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विश्व थायरॉइड दिवस : बदलती जीवनशैली में बढ़ रहा थायरॉइड रोग का खतरा, जागरूकता ही बचाव का सबसे बड़ा उपाय

थकान, वजन बढ़ना-घटना और तनाव को न करें नजरअंदाज, हो सकता है थायरॉइड का संकेत

छत्तीसगढ़/कोरबा :- (25 मई – विश्व थायरॉइड दिवस विशेष) आज की भागदौड़ भरी जिंदगी, अनियमित खानपान और तनावपूर्ण दिनचर्या के कारण थायरॉइड जैसी बीमारी तेजी से लोगों को अपनी चपेट में ले रही है। विश्व थायरॉइड दिवस के अवसर पर स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने लोगों से इस बीमारी के प्रति जागरूक रहने और समय रहते जांच कराने की अपील की है।

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थायरॉइड एक छोटी तितली के आकार की ग्रंथि होती है, जो गर्दन के सामने स्थित रहती है। यह शरीर के मेटाबॉलिज्म, ऊर्जा, वजन, तापमान और हार्मोन संतुलन को नियंत्रित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। जब यह ग्रंथि आवश्यकता से कम या अधिक हार्मोन बनाती है, तब कई प्रकार की स्वास्थ्य समस्याएं उत्पन्न होने लगती हैं।

थायरॉइड के प्रमुख प्रकार

विशेषज्ञों के अनुसार थायरॉइड विकार मुख्य रूप से हाइपोथायरायडिज्म और हाइपरथायरायडिज्म के रूप में सामने आते हैं।

हाइपोथायरायडिज्म में शरीर में थायरॉइड हार्मोन कम बनने लगता है, जिससे थकान, वजन बढ़ना, अवसाद, कब्ज और ठंड अधिक लगने जैसी समस्याएं होती हैं।

वहीं हाइपरथायरायडिज्म में हार्मोन अत्यधिक बनने लगता है, जिससे बेचैनी, अधिक पसीना, वजन घटना और दिल की धड़कन तेज होने जैसी समस्याएं सामने आती हैं।

इसके अलावा थायरॉइड नोड्यूल, घेंघा रोग और थायरॉइड कैंसर जैसी गंभीर समस्याएं भी लोगों में देखी जा रही हैं।

महिलाओं में अधिक खतरा

स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि पुरुषों की तुलना में महिलाओं में थायरॉइड रोग का खतरा कई गुना अधिक होता है। विशेषकर गर्भावस्था, प्रसव के बाद और हार्मोनल बदलाव के समय महिलाओं को ज्यादा सावधानी बरतने की आवश्यकता होती है।

इन लक्षणों को न करें नजरअंदाज

  • लगातार थकान और कमजोरी
  • अचानक वजन बढ़ना या घटना
  • बाल झड़ना
  • चिड़चिड़ापन और तनाव
  • कब्ज या पाचन संबंधी समस्या
  • ठंड या गर्मी अधिक लगना
  • गर्दन में सूजन या गांठ
  • महिलाओं में अनियमित मासिक धर्म

विशेषज्ञों ने बताया कि इन लक्षणों को सामान्य समझकर अनदेखा करना आगे चलकर गंभीर बीमारी का कारण बन सकता है।

आयोडीन की कमी भी बड़ा कारण

शरीर में आयोडीन की कमी थायरॉइड रोग का प्रमुख कारण मानी जाती है। इसके अलावा आनुवंशिक कारण, धूम्रपान, तनाव, विकिरण का प्रभाव और हार्मोनल दवाओं का अधिक सेवन भी इस बीमारी को बढ़ावा देता है।

योग और संतुलित जीवनशैली से नियंत्रण संभव

आयुर्वेदिक विशेषज्ञों के अनुसार नियमित योग, प्राणायाम और संतुलित आहार थायरॉइड नियंत्रण में बेहद लाभकारी हैं। सिंहासन, सूर्य नमस्कार, सर्वांगासन, मत्स्यासन और अनुलोम-विलोम जैसे योगासन शरीर को संतुलित रखने में मदद करते हैं।

साथ ही हल्का एवं सुपाच्य भोजन, पर्याप्त नींद और तनावमुक्त जीवनशैली अपनाने की सलाह दी गई है।

जागरूकता ही सबसे बड़ा बचाव

विश्व थायरॉइड दिवस का उद्देश्य लोगों को इस बीमारी के प्रति जागरूक करना और समय पर जांच व उपचार के लिए प्रेरित करना है। चिकित्सकों का कहना है कि समय रहते पहचान और सही उपचार से थायरॉइड रोग को पूरी तरह नियंत्रित किया जा सकता है।

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