प्रतिकूल दवा प्रभाव रिपोर्टिंग से लेकर एंटीबायोटिक उपयोग तक पर प्रशासन की कड़ी निगरानी
छत्तीसगढ़/कोरबा :- जिले में चलाए जा रहे पंद्रह दिवसीय विशेष अभियान “सही दवा-शुद्ध आहार, यही छत्तीसगढ़ का आधार” के अंतिम चरण में सोमवार को निजी एवं शासकीय अस्पतालों से जुड़ी फार्मेसियों की सघन जांच की गई। अभियान के तहत अस्पतालों में दवाओं के सुरक्षित भंडारण, एंटीबायोटिक और नशीली दवाओं के नियंत्रित उपयोग तथा मरीजों में होने वाले प्रतिकूल औषधीय प्रभाव (Adverse Drug Reaction) की रिपोर्टिंग प्रक्रिया का परीक्षण किया गया।
सचिव स्वास्थ्य एवं नियंत्रक के निर्देश पर कलेक्टर कुणाल दुदावत द्वारा गठित टीम ने सहायक औषधि नियंत्रक के मार्गदर्शन में जिलेभर में यह कार्रवाई की। औषधि निरीक्षक सुनील सांडे, रिशी साहू और वीरेन्द्र भगत की संयुक्त टीम ने विभिन्न अस्पतालों और मेडिकल स्टोर्स का निरीक्षण किया।
अभियान के दौरान एन.के.एच. हॉस्पिटल में डॉक्टरों और नर्सिंग स्टाफ को एंटीबायोटिक एवं मनःप्रभावी दवाओं के दुरुपयोग से होने वाले दुष्प्रभावों की जानकारी दी गई। अधिकारियों ने बताया कि बिना चिकित्सकीय पर्चे के ऐसी दवाओं की खरीद-बिक्री अपराध की श्रेणी में आती है और इससे स्वास्थ्य पर गंभीर असर पड़ सकता है।
निरीक्षण के दौरान फार्मेसियों में दवाओं के भंडारण, तापमान नियंत्रण, रिकॉर्ड संधारण, एक्सपायरी दवाओं की स्थिति तथा शेड्यूल-एच एवं एच-1 दवाओं के रख-रखाव की जांच की गई। साथ ही अस्पतालों में मरीजों को होने वाले प्रतिकूल औषधीय प्रभावों की रिपोर्टिंग प्रक्रिया का भी परीक्षण किया गया। अधिकारियों ने संबंधित फार्मासिस्टों और प्रबंधन को निर्देश दिए कि मरीजों की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए प्रत्येक दवा का वितरण नियमानुसार किया जाए।
जांच के दायरे में टीपी नगर स्थित केडीसीसी फार्मेसी, डॉ. आशीष अग्रवाल क्लीनिक, महादेव फार्मेसी, शिवाय हॉस्पिटल, अहान मेडिकल फार्मेसी, आरोग्य धाम हॉस्पिटल, हर्षिका फार्मेसी, पालीवाल मेडिको गेवरा, एम.के. मेडिको दीपका, जिला अस्पताल केंद्रीय औषधि भंडार, रानी धनराज कुंवर पीएचसी, जेपी सर्जिकल पीजी कॉलेज, मां सर्वमंगला मेडिकल और पूनम ड्रग हाउस समेत कई संस्थान शामिल रहे।













