हजार 191 रुपए व्यय किए गए।
वहीं, इसके अगले ही दिन 28 अप्रैल 2026 को जारी महाप्रबंधक (खान) कार्यालय के पत्र Ref. No. SECL/GM(M)/KSM/14 में यह जानकारी दी गई कि वर्ष 2020 से वर्तमान तिथि तक आग के कारण कोयले की मात्रा में किसी प्रकार की क्षति कार्यालय अभिलेखों में दर्ज नहीं पाई गई है।
दोनों विभागों के दस्तावेज सामने आने के बाद कई सवाल उठ रहे हैं। यदि आग बुझाने के लिए करोड़ों रुपए खर्च किए गए तो आग की वास्तविक स्थिति क्या थी और यदि आग से कोयले को कोई नुकसान नहीं हुआ तो खर्च की गई राशि का आधार क्या था? यही प्रश्न अब पूरे मामले के केंद्र में है।
आरटीआई कार्यकर्ता जितेंद्र कुमार साहू ने इसे गंभीर वित्तीय अनियमितता बताते हुए मामले की जांच की मांग की है। उन्होंने 23 जून 2026 को डाक के माध्यम से प्रधानमंत्री कार्यालय, प्रवर्तन निदेशालय (ED), केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI), केंद्रीय सतर्कता आयोग (CVC), नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (CAG), गंभीर धोखाधड़ी जांच कार्यालय (SFIO) तथा लोक लेखा समिति को शिकायत भेजकर मामले की विस्तृत जांच कराने का अनुरोध किया है।
शिकायत में आरोप लगाया गया है कि यदि दस्तावेजों में दर्ज तथ्य सही हैं तो आग बुझाने के नाम पर किए गए भुगतान, निविदाओं और कार्यों की निष्पक्ष जांच आवश्यक है। साथ ही पिछले पांच वर्षों के कोल स्टॉक का विशेष ऑडिट एवं भौतिक सत्यापन कराने की मांग भी की गई है।
यह मामला अब इसलिए भी महत्वपूर्ण हो गया है क्योंकि आरोप सीधे तौर पर सार्वजनिक उपक्रम के धन के उपयोग और प्रशासनिक जवाबदेही से जुड़ा हुआ है। हालांकि, इन आरोपों पर SECL प्रबंधन की आधिकारिक प्रतिक्रिया अभी सामने नहीं आई है। जांच एजेंसियों द्वारा शिकायत पर क्या कार्रवाई की जाती है और दस्तावेजों में दर्ज तथ्यों की वास्तविकता क्या है, इस पर सभी की नजरें टिकी हुई हैं।
(नोट : समाचार आरटीआई के माध्यम से प्राप्त दस्तावेजों और शिकायतकर्ता द्वारा लगाए गए आरोपों पर आधारित है। आरोपों की स्वतंत्र जांच एवं आधिकारिक पुष्टि होना शेष है।)











